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उफ्फ ये सिस्टम : जयपुर के अस्पताल में ऑक्सीजन खत्म हुई तो भाग गया स्टाफ, 4 मरीजों की मौत

जयपुर. कोरोना वायरस की तेज रफ्तार से सिस्टम भी हांफने लगा है। प्रदेश में मंगलवार को वक्त पर ऑक्सीजन न मिलने से 10 मरीजों ने दम तोड़ दिया। जयपुर में पहली बार ऑक्सीजन की कमी से 4 मरीजों की मौत हो गई। वहीं, कोटा और बीकानेर में भी 3-3 मरीजों ने दम तोड़ दिया। जयपुर के कालवाड़ थाना क्षेत्र में हाथोज स्थित किटी कोनिक्स खंडाका हॉस्पिटल में रात करीब 9:00 बजे अचानक ऑक्सीजन खत्म होने से ये मौतें हुईं।

यही नहीं, परिजनों के डर से घबराया स्टाफ मरीजों को तड़पता हुआ छोड़कर अस्पताल से भाग गया। पहले दो ही मरीजों के दम तोड़ने की सूचना मिली थी, लेकिन जब पुलिस अंदर पहुंची तो 4 मरीजों की मौत हो चुकी थी। मृतकों में शामिल 60 वर्षीय भैरूलाल 7 बेटियों के पिता थे। वहीं, 33 साल के महेंद्र सिंह की एक साल पहले ही शादी हुई थी।

उन्होंने दो दिन पहले ही अपनी पत्नी को यह कहकर पीहर भेज दिया था कि उनकी तबीयत अब ठीक है। मरीजों की मौत के बाद रात 2 बजे तक परिजन अस्पताल के बाहर हंगामा करते रहे। वहां पुलिस का अतिरिक्त जाब्ता तैनात किया गया है। जयपुर, कोटा और बीकानेर के अस्पताल प्रशासन का कहना है कि ऑक्सीजन की कमी नहीं थी, मरीजों की हालत गंभीर थी, इसलिए मौतें हुईं।

पीड़ित की जुबानी… ऑक्सीजन सिलेंडर बेड के नीचे रखा था, लेकिन डॉक्टर ने लगाया नहीं और भाग गई

भाई महेंद्र (33) को 22 अप्रैल को हमने यहां भर्ती कराया था। 26 की रात तक उनकी तबीयत में काफी सुधार था। लेकिन 27 की सुबह अस्पताल स्टाफ ने हमें उनसे मिलने नहीं दिया। कहा गया कि उनके पास के बेड वाले मरीज की मौत हो गई है। रात करीब 9 बजे मैंने उन्हें पानी पिलाया। उनके ऑक्सीजन लगी हुई थी।

मैं सवा 9 बजे के करीब खाना लेने नीचे आया तभी अचानक शोर मचने लगा। मैं तुरंत भाई के पास पहुंचा तो वे ऑक्सीजन की कमी से तड़प रहे थे। जबकि उनके बेड के नीचे ही सिलेंडर रखा था। मैंने एक महिला डॉक्टर से सिलेंडर लगाने को कहा तो वो नीचे चली गई और उसके बाद पूरा स्टाफ भाग गया। मेरी आंखों के सामने ही मेरे भाई ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया।

परिजनों का आरोप है कि दो मरीजों की मौत होने से घबराया स्टाफ अस्पताल से भाग गया। इसी वजह से जिन मरीजों की ऑक्सीजन खत्म हो गई थी, उन्हें दूसरा सिलेंडर नहीं लग पाया और उनकी जान चली गई। अस्पताल के डॉक्टर सुधीर व्यास का कहना है कि ऑक्सीजन की कमी नहीं थी। मरीजों को गंभीर हालत में ही अस्पताल लाया गया था, इसलिए मौतें हुईं।

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