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गुजरात में RT-PCR जांच घाेटाला: टारगेट पूरा करने को रचा फर्जीवाड़ा, एक नाम के 270 सैंपल दर्ज!

अहमदाबाद. गुजरात में आरटीपीसीआर जांच के नाम पर एक बड़ा घोटाला सामने आया है। सैंपल के साथ स्वास्थ्यकर्मियों के ही मोबाइल नंबर को रिकॉर्ड में दर्ज कर इस घोटाले को अंजाम दिया गया। इसकी संख्या एक-दो नहीं, बल्कि हजारों में है। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि धोराजी के एक गांव की महिला के मोबाइल नंबर से  राज्य में 270 सैंपल दर्ज मिले।

मीडिया ने जब इस महिला से संपर्क किया तो उसने बताया कि उसने आज तक कोई सैंपल ही नहीं दिया। हां, वैक्सीन जरूर लगवाने गई थी। इसी तरह राजकोट में 26 स्वास्थ्य कर्मियों के मोबाइल नंबर का प्रयोग 1,073 सैंपल में किया गया। अहमदाबाद की एक तहसील में 30 आशावर्कर के नंबर पर 1,857 सैंपल लिए गए जबकि महेसाणा में 140 सैंपल स्वास्थ्यकर्मी के मोबाइल नंबर से ही भेजे गए।

कई जिलों में सैंपल के लिए फर्जी नाम डाले
टीम को राजकोट के अलावा अन्य जिलों की सूची में भी 60 हजार सैंपल्स में गड़बड़ी नजर आई। एक मोबाइल नंबर ऐसा मिला जिस पर 270 सैंपल जांच के लिए भेजे गए। हालांकि, इन 270 सैंपल में नाम और पते अलग-अलग दर्ज थे, लेकिन मोबाइल नंबर एक ही था। यह नंबर धोराजी के एक गांव की महिला का निकला। उपलब्ध डेटा में 1,073 सैंपल ऐसे मिले जो 26 मोबाइल नंबर पर दर्ज हैं।

ये सभी 26 मोबाइल नंबर राजकोट के ही स्वास्थ्यकर्मियों के निकले। आरटीपीसीआर सैंपल के साथ दर्ज 90 मोबाइल नंबर गलत मिले, लेकिन इनकी जांच रिपोर्ट का निष्कर्ष निगेटिव दर्ज मिला। अहमदाबाद की एक तहसील में 1,857 सैंपल 30 आशावर्कर के मोबाइल नंबर पर दर्ज मिले। भास्कर टीम के पड़ताल के लिए फोन करते ही स्वास्थ्यकर्मी घबरा गए और कॉल काट दिए। हालांकि, भास्कर के पास स्वास्थ्यकर्मियों के नाम थे।

खुलासा: बिना नमूना लिए सैंपल में मनमर्जी नाम लिख रहे

ग्रामीण अंचल में एकाएक कोरोना के मामले घटने पर मीडिया ने पड़ताल की। पता चला कि ग्रामीण अंचल में कुछ ऐसे स्वास्थ्य केन्द्र और टेस्टिंग सेंटर हैं, जहां सैंपल ही नहीं लिए जा रहे हैं। बावजूद यहां से जांच के लिए धड़ल्ले से सैंपल लैब में भेजे जा रहे हैं। सैंपल किट की ट्यूब को खोल कर किसी भी व्यक्ति के स्वैब-लार आदि का नमूना लिए बिना ही मनमर्जी से नाम लिख कर सैंपल को जांच के लिए लैब भेजकर कर्मचारी टार्गेट पूरा करने में लगे हैं।

सैंपल ट्यूब में किसी व्यक्ति का सैंपल न होने के चलते जांच रिपोर्ट का निष्कर्ष निगेटिव ही आता है। मीडिया ने 14 मई से 3 जून तक राजकोट की लैब में हुए आरटीपीसीआर की रिपोर्ट प्राप्त की। इनका अवलोकन कर संदिग्ध नंबरों को पहचान कर सूची बनाई। इसमें दर्ज नंबरों पर फोन करके सच्चाई जानने की कोशिश की, तो पता चला कि 150 सैंपल में स्वास्थ्यकर्मियों के मोबाइल नंबर दर्ज किए गए।

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