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अपनों की मौतों से डर बैठा, लॉकडाउन से फायदा मिला.. ऐसे दोबारा काबू में आया कोरोना!  

जयपुर.

पूरे देश में कोरोना की दूसरी लहर का प्रभाव धीमा पड़ता जा रहा है। राजस्थान में इसका असर देखने को मिला है और यहां भी केसों की संख्या में कमी आई है। राजस्थान में कोरोना का डाउन फॉल मई में शुरू हो गया था, मई के आखिरी 17 दिन में राज्य में कोरोना केसों की संख्या भी 89 फीसदी तक की गिरावट आई थी। मौजूदा स्थिति देखे तो अब पिछले 6 दिन में राज्य में कुल 6388 नये मरीज ही मिले है। अचानक तेजी से आए डाउन फॉल को देखकर लोग आश्चर्यचकित है कि अचानक इतनी कंट्रोल में कैसे आ गया।

एक्सपर्ट से की तो उन्होंने इसे लॉकडाउन का असर बताया। साथ ही कहा कि पहली लहर की तुलना में दूसरी लहर में अधिक मौतों से जो डर बैठा उससे लोगों ने काफी सावचेती बरती। लग घरों में रहकर भी बेहद सतर्क रहे और फियर फैक्टर (लोगों में डर) भी इसका एक कारण माना जा रहा है। वहीं, विशेषज्ञों का ये भी कहना है कि अगर लॉकडाउन नहीं लगता तो इस लहर का कहर अभी भी ज्यादा समय तक बना रहता। 24 अप्रैल से चले जन अनुशासन पखवाड़ा और 10 मई से लगे सख्त लॉकडाउन का असर दिखने में 10-15 दिन लग गए। इस दौरान लोगों की भीड़ और आवाजाही बिल्कुल कंट्रोल में आ गई।

एक्सपर्ट ने बताए कोरोना काबू में आने के ये कारण

  • SMS अस्पताल के प्रोफेसर और मेडिकल यूनिट के हैड डॉक्टर रमन शर्मा का कहना है कि अप्रैल-मई में सरकार ने जो लॉकडाउन लगाया उसका असर 10-15 दिन में दिखने को मिला। लोग भी लॉकडाउन में अवेयर हुए और कोविड एप्रोप्रियेट बिहेवियर अपनाया। इसी का परिणाम निकला कि केसेज कम आने लगे हैं।
  • एक बड़ा कारण फियर फैक्टर रहा। अप्रैल में जिस तरह तेजी से कैसेज आए, लोगों को अस्पतालों में जगह और ऑक्सीजन नहीं मिली, मौत के केस तेजी से बढ़ने लगे उसका डर लोगों में तेजी से फैल गया, इसी कारण से लोग बहुत ज्यादा सतर्क हुआ।
  • वरिष्ठ श्वसन रोग विशेषज्ञ और SMS अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉक्टर वीरेन्द्र सिंह की मानें तो उन्होंने लॉकडाउन को डाउन फॉल का मुख्य कारण बताया है। साथ ही लोगों में कोरोना का डर इस बार ज्यादा देखने को मिला। इसके कारण लोग अवेयर हुए और मास्क पहनने लगे हैं। हालांकि उन्होंने चेताया है कि अभी ओपीडी में केसेज तो कम हो गए, लेकिन गंभीर मरीजों की संख्या अब भी उतनी ही बनी हुई है।
  • अप्रैल-मई में जब कोरोना पीक पर चल रहा था तब और अब में ऑक्सीजन की खपत 50-60 ही घटी है। जबकि नये संक्रमित केसों की संख्या 90 फीसदी तक कम हो गई। उन्होंने कहा कि आने वाले 3 माह हमारे लिए गोल्डन टाइम रहेगा, इस दौर में जितना ज्यादा से ज्यादा 18+ उम्र के लोगों को वैक्सीन लगाई जाएगी उतना ही ज्यादा हम तीसरी लहर में डेथ केसेज और अस्पतालों में आने वाली मरीजों की भीड़ को कंट्रोल में ला सकेंगे।

57 दिन यूं चली दूसरी लहर, ऐसे बढ़े केस

दिन केस मिले मौत
5 से 16 अप्रैल 55,984 243
17 से 23 अप्रैल 87,964 381
24 से 30 अप्रैल 1,14,728 786
1 से 7 मई 1,22,798 1176
8 से 14 मई 1,15,015 1126
15 से 21 मई 67,604 1003
22 से 31 मई 36,540 910
1 से 7 जून 7,017 302

मई का पहला सप्ताह बेहद घातक रहा

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से जारी रिपोर्ट का विश्लेषण करें तो दूसरी लहर में 5 अप्रैल से तेजी से बढ़ने लगे थे। मई का पहला सप्ताह (1-7 तक) सबसे ज्यादा घातक रहा। इस सात दिन के अंदर कुल 1.22 लाख लोग संक्रमित हुए। वहीं दूसरे सप्ताह में 1.15 लाख लोग कोरोना की चपेट में आए। इससे पहले अप्रैल के आखिरी सप्ताह (24-30 अप्रैल) में 1.14 लाख नए मरीज मिले थे। दूसरी लहर में ये तीन ऐसे सप्ताह रहे, जब संक्रमित केसों की संख्या एक लाख से ज्यादा रही।

एक दिन में 18,298 तक पहुंचे थे केस, एक माह तक हर रोज 5 डिजिट में मिल रहे थे नये मरीज राजस्थान में कोरोना के केस दूसरी लहर में 5 अप्रैल से तेजी से बढ़ने लगे थे, जब पूरे राज्य में 2,429 केस आए थे। इसके एक सप्ताह बाद 12 अप्रैल तक दोगुना से ज्यादा हो गए। 18 अप्रैल से तो केसों की संख्या 5 डिजीट में आनी शुरू हो गई, जो 17 मई यानी एक माह तक बनी रही। 2 मई को सबसे ज्यादा केस 18,298 केस एक दिन में आए थे। वहीं डेथ केस भी 11 अप्रैल के बाद तेजी से बढ़ने लगे थे। पूरे राज्य की स्थिति देखे तो दूसरी लहर में 57 दिनों (5 अप्रैल से 31 मई) के अंदर कुल 6 लाख 633 लोग संक्रमित हुए, जबकि 5,556 लोगों की कोरोना से मौत हुई है।

झालावाड़ में सबसे ज्यादा जानलेवा रहा कोरोना
राज्य की जिले वार स्थिति देखे तो जयपुर में कोरोना की दूसरी लहर में 57 दिनों (5 अप्रैल से 31 मई) के अंदर सबसे 1361 लोगों की जान गई, लेकिन कोरोना सबसे ज्यादा जानलेवा झालावाड़ जिले में रहा। यहां इन 57 दिनों के अंदर 9426 लोग संक्रमित हुए, जबकि इनमें से 159 की मौत हो गई यानी हर 59 में से एक मरीज की यहां कोरोना से जान गई। यह बारां जिले में सबसे कम जानलेवा रहा, यहां 9025 मरीज में से केवल 22 लोगों की जान गई यानी 410 में से एक मरीज कोरोना से हार गया।

23 फीसदी तक पहुंची औसत संक्रमण दर
राज्य में कोरोना की दूसरी लहर में पीक के समय औसतन संक्रमण दर 18 से 23 फीसदी के बीच रही। सबसे ज्यादा संक्रमण दर मई के दूसरे सप्ताह में 23.13 फीसदी रही। लेकिन अगर प्रतिदिन संक्रमण की दर देखे तो अप्रैल-मई के दौरान कुछ ऐसे दिन भी रहे जब संक्रमण की दर 30 फीसदी से ऊपर दर्ज हुई। 10 मई को यह सर्वाधिक 40 फीसदी दर्ज की गई थी। वहीं रिकवरी रेट भी एक समय बहुत डाउन हो गई थी। सबसे कम रिवकरी रेट एक मई को 69.67 फीसदी तक पहुंच गई थी।

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