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कोरोना : ब्रिटेन को पछाड़ दिया योगी का यूपी, जानें इनके सिस्टम में है क्या खूबी ?

एक ओर जहां दुनियाभर में कोरोना अपना प्रकोप दिखा रहा है, वहीं उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने इस महामारी पर काफी नियंत्रण कर रखा है। आंकड़ों के मुताबिक, विकसित देश कहा जाने वाला ब्रिटेन भी जिस महामारी के सामने हाथ बांधे खड़ा रहा, वहीं उसी के बराबर क्षेत्रफल और उससे कई गुना अधिक जनसंख्या वाला उत्तर प्रदेश कोरोना से आंख मिलाकर खड़ा हो गया। ब्रिटेन में जहां कोरोना पॉजिटिव केसों के साथ मरीजों की मौत की संख्या भी बढ़ती जा रही है, वहीं उत्तर प्रदेश ने इसपर काफी हद तक नियंत्रण कर रखा है।

आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश का क्षेत्रफल 93,933 स्क्वेयर मील है, वहीं ब्रिटेन का क्षेत्रफल 93,628 स्क्वेयर मील है। आबादी की बात करें तो ब्रिटेन की आबादी करीब 6.6 करोड़ है तो उत्तर प्रदेश की आबादी 23 करोड़ यानी ब्रिटेन से करीब 4 गुना अधिक है। एक तरफ वह देश है जो पूरी तरह से विकसित है, जहां की चिकित्सा सुविधाओं से लेकर अन्य सभी सुविधाएं एक नजीर के तौर पर पेश की जाती थीं, वहीं दूसरी तरफ एक विकासशील देश भारत का एक राज्य मात्र है। लेकिन कोरोना ने जब अपना प्रकोप दिखाना शुरू किया तो ब्रिटेन का मैनेजमेंट फेल हो गया और यूपी की योगी सरकार का मैनेजमेंट बन गया मिसाल। यह हम नहीं कह रहे, बल्कि आंकड़े कह रहे हैं।

ये हैं ब्रिटेन के आंकड़े
ब्रिटेन में अबतक 382,650 टेस्ट हो चुके हैं, जिसमें से 93,873 केस कोरोना पॉजिटिव निकले हैं। यानी कुल टेस्ट में से करीब 25% लोग पॉजिटिव पाए गए हैं। वहीं देश में अब तक 12,107 लोगों की मौत हो चुकी है। यानी कुल पॉजिटिव पाए गए मरीजों में से करीब 13 प्रतिशत मरीजों की मौत हो चुकी है।

यूपी में सिर्फ 1% मरीजों की मौत
वहीं उत्तर प्रदेश की बात करें तो बुधवार सुबह तक 16,720‬ संदिग्धों के कोरोना टेस्ट हो चुके हैं। इनमें से 705 लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई है। यानी कुल टेस्ट में से अब तक सिर्फ 4.2 प्रतिशत लोग ही कोरोना पॉजिटिव निकले हैं। वहीं सूबे में अब तक सिर्फ 8 लोगों की मौत हुई है, जो कि कुल मरीजों की संख्या का सिर्फ 1 प्रतिशत। और अगर इन आंकड़ों से तबलीगी जमात के लोगों या उनके संपर्क में आए मरीजों की संख्या कम कर दी जाए तो यह प्रतिशत आधे से भी कम रह जाता है। आपको बता दें कि यूपी में कुल मरीजों में करीब 400 लोग यानी आधे से अधिक मरीज ऐसे हैं जो तबलीगी जमात मरकज में आयोजित जलसे में शामिल हुए थे, या फिर उनके संपर्क में आए थे।

‘सख्त फैसले, प्रभावी मैनेजमेंट से पाया नियंत्रण’
अभी तक के आकड़ों के लिहाज से उत्तर प्रदेश में कोरोना काफी हद तक नियंत्रण में है। सीएम योगी की सरकार में शामिल एक अधिकारी के मुताबिक कोरोना के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए पीएम मोदी द्वारा लॉकडाउन का फैसला लिए जाने से पहले ही सीएम योगी ने बोल्ड फैसले लेने शुरू कर दिए थे। उन्होंने प्रदेश के कई हिस्सों में अलग-अलग तरह से बैन लगातर शुरुआत से ही कोरोना पर नियंत्रण बनाने का रास्ता तैयार कर लिया था। अधिकारी के मुताबिक, पीएम मोदी ने जब देश में लॉकडाउन का फैसला किया तो एक ओर जहां सीएम योगी ने इसे कड़ाई से लागू करवाने के निर्देश दिए तो वहीं गरीबों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर पहुंचाने की भी योजना बना डाली।

गेमचेंजर बनी योगी की ‘स्पेशल-11’
सीएम योगी ने कोरोना पर नियंत्रण करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की अध्यक्षता में 11 कमिटियों का गठन किया। गरीबों को सुविधाएं मिलनी शुरू हुईं तो उन्होंने भी लॉकडाउन के नियमों का पालन किया, जिससे कोरोना वायरस पर काफी हद तक नियंत्रण बनाए रखा जा सका। दूसरी ओर जरूरी सामानों की होम डिलिवरी से लेकर गरीबों के लिए बनाने गए कम्युनिटी किचन से उनतक बना-बनाया खाना पहुंचाए जाने जैसे फैसलों से भी जनता को भरोसे में लिया जा सका कि सरकार पूरी तरह से उनका ख्याल रख रही है।

यूपीडीएफ ने भी जारी किए थे आंकड़े
इससे पहले उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट फोरम (यूपीडीएफ) ने भी 7 अप्रैल को आंकड़े जारी करते हुए बताया था कि दुनिया के कई देशों के मुकाबले यूपी में कोरोना संक्रमण के मामले काफी नियंत्रण में हैं। यूपीडीएफ के महासचिव पंकज जयसवाल ने कहा कि हमारी टीम ने दुनिया के कई देशों को लेकर 7 अप्रैल को बड़े लेवल पर एक रिसर्च जारी की थी।

उसके मुताबिक, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस की कुल आबादी से भी ज्यादा आबादी सिर्फ उत्तर प्रदेश की है, लेकिन कोरोना पॉजिटिव केस के मामले में 7 अप्रैल तक तीनों देशों के कुल संक्रमित मरीजों की तुलना में यूपी में सिर्फ 0.1 प्रतिशत मरीज ही सामने आए थे। पंकज के मुताबिक, इसकी वजह यह थी कि योगी ने कोरोना को रोकने के लिए कड़े फैसले लिए।

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