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कोरोना में उलझा भारत तो नई चाल चल दिया ड्रैगन, बॉर्डर पर भेजा सबसे बर्बर कमांडर!

चीन ने भारत को कोरोना वायरस महामारी से जूझता देख तिब्बत में नए कमांडर को नियुक्त किया है। चीनी सेना के पश्चिमी थिएटर कमांड के अंदर आने वाले तिब्बत सैन्य क्षेत्र के नए कमांडर का नाम लेफ्टिनेंट जनरल वांग काई है। इससे पहले ये चीनी सेना के सबसे खूंखार मानी जाने वाली एलीट 13वीं ग्रुप आर्मी के कमांडर थे। इस एलीट फोर्स को टाइगर्स इन द माउंटेंस के नाम से जाना जाता है, जो पहाड़ी क्षेत्रों में लड़ाई करने में पारंगत है। जिसके बाद से यह अंदेशा जताया जाने लगा है कि चीन कहीं फिर से भारत के साथ धोखा करने प्लान तो नहीं बना रहा।

चीन ने गुपचुप की नियुक्ति
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने लेफ्टिनेंट जनरल वांग काई की नियुक्ति को काफी गुपचुप तरीके से अंजाम दिया है। इस बात का खुलासा सोमवार को कम्युनिस्ट पार्टी के इतिहास शिक्षा वर्ग में हुआ। इस दौरान वांग काई चीन के सबसे बड़े सैन्य क्षेत्र पश्चिमी थिएटर कमांड के अंतर्गत आने वाले तिब्बत सैन्य क्षेत्र के नए कमांडर के रूप में दिखाई दिए। चीनी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वांग काई से पहले इस पद पर वैंग हाईजियांग काबिज थे, जिन्हें अब शिनजियांग उइगुर स्वायत्त क्षेत्र में एक सरकारी अधिकारी बना दिया गया है।

चीन की एलीट कमांडो यूनिट के कमांडर थे वांग काई
वांग काई को आज से आठ साल पहले 2013 में चीन की एलीट 13वीं ग्रुप आर्मी का कमांडर बनाया गया था। जिसके बाद वे लगातार सेना में तरक्की पाते रहे। इनके नेतृत्व में चीनी सेना की इस स्पेशल कमांडो यूनिट ने कई गुप्त अभियानों को अंजाम दिया है। चोंगकिंग स्थित चीनी सेना की 13वीं ग्रुप का लड़ाकू ईकाइयों में काफी नाम है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, यह ग्रुप कठिन परिस्थिति में भी जंगल, घाटी और पहाड़ी इलाकों में लड़ाई करने में माहिर है।

चीनी सेना के ग्रुप के पास सबसे ज्यादा युद्ध मेडल
चीन की 13वीं ग्रुप फोर्स को 1949 के बाद से युद्ध अभियानों में भाग लेने वाला एकमात्र समूह माना जाता है। 1950 के दशक में कोरियाई युद्ध के बाद से इस ग्रुप के पास किसी भी दूसरी चाइनीज ग्रुप आर्मी से ज्यादा युद्ध सम्मान मिले हुए हैं। मध्य चीन में ताइयु मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट में स्थित इसके हेडक्वॉर्टर में 1930 से काम करने वाले सभी सैनिकों का बॉयोडेटा भी रखा हुआ है।

लद्दाख विवाद में इनके ही लड़ाकों ने लिया था हिस्सा
तिब्बत कमांड में अधिकांश सैनिक चीन के यून्नान प्रांत के निवासी होते हैं। माना जाता है कि 2017 के डोकलाम तनातनी और 2020 के लद्दाख विवाद में इसी ग्रुप के कमांडो सैनिकों ने हिस्सा लिया था। इनके प्रमुख कार्यों में तिब्बत की स्थिरता सुनिश्चित करना और भारत-वियतनाम के साथ लगी चीन की सीमाओं की रक्षा करना शामिल है। इस कोर के पूर्व कमांडरों में जनरल जांग यूशिया भी शामिल हैं, जो अभी चीनी सेना के सर्वोच्च निर्णय लेने वाले निकाय केंद्रीय सैन्य आयोग के दूसरे सबसे बड़े कमांडर हैं।

तिब्बत को लेकर परेशान है चीन
चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के एक पूर्व प्रशिक्षक सॉन्ग झोंगपिंग ने SCMP को बताया कि चीन के लिए तिब्बत का इलाका अब भी चिंता का विषय बना हुआ है। इसलिए, ही वांग काई को उनके व्यापक युद्ध अनुभवों को देखते हुए इस इलाके की जिम्मेदारी दी गई है। पेइचिंग को को इस क्षेत्र की देखरेख करने और चीनी सीमा को सुरक्षित रखने के लिए बहुत पहले से एक अनुभवी कमांडर की आवश्यकता थी, जिसपर वांग काई बिलकुल फिट बैठे हैं।

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