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कोरोना से महाभारात : क्या है भीलवाड़ा मॉडल जिसे पूरे देश में लागू करने की है चर्चा ?

राजस्थान के भीलवाड़ा ज़िले को अब सब जानने लगे हैं और इसकी वजह कोरोना है. कोरोना का संक्रमण सबसे ज़्यादा यहीं देखने को मिला था जिसकी वजह से इसे कोरोना का हॉटस्पॉट भी कहा जाने लगा था. जिस तेज़ी से कोरोना इस ज़िले में फैल रहा था, लोगों को लगने लगा था कि ये दूसरा इटली बनाने जा रहा है. 18 मार्च तक यहाँ कोरोना का एक भी मरीज नहीं था पर 30 मार्च आते-आते संक्रमित लोगों का आंकड़ा बढ़ा और यूं बढ़ा कि 26 पहुँच गया. इस वायरस की अभी तक कोई वैक्सीन बाज़ार में उपलब्ध नहीं है तो सरकार के पास भी एक ही विकल्प था, कर्फ़्यू. वक़्त से पहले राज्य सरकार ने ऐसे कदम उठाए कि आज हर तरफ इस सरकार की वाह-वाही हो रही है. केंद्र सरकार ने राज्य सरकार के उपायों की सराहना की है. भीलवाड़ा में कोरोना वायरस इस तरह फैल रहा था कि वहाँ के एक निजी अस्पताल का डॉक्टर इससे संक्रमित हो गया, जिसके बाद उसके साथ काम करने वाले सभी इसकी चपेट में आ गए.

भीलवाड़ा मॉडल क्या है?

भीलवाड़ा में डॉक्टर के संक्रमित होने के बाद 27 अन्य लोग इस बीमारी से संक्रमित हुए. लेकिन ये आंकड़ा इससे बढ़ न सका. जैसे ही पॉज़िटिव मरीज सामने आये, पूरे ज़िले में कर्फ़्यू लगाकर सीमाएं सील कर दी गयीं. सरकार ने ज़िले के सभी निजी अस्पतालों और होटलों को अपने अंडर ले लिया. लॉकडाउन का सख्ती से पालन किया गया और घर-घर जाकर स्क्रीनिंग की गयी. जनप्रतिनिधियों, मीडिया और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों को भी शहर में प्रवेश नहीं दिया गया. जिला प्रशासन और पुलिस के भी कुछ ही अधिकारी शहर में गए. राज्य सरकार ने पहले दिन से ही इस पर काम करना शुरू कर दिया था. पहले दिन ही सभी सीमाएं सील कर दी गयी थीं और 14 एंट्री प्वाइंट्स बंद कर दिये गए थे. ताकि कोई भी अंदर से बाहर न जा सके न कोई अंदर आ सके. रोडवेज़ की बसों को बंद कर दिया गया और प्राइवेट गाड़ियों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया. जिन इलाकों में कोरोना पॉज़िटिव मरीज मिले थे, उन इलाकों में जाना पूरी तरह बंद कर दिया गया था. स्क्रीनिंग के लिए 2,100 टीमें बनाई गयीं और हर दिन हजारों लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है. 16,000 स्वास्थ्यकर्मियों की टीम को भीलवाड़ा भेजा गया. स्क्रीनिंग टेस्ट में कम से कम 18,000 लोगों में सर्दी-जुकाम के लक्षण पाये गए.

इन सबके बीच लोगों की भी तारीफ बनती है कि उन्होंने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया. जिसकी वजह से मामला और आगे नहीं बढ़ा. भीलवाड़ा में प्रशासनिक, पुलिस और मेडिकल के थ्री टियर प्रयास के साथ-साथ वहां की जनता ने भी सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखा. इसकी बदौलत कोरोना पर काफी हद तक नियंत्रण कर लिया गया है. भीलवाड़ा में पिछले 17 दिनों से कर्फ्यू लगा हुआ है. पिछले तीन दिनों से शहर में महा कर्फ्यू लगा हुआ है, यहां तीन हजार पुलिस के जवान और एक दर्जन वरिष्ठ अधिकारी तैनात किए गए हैं.

भीलवाड़ा के करीब 28 लाख लोगों में से 24 लाख लोगों की स्क्रीनिंग करवा दी गई है. पिछले सर्वे में 6 हजार टीमों द्वारा 24 लाख लोगों की स्क्रीनिंग 9 दिनों में हुई थी. जिन भी लोगों में संक्रमण पाये गए थे, उनकी पहले सूची तैयार की गयी फिर उनके घर पहरा लगाया गया. पिछले 10 दिनों में ये वायरस 333 फीसदी की रफ्तार से बढ़ा था पर अब इस पर काबू पा लिया गया है. मरीजों के संपर्क में जो 6,000 लोग आए थे उन्हें क्वारंटीन किया गया और होटलों में रहने की व्यवस्था की गयी.

भीलवाड़ा को देखते हुए ये बात भी हो रही है कि पूरे देश में भीलवाड़ा मॉडल को फॉलो किया जा सकता है.

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