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हरियाणा के इस हुक्के की गुड़गुड़ गूंजती सात समुंदर पार, खरीदने को लोग करते हैं महीनों इंतजार

पंचों का प्याला हुक्का कहलाता है. हरियाणा में ही नहीं देश के कई राज्यों में इसी हुक्के की गुड़गुड़ाहट के बीच गांव के बुजुर्ग राजनीति से लेकर कई तरह के मुद्दों पर चर्चा करते हैं. कुछ युवा भी बुजुर्गों से ज्ञान लेने के लिए इसी हुक्के को एक दूसरे के लिए घुमाने और बुजुर्गों से सीख लेने के लिए उनके पास बैठते हैं. वहीं हुक्के की बात हो और गोहाना के भैंसवाल गांव में बनने वाले हुक्के का जिक्र ना किया जाए तो बड़ी बेईमानी होगी.

गोहाना है कई चीजों के लिए मशहूर

हरियाणा के सोनीपत जिले का गोहाना हल्का वैसे तो काफी चीजों के लिए मशहूर है. गोहाना की जलेब सिर्फ अपने देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मशहूर हैं, यहां उगाई जाने वाली गाजर की मांग दूसरे राज्यों में होती है. लेकिन इनके साथ-साथ गोहाना के गांव भैंसवाल में बनने वाला हुक्का भी काफी मशहूर है.

50 साल की गारंटी दी जाती है इस हुक्के की

भैंसवाल गांव के हुक्के भारत के साथ-साथ विदेशों में भी मशहूर हैं. गोहाना शहर से लगभग 10 किलोमीटर दूर बसे ओलंपियन पहलवान योगेश्वर दत्त के गांव भैंसवाल में बनने वाले इस हुक्के को खरीदने के लिए ग्राहक को करीब 3 महीने तक इंतजार करना पड़ता है. इस हुक्के की खासियत ये है कि ये आम हुक्कों से वजन में 10 किलो ज्यादा होता है और इसकी गारंटी 50 साल तक की दी जाती है.

चार पीढ़ियों से बना रहे हैं हुक्का

हुक्का बनाने वाले कारीगर लगातार चार पीढ़ियों से गांव में हुक्का बनाने का काम कर रहे हैं. भैंसवाल गांव के कार्यवाहक सरपंच राजेश कुमार और अन्य बुजुर्ग लोगों का कहना है कि हमारे गांव के बने हुए हुक्के बहुत ज्यादा मशहूर हैं. लगातार हमारे पास हुक्का लेने के लिए फोन भी आते हैं. गांव में ये लोग चार पीढ़ियों से हुक्का बना रहे हैं. इनके दादा ने शुरुआत की थी और उनके बेटे कलीराम ने इस काम को आगे बढ़ाया. अब कलीराम के बेटे धर्मबीर, कर्मवीर और विष्ण कुमार हुक्का बनाने का काम आगे बढ़ा रहे हैं.

9 से लकर 27 हजार तक में मिलता है ये हुक्का

हरियाणा में आम तौर पर हुक्का 3000 रुपये में मिल जाता है, लेकिन भैंसवाल गांव का ये हुक्का 9000 रुपये से शुरू होकर 27,000 रुपये तक मिलता है. ये पूरा हुक्का हाथों से तैयार किया जाता है. इसमें लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है और खास तौर पर पीतल लगाया जाता है. इसमें तांबे की तारों से जुड़ाई बनाई होती है जो कि आराम से 30 से 35 साल तक चलती है.

हालांकि तंबाकू का सेवन सेहत के लिए हानिकारक है, लेकिन ग्रामीण आंचल में आज भी हुक्के की गुड़गुड़ाहट पर बड़े-बड़े फैसले लिए जाते हैं, और भैंसवाल गांव के इस हुक्के की धनक विदेशों तक है. तभी तो इस हुक्के के लिए खरीददार महीनों तक इंतजार करने के लिए भी बेहिचक तैयार रहते हैं.

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