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योगी के कोरोना नियंत्रण को अभूतपूर्व बताये मोदी, बड़ा सवाल- क्या ये तस्वीरें याद नहीं?

लखनऊ : ‘काशी सहित यूपी ने पूरे सामर्थ्य के साथ कोरोना महामारी का मुकाबला किया. आज यूपी सबसे ज्यादा टेस्टिंग करने वाला राज्य है. आज यूपी पूरे देश में सबसे ज्यादा वैक्सीनेशन करने वाला राज्य है. सेकेंड वेव के दौरान यूपी ने जिस तरह कोरोना संक्रमण को फैलने से रोका, वह अभूतपूर्व है’. यह शब्द प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हैं, जो एक दिवसीय दौरे पर वाराणसी पहुंचे थे और कोरोना प्रबंधन को लेकर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की तारीफों के पुल बांध दिए. प्रधानमंत्री मोदी ने जब बीएचयू के प्रांगण से इन शब्दों के साथ योगी सरकार की तारीफें कीं, तो वहां मौजूद लोगों की तालियों से पूरा प्रांगण गूंज उठा. साथ ही पूरे उत्तर प्रदेश की जनता के दिमाग में अप्रैल और मई महीने का वह मंजर भी घूम गया, जब हर दिन कोरोना के 30 हजार से ज्यादा मामले सामने आते थे और 300 से ज्यादा मौतें हो रहीं थीं.

विपक्ष तो योगी सरकार पर कोरोना से हुई मौत के आंकड़ों को छुपाने तक का आरोप लगाने लगा था. सरकार की मंशा पर आखिर विपक्ष को शक भी कैसे न होता, राजधानी लखनऊ में श्मशान घाट पर जलती चिताओं का खोफनाक मंजर मीडिया में आने लगा, तो टीन के शेड से उसे ढकने की कवायद शुरू हो गई थी. कोरोना से निपटने के योगी सरकार के प्रबंधन पर विपक्ष ही नहीं, खुद भाजपा के सांसद और विधायकों ने भी सवाल उठाने शुरू कर दिए थे. कई सांसदों और विधायकों ने तो सरकार को खुला खत तक लिख दिया था. अस्पतालों की व्यवस्था पर यूपी सरकार के कानून मंत्री ब्रजेश पाठक तक आहत हो चुके थे.

कोरोना के पहले वेब में कुशल प्रबंधन से देश ही नहीं, विदेशों में भी वाहवाही बटोरने वाली यूपी सरकार के प्रबंधन की हालत दूसरे वेब में देखने को मिली, जब किसी अस्पताल में 8 घंटे का ऑक्सीजन बचा था, तो किसी में 2 घंटे का. कोई बेटा अपने बीमार पिता को गाड़ी में लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल बेड के लिए भटक रहा था, तो कोई वेंटिलेटर के बिना दम तोड़ रहा था. इसी वाराणसी के घाटों पर दर्जनों चिताओं को जलाने वाले अप्रैल और मई महीने में लगी लाशों की कतार देख अचंभीत थे. सबसे खौफनाक स्थिति तो गंगा में देखने को मिली थी, जब प्रयाग से लेकर गाजीपर तक उतराती सैंकड़ों लाशें यूपी सरकार की व्यवस्था बयां कर रही थीं.

बरेली के सांसद और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने व्यवस्था पर सवाल उठाए थे. प्रदेश की इस चरमराई व्यवस्था की पोल खुद सत्तासीन पार्टी के नेता ही करते दिखे. बरेली के सांसद व तत्कालीन केंद्रीय मंत्री संतोष गंगावार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी तक लिखनी पड़ी. उन्होंने अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए चिट्ठी में लिखा ” बरेली के चिकित्सा विभाग के अधिकारी फोन नहीं उठा रहे हैं. ऐसे मामले सामने आ रहे हैं कि रेफर किए जाने के बाद भी मरीज जब सरकारी अस्पताल में जा रहा है तो उससे दोबारा जिला अस्पताल से रेफर कराकर आने को कहा जा रहा है. इससे कई मरीजों की हालत और बिगड़ जा रही है. उन्होंने इसे लेकर चिंता जताई है और कहा है कि संक्रमित मरीज को कम से कम समय में रेफरल अस्पतालों में भर्ती किया जाय.

यूपी सरकार में कानून मंत्री बृजेश पाठक ने स्वास्थ्य व्यवस्था को चिंताजनक बताया था. ब्रजेश पाठक ने अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) और प्रमुख सचिव (चिकित्सा शिक्षा) को चिट्ठी लिखकर कहा था कि स्वास्थ्य सेवाओं की हालात काफी चिंताजनक है. ब्रजेश पाठक ने समस्याएं गिनाते हुए पत्र में लिखा था कि लखनऊ के अस्पतालों में बेड नहीं है, ऐंबुलेंस समय पर नहीं मिल रही है और न ही मरीज को इलाज मिल पा रहा है. उन्होंने लखनऊ में कोविड बेड बढ़ाने, पर्याप्त जांच किट और प्राइवेट लैब में कोविड जांच शुरू कराने की भी बात कही.

उत्तर प्रदेश में श्रम विभाग के चेयरमैन सुनील भराला, बीजेपी के व्यापार प्रकोष्ठ के नेता विनीत अग्रवाल शारदा, महानगर अध्यक्ष मुकेश सिंघल ने जहां मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर स्वास्थ्य सेवाओं पर चिंता जतायी थी. इन सभी नेताओं ने मेरठ में अस्पतालों के भीतर बेड न होने, ऑक्सीजन की लगातार कमी होने और जरूरी दवाओं की कमी का मुद्दा उठाते हुए इसे पूरा करने की मांग की थी. बरेली के नवाबगंज से बीजेपी विधायक केसर सिंह गंगवार ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को पत्र लिखकर खुद के लिए दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल में एक बेड उपलब्ध कराने की मांग की थी, जो उन्हें नहीं मिल सका और उनका निधन हो गया.

भदोही जिले के भारतीय जनता पार्टी के विधायक व पूर्व मंत्री दीनानाथ भास्कर ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि उनके जिले के भाजपा महामंत्री लाल बहादुर मौर्य की इलाज के अभाव में मृत्यु हो गई है. मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा था कि स्वर्गीय लाल बहादुर मौर्य के बच्चों ने उन्हें बताया कि अस्पताल में आईसीयू बेड और रेमेडेसीवीर इंजेक्शन लगाए जाने की मांग की जा रही थी, लेकिन उन्हें ना तो ऑक्सीजन दी गई और न ही इंजेक्शन. विधायक ने इसकी जांच कराने की मांग की थी.

योगी सरकार के श्रम कल्याण परिषद के अध्यक्ष/राज्यमंत्री सुनील भराला ने गत 26 अप्रैल को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा था कि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से मेरठ की ह्रदय विदारक व भयावह स्थिति की ओर आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं. मेरठ में प्रतिदिन लगभग 1500 लोग कोरोना संक्रमण का शिकार हो रहे हैं, जबकि यहां के अस्पतालों में दैनिक रूप से डिस्चार्ज होने वाले मरीजों की संख्या दैनिक संक्रमित व्यक्तियों के 50 प्रतिशत से भी कम है. परिणाम स्वरूप मेरठ में 1100 से अधिक सक्रिय मरीज मौजूद हैं. इतने अधिक संख्या में सक्रिय मरीजों के लिए मेरठ के सरकारी निजी अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन व रेमेडीसीवर जैसे आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं की बहुत बड़ी कमी महसूस हो रही है. इसके कारण अब तक लगभग 500 मरीजों की मृत्यु हो चुकी है.

कोरोना वायरस की दूसरी लहर में प्रदेश की चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्ता पर सत्तापक्ष ही नहीं बल्कि विपक्ष ने भी योगी सरकार पर खूब जुबानी हमले किए. कांग्रेस महासचिव व यूपी की प्रभारी प्रियंका गांधी ने कोरोना से मचे हाहाकार पर सीएम योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखकर प्रदेश में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों की लगातार जा रही जान को लेकर व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए कहा. प्रियंका गांधी ने प्रदेश सरकार पर हमला करते हुए कहा कि इस लड़ाई में उत्तर प्रदेश की जनता को अकेला मत छोड़िए मुख्यमंत्री जी, जनता के प्रति आपकी जिम्मेदारी भी है और जवाबदेही भी. साथ ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी लगातार योगी सरकार पर हमलावर दिखे. सूबे में ऑक्सीजन से लेकर बेड तक की कमी को लेकर योगी सरकार को कठघरे में खड़ा करते दिखाई दिए.

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