क्या से क्या हो गया! मशहूर टीवी एंकर फुटपाथ पर स्ट्रीट फूड बेचने को मजबूर

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हमारे जीवन में अक्सर ऐसी घटनाएं होती हैं जो हमारे पूरे जीवन को बदल देती हैं।दुनिया में ऐसे कई उदाहरण हैं। उदाहरण के लिए, श्रीलंका में, जो एक शांतिपूर्ण देश है, मुद्रास्फीति संकट के बिंदु तक बढ़ गई है, हिंसा भड़क उठी है और राष्ट्रपति को बदलना पड़ा है। अफगानिस्तान का ही मामला लें । तालिबान के अफगानिस्तान पर अधिकार करने के बाद से कई लोगों के जीवन में नाटकीय रूप से बदलाव आया है। राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक आम आदमी का जीवन पहले जैसा नहीं रहा।

अफगानिस्तान के लोगों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। एक तरफ तालिबान सरकार का डर और दूसरी तरफ रोसारियो की चिंता। आपको जानकर हैरानी होगी कि कई बड़े मीडिया चैनलों के लिए एंकर और रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके पत्रकार मूसा मोहम्मदी अब खाना बेचते हैं. हाल ही में हामिद करजई सरकार के साथ काम करने वाले कबीर हकमल ने मूसा मोहम्मदी की एक तस्वीर ट्वीट की। कबीर हकमल ने लिखा, “मूसा ने कई सालों तक अफगानिस्तान में मीडिया में काम किया है, लेकिन आज उनकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब है।” वे अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए स्ट्रीट फूड बेच रहे हैं।

मूसा मोहम्मदी की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल

कबीर हकमल ने 15 जून को अपने ट्विटर हैंडल से मूसा मोहम्मदी की हालत के बारे में जानकारी साझा की, जिसके बाद कई लोगों ने उन्हें रीट्वीट और कमेंट किया। कुछ लोगों ने इसे एक्टिंग बताया है तो कुछ लोगों ने इसे नौकरी देने की बात कही है. वरिष्ठ पत्रकार नीलोफर अयूबिक ने भी मूसा की एक तस्वीर पोस्ट की और उनके जीवन पर दुख इस तरह व्यक्त किया।

इस आदमी ने नौकरी का वादा किया था

मूसा मोहम्मदी की वायरल कहानी ने रेडियो-टेलीविजन के महानिदेशक अहमदुल्ला वासिक का भी ध्यान खींचा है। उन्होंने मूसा को नौकरी देने का वादा किया। अहमदुल्ला वासिक ने कहा, “हमें बहुत सारे अफगान पेशेवरों की जरूरत है और वे मूसा को अपने विभाग में नौकरी देंगे।” लोग उनके इस वादे की तारीफ भी कर रहे हैं.

1996 से 2001 तक अपने शासन के दौरान अफगानिस्तान में मानवाधिकारों के हनन के लिए जाने जाने वाले तालिबान ने दूसरी बार सत्ता में आने के बाद इस बार कड़ा रुख नहीं अपनाने की कसम खाई है। हालांकि इसके बाद भी रूढि़वादी सोच वाले तालिबान की ओर से ऐसे फरमान जारी किए जा रहे हैं, जो अफगान नागरिकों को सबसे खराब जिंदगी जीने को मजबूर कर रहे हैं। वे नारकीय जीवन जी रहे हैं।