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ट्रैक्टर का गजब दीवाना.. दिल्ली से 52 घंटे चलाकर पहुंचा एमपी, लेकिन कांड ऐसे खुल गया

नई दिल्ली: चोरी, ठगी, झूठ और फरेब की दुनिया के नटवरलाल की कहानी तो आप सबने सुनी होगी, लेकिन क्या आपने किसी ऐसे चोर की कहानी सुनी है जिसकी दीवानगी ने उसे चोर बना दिया हो. अगर नहीं तो देश की राजधानी दिल्ली से 3 जून को चोरी हुए ट्रैक्टर की पूरी कहानी समझिए.

दरअसल मध्य प्रदेश के चित्रकूट का रहने वाला एक किशोर ट्रैक्टर को लेकर इतना दीवाना था कि वो इसके लिए देश की राजधानी दिल्ली पहुंच गया. जहां की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में उसके पिता कुछ समय पहले तक सिक्योरिटी का काम करते थे. वहीं खड़े एक ट्रैक्टर को देखकर उसके मन में चोरी का ख्याल आया, जिसके लिए वो बकायदा अपने घर से तैयारी के साथ पहुंचा. घरवालों को उसने बताया कि दिल्ली में ट्रैक्टर की नीलामी है, जहां वो जा रहा है. इसके लिए उसने घरवालों से कुछ रुपये भी लिए.

लेकिन उसके घरवालों को कहां पता था कि जिस ट्रैक्टर की नीलामी की बात वो कर रहा है, ऐसी कोई नीलामी तो है ही नहीं. उसके दिमाग में तो जेएनयू में खड़े ट्रैक्टर की चोरी का ख्याल चल रहा था. जैसे ही वो जेएनयू परिसर में पहुंचा, उसे किसी ने नहीं रोका, या किसी ने नहीं देखा ये बात अभी सवालों के घेरे में है. लेकिन वहां घुसते ही उसने ट्रैक्टर चोरी की और रफूचक्कर हो गया. 52 घंटे लगातार ट्रैक्टर चलाकर उसने 700 किलोमीटर की दूरी तय की.

चूंकि घरवालों से उसने नीलामी के नाम पर कुछ रुपये लिए थे. इसलिए पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के इस दौर में भी उसे ट्रैक्टर में डालने के लिए ईंधन का इंतजाम करने में मुश्किलें नहीं आईं. लेकिन असली मुश्किलें तब शुरू हुई जब दिल्ली पुलिस के जेएनयू से ट्रैक्टर चोरी होने की शिकायत मिली. सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए तो पता चला कि एक नाबालिग ट्रैक्टर को लेकर आराम से जा रहा है. जिसके बाद जांच में ये भी जानकारी सामने आई कि वो मध्य प्रदेश के चित्रकूट का रहने वाला है.

उधर ट्रैक्टर को लेकर वो नाबालिग चित्रकूट पहुंच चुका था. जहां वो ट्रैक्टर की देखभाल में जुटा था. इधर दिल्ली पुलिस की टीम जब दबिश देने चित्रकूट पहुंची तो देखा कि चोरी करने वाला नाबालिग और ट्रैक्टर दोनों वहीं है. जिसके बाद पुलिस ने उसे पकड़ लिया. पूछताछ की तो पता चला कि मुनिरका में अपने मामा के घर रहकर वह पढ़ाई करता था.

उसके पिता कुछ समय पहले तक जेएनयू में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते थे, इसलिए वो जेएनयू परिसर से अच्छी तरह परिचित था. उसके गांव में कई लोगों के घर ट्रैक्टर है, इसलिए वो भी ट्रैक्टर रखना चाहता था लेकिन घर की माली हालत खराब होने की वजह से वह ऐसा नहीं कर सका तो उसने चोरी करने की सोची.

लेकिन जिस यूनिवर्सिटी में दाखिल होने के लिए भी सिक्योरिटी से इजाजत लेनी पड़ती है, देश की उस प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी से ट्रैक्टर चोरी हो गई और सिक्योरिटी गार्ड सोते रहे. ये उस यूनिवर्सिटी पर सवालिया निशान खड़े करती है. हालांकि इस मामले पर एडिशनल डीसीपी अमित गोयल की अलग ही दलील है. उनका कहना है कि बच्चे की वजह से किसी ने शक नहीं किया और वहां सिक्योरिटी गार्ड भी उसके परिचित रहे होंगे.

लेकिन बड़ा सवाल ये है कि चप्पे-चप्पे पर सिक्योरिटी गार्ड की निगरानी में रहने वाला जेएनयू कैंपस से ट्रैक्टर चोरी होने का जिम्मेदार कौन है?

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