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घटिया माल से इमेज हुई खराब तो करोड़ों नकली मास्क सीज किया चीन, क्या ये काफी है?

घटिया मास्क और खराब गुणवत्ता वाले पीपीई किट को लेकर दुनियाभर में अपनी बेज्जती करा चुका चीन अब अपनी इमेज सुधारने की कोशिश कर रहा है। शी जिनपिंग सरकार ने अब 1.6 करोड़ दुकानों में मास्क की गुणवत्ता जांची है। इस दौरान करीब 9 करोड़ नकली मास्क पकड़े गए हैं। उल्लेखनीय है कि जब दुनिया पर कोरोना का संकट गहराया तो कनाडा, स्पेन, पाकिस्तान और भारत सहित कई देशों ने चीन से सुरक्षा उपकरण खऱीदे लेकिन हर जगह से खामी को लेकर शिकायतें आई हैं। कई देश चीन को यह सेफ्टी किट लौटा भी चुके हैं।

1 करोड़ से ज्यादा दुकानों की जांच
उधर, स्टेट मार्केट रेग्युलेटरी ऐडमिनिस्ट्रेशन की उपनिदेशक गान लीन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि नियामक ने शुक्रवार को करीब 1.6 करोड़ दुकानों का निरीक्षण किया और 8.9 करोड़ मास्क और 4.18 लाख व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों (पीपीई) को जब्त किया। उन्होंने बताया कि नियामक ने 76 लाख युआन मूल्य के घटिया गुणवत्ता के कीटनाशक जब्त किए। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि जब्त किए गए सामान का कितना हिस्सा विदेश निर्यात किया गया है। घटिया गुणवत्ता के उत्पादों को हटाने के लिए चीन ने शनिवार को नए नियम जारी किए जिसके मुताबिक गैर मेडिकल कार्य में इस्तेमाल मास्क भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होने चाहिए।

निर्यातकों के लिए बने सख्त नियम

वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, निर्यातकों को लिखित में देना होगा कि उनके उत्पाद जिस देश में भेजे जा रहे हैं उसके सुरक्षा मानकों को पूरा करते हैं। गौरतलब है कि चीन को सख्त नियम इसलिए बनाने पड़े क्योंकि स्पेन, नीदरलैंड, चेक गणराज्य और तुर्की सहित कई देशों को निर्यात उत्पाद की खराब गुणवत्ता होने की वजह से उसे उन्हें मास्क वापस मंगाना पड़ा। कनाडा सरकार ने पिछले हफ्ते कहा कि उसने चीन से 10 लाख मास्क मंगाए थे लेकिन वे गुणवत्ता के मामले में खरे नहीं उतरे।

डेनमार्क ने भी चीन से आयातित पांच लाख मास्क खराब गुणवत्ता की वजह से लौटा दिए थे। चीन के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक वह रोजाना 11.6 करोड़ मास्क का उत्पादन करता है। वह इस साल एक अरब से अधिक मास्क का निर्यात कर चुका है।

भारत में चीनी किट पर लगी रोक

इस संकट घड़ी में भी चीन ने कई देशों के साथ ठगी की है। पहले पीपीई किट और फिर रैपिड टेस्टिंग किट में खामी पाए जाने के बाद भारत ने उसके इस्तेमाल पर रोक लगा दी। भारत के शीर्ष मेडिकल संस्थानों में एक आईसीएमआर ने उन टेस्ट किट की जांच कर रही है और गुणवत्ता की पुष्टि होने के बाद ही उनका इस्तेमाल किया जाएगा। भारत की तरफ से शिकायत दर्ज कराने पर चीन ने उलटा नई दिल्ली पर ठीकरा फोड़ दिया और कहा कि खरीदने से पहले कंपनी की जांच कर लेनी चाहिए थी। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम इस मामले में भारत की मदद करेंगे लेकिन वे उन कंपनियों से ही माल खरीदें जिन्हें हमारी सरकार द्वारा प्रमाणित किया गया है।

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