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कोरोना ने किया अकेला: 72 घंटों में पिता-पुत्र की मौत, पंचायत चुनाव में संक्रमित हुआ था टीचर

मेरठ में कोरोना के कहर ने एक शिक्षक परिवार को ऐसा दर्द दिया है कि शायद ही यह परिवार इस गम को भूल पाए। 72 घंटे के भीतर पिता-पुत्र की मौत हो गई। अब परिवार में एक महिला बची है। वह सदमे में है। महिला की तीन साल पहले शादी हुई थी।

पंचायत चुनाव में ड्यूटी के वक्त संक्रमित हुए थे मयंक

मेरठ के ब्रह्मपुरी निवासी मयंक रस्तोगी (42 साल) नगर क्षेत्र के खडोली विद्यालय में सहायक अध्यापक थे। उनका परिवार इस समय मेरठ के कंकरखेड़ा स्थित सैनिक विहार कॉलोनी में रह रहा है। 25 व 26 अप्रैल को शिक्षक मयंक रस्तोगी की ड्यूटी पंचायत चुनाव में लगाई गई थी। पंचायत चुनाव खत्म होने के बाद उनकी ड्यूटी कोतवाली स्थित स्वास्थ्य केंद्र पर लगा दी गई। 20 मई को मयंक रस्तोगी कोरोना पॉजिटिव आए। उसके बाद उनकी पत्नी डॉ. पूजा भी कोरोना संक्रमण की चपेट में आई। मयंक खुद कोरोना से जूझ रहे थे, उधर पत्नी और पिता राकेश रस्तोगी की रिपोर्ट भी कोरोना पॉजिटिव आई।

पिता की जिंदगी बचाने के लिए शिक्षक ने पिता राकेश रस्तोगी को को कोविड अस्पताल में भर्ती कराया। जहां राकेश रस्तोगी की 1 जून को कोरोना से मौत हो गई। पिता की मौत से यह परिवार उबर भी नहीं पाया था की गुरुवार देर रात सुभारती स्थित कोविड सेंटर में शिक्षक मयंक रस्तोगी भी जिंदगी से हार गए।

3 साल पहले ही हुई थी शादी
शिक्षक मयंक रस्तोगी कि 3 साल पहले ही डॉक्टर पूजा से शादी हुई थी। उनके कोई बच्चा भी नहीं है। मयंक रस्तोगी की मां की पूर्व में मृत्यु हो चुकी है। मां की जगह ही उन्हें बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक की नौकरी मिली। परिवार में मयंक, उनके पिता और पत्नी ही थे। लेकिन अब मयंक और उनके पिता की पिछले 72 घंटे में मौत हो चुकी है। ऐसे में परिवार में अब सिर्फ शिक्षक की पत्नी डॉ. पूजा ही बची हैं।

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