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जनधन से लेकर उज्वला योजना तक- मोदी 1.0 की योजनाएं न होती तो आज लॉकडाउन में तबाही आ जाती

वुहान वायरस से संक्रमण को एक विकराल रूप धारण करने से पहले ही उस रोकने के लिए जब प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रव्यापी लॉक डाउन का निर्णय लिया, तो सबसे बड़ी चुनौती थी आर्थिक व्यवस्था को संभालना, और दिल्ली में उपजी माइग्रेंट संकट इसी का एक प्रत्यक्ष उदाहरण था। तुरंत ही प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने लगभग पौने दो लाख करोड़ रुपए के एक विशाल पैकेज का ऐलान किया, जिसमें प्रत्यक्ष रूप से गरीब वर्ग एवं किसानों के लिए विशेष प्रावधान किए गए थे। इसके अलावा सरकार ने हर घर को सस्ते दर पर भोजन प्रदान करना और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए सुनियोजित स्वास्थ्य बीमा प्रदान करने की घोषणा भी की। कुल मिलाकर राष्ट्रव्यापी लॉक डाउन काफी हद तक सफल रहा है, जिसके पीछे मोदी सरकार का प्रथम कार्यकाल एक प्रमुख कारण है।

जब मोदी सरकार 2014 में सत्ता में आई थी, तो लोगों तक प्रत्यक्ष रूप से सभी सुविधाएं पहुंचाने हेतु उन्होंने बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में व्यापक बदलाव हेतु ‘पीएम जनधन योजना’ का शुभारंभ किया। कल तक जो बैंक गरीबों की पहुंच से काफी दूर था, वह बैंक अब सभी के लिए खुल चुके थे। वित्तीय समावेश हेतु प्रारंभ किए गए इस योजना में 38 करोड़ से ज़्यादा लाभार्थी जुड़ गए।

परन्तु बात यहीं पर नहीं रुकी। इस योजना ने ये भी सुनिश्चित किया कि मजदूरों व गरीबों की मेहनत का सारा पैसा सीधे उनके खाते में पहुंचे। राजीव गांधी का 15 पैसे वाला जो कथन वर्षों तक भारत में भ्रष्टाचार की पहचान बन चुका था, उसे समाप्त करने के लिए पीएम मोदी ने एक निर्णायक कदम इस वर्ष (2014) उठाया।

इसके अलावा जब सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड के आधार पर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर योजनाओं को लागू करने की हरी झंडी दी, तो उससे जमाखोरी के साथ साथ महंगाई पर भी करारा प्रहार किया। जो महंगाई थोक भाव पर 10 प्रतिशत से नीचे नहीं जाती थी, वह जल्द ही सिंगल डिजिट तक सिमट गई।

डीबीटी और आधार प्रणाली के कारण एक विशाल और भरोसेमंद डेटा बैंक तैयार हुआ है, जिससे सरकार बिना किसी समस्या के पैसे सीधे जरूरतमंदों को पहुंचा सकती है। ये निश्चित रूप से उन लोगों के लिए काफी फायदेमंद है, जो रोजाना काम के लिए निकलते थे, और जिन्हें इस राष्ट्रव्यापी लॉक डाउन के कारण प्रत्यक्ष रूप से सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ है।

उत्तर प्रदेश में ही योगी सरकार ने दिहाड़ी मजदूरों के भले के लिए 353 करोड़ के पैकेज का ऐलान कर दिया, जिससे 35 लाख से भी ज़्यादा ऐसे लोगों को इस योजना का भरपूर फायदा मिला है। कल्पना कीजिए कि यदि ये सब योजनएं सफलतापूर्वक लागू नहीं होती, तो?

इसी डीबीटी स्कीम के कारण उज्ज्वला योजना भी काफी हद तक सफल रही है। गरीब परिवारों को खाना पकाने के लिए गैस ईंधन उपलब्ध कराने हेतु प्रारंभ इस स्कीम में 2019 तक ही लक्ष्य से कहीं ज़्यादा, 8 करोड़ से भी ज़्यादा गैस सिलिंडर वितरित किए गए।

शायद यही कारण है कि पीएम मोदी के एक आह्वान पर लगभग पूरा देश लॉक डाउन स्वीकारने के लिए तैयार हो गया। ये पीएम मोदी के सफल सुशासन का हो परिणाम हैं कि अन्य देशों के मुकाबले भारत में लॉक डाउन सफल रहा है।

अब विरोधी चाहे जो कहें, वे इस बात को नहीं झुठला सकते कि यदि किसी व्यक्ति ने पूरे देश को लॉक डाउन में रहने के लिए प्रेरित किया है, तो वे नरेंद्र मोदी ही रहे हैं। कल्पना कीजिए यदि उनकी पार्टी की जगह कांग्रेस सत्ता में होती, तो ना जाने भारत का हाल क्या होता?

नरेंद्र मोदी की परिपक्वता और दूरदर्शिता के कारण ही जनता कर्फ्यू से लेकर राष्ट्रव्यापी लाकडाउन तक काफी हद तक सफल रहा है, और इसीलिए यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि मोदी 1.0 के कारण ही मोदी 2.0 देश को संभाले हुए है। आशा करते हैं कि इन्हीं के नेतृत्व में भारत जल्द ही इस महामारी के प्रकोप से बाहर निकले।

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