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सबसे बड़ी तबाही लाएगी कोरोना की तीसरी लहर, जानें बड़ा कारण

पटना. कोरोना की लड़ाई में बिहार तैयार नहीं है। वायरस की तीसरी लहर आई तो तबाही तय है। अब तक महज 12.27% लोगों को कोरोना का टीका लगा है, बाकी 87.73% आबादी खतरे की जद में है। सरकार के दावे हवा-हवाई हैं, क्योंकि वैक्सीन की कमी है। दावा देश में एक दिन में सबसे अधिक वैक्सीनेशन का भी किया गया लेकिन अक्सर वैक्सीन की कमी का दंश लोगों को झेलना पड़ रहा है। मीडिया ने बिहार में वैक्सीनेशन की पूरी पड़ताल की तो चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। राज्य में टीकाकरण की रफ्तार ऐसे ही रही तो कोरोना की तीसरी लहर का जो अनुमान लगाया जा रहा है, उस वक्त तक 20% आबादी वैक्सीनेट नहीं हो पाएगी।

बिहार में 1.57 करोड़ को लगा टीका

बिहार में 28 जून तक 1,57,71,555 लोगों ने कोरोना की वैक्सीन ली है। इसमें पुरुषों की संख्या 86,77,701 और महिलाओं की संख्या 70,90,998 है। बिहार की अनुमानित आबादी 12,85,00,364 है। ऐसे में बिहार की मात्र 12.27% आबादी ही कोरोना से लड़ाई के लिए तैयार है। राज्य में पुरुषों की अनुमानित आबादी 6,69,97,061 और महिलाओं की 6,15,03,302 है। ऐसे में 12.95% पुरुष और महिलाएं 11.53% वैक्सीनेटेड हैं। जितने वैक्सीनेटेड हुए हैं, उससे कहीं बड़ी आबादी अभी खतरे की जद में है।

बिहार में वैक्सीनेशन

  • कुल वैक्सीनेशन – 15771555
  • पहला डोज – 13583425
  • दूसरा डोज – 2188130
  • टीका लेने वाले पुरुष – 8677701
  • टीका लेने वाली महिलाएं – 7090998
  • 60 वर्ष से ऊपर के टीका लेने वाले – 4650303
  • 18+ के टीका लेने वाले – 6451923
  • 45+ के टीका लेने वाले – 4669329
  • कोवीशील्ड लेने वाले – 14003523
  • कोवैक्सिन लेने वाले – 1767734

बिहार में कोरोना के टीके का टोटा

पड़ताल में यह बात साफ हो गई है कि दूसरी लहर के बाद लोगों में वैक्सीनेशन को लेकर जागरुकता आई है। अब लोग वैक्सीन लगवाना चाहते हैं लेकिन वैक्सीन का टाेटा आंकड़ों की रफ्तार रोक रहा है। आए दिन वैक्सीन का स्टाक ड्राई हाे जाता है, जिससे वैक्सीनेशन का काम बंद हो जाता है। 3 दिनों से बिहार में वैक्सीनेशन की रफ्तार काफी सुस्त पड़ी है और इसका बड़ा कारण स्टाक नहीं होना है। सोमवार को पटना में सेंटर से लोग वापस लौट कर गए क्योंकि वैक्सीन ही नहीं थी।

18+ के वैक्सीनेशन में बड़ी बाधा

18 से 44 वर्ष के लोगों को वैक्सीनेशन के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी है। बिहार में 18+ के शुभारंभ के बाद से ही समस्या हुई और इसमें सबसे बड़ी बाधा केंद्र और राज्य के बीच वैक्सीन की खरीद की थी। 45 से अधिक उम्र वालों के लिए केंद्र सरकार राज्यों को वैक्सीन देती थी और 18 से 44 वर्ष वालों के लिए वैक्सीन राज्य सरकार को खरीदना था। इस कारण काफी समय तक बाधा आई लेकिन बाद में केंद्र ने 18+ की वैक्सीन भी मुफ्त कर दी। इसके बाद वैक्सीनेशन की रफ्तार तेज हुई। इसके बाद भी सरकार वैक्सीन उपलब्ध नहीं करा पा रही है, जिससे सेंटर को बंद करना पड़ रहा है।

IMA ने बताया वैक्सीनेशन का प्लान

बिहार में IMA ने वैक्सीनेशन का बड़ा प्लान तैयार किया है। सरकार से मांग की है कि निजी हॉस्पिटल को जब तक इस अभियान में शामिल नहीं किया जाएगा तब तक रफ्तार तेज नहीं होगी। IMA बिहार ने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को इस संबंध में पत्र भी लिखा है और कहा कि निजी अस्पतालों को वैक्सीनेशन के अभियान में शामिल कर तेजी से टारगेट पूरा करना चाहिए।

कोरोना की लड़ाई में वैक्सीन ही हथियार

बिहार IMA के सेक्रेटरी डॉ सुनील कुमार का कहना है कि कोरोना की लड़ाई में वैक्सीन ही हथियार है और इस हथियार के सहारे ही जंग लड़ी जा सकती है। लेकिन राज्य में वैक्सीनेशन की रफ्तार काफी सुस्त है। बिहार में यह हथियार मात्र 12.27% आबादी के पास ही है। बाकी आबादी कोरोना की लड़ाई में पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है। यह तब तक तेज नहीं होगी जब तक इस काम में निजी अस्पतालों को नहीं शामिल किया जाता है।

सरकार का यह है दावा

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय का दावा है कि वैक्सीनेशन का काम सुचारु रूप से चल रहा है। मंत्री का कहना है कि टीका निर्माण का कार्य जिस तेजी से चल रहा है उस तेजी से वैक्सीनेशन भी किया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री के दावे के इतर राज्य में टीका की रफ्तार पूरी तरह से सुस्त पड़ी है। दावा तो एक दिन में सबसे अधिक वैक्सीनेशन का होता है, लेकिन राज्य में इसके आगे-पीछे वाले दिनों में रफ्तार सुस्त पड़ जाती है। मीडिया ने वैक्सीनेशन के आंकड़ों में गड़बड़ी को लेकर जब खुलासा किया तो 22 जून के बाद से सरकार की तरफ से डेटा भी नहीं जारी किया जा रहा है।

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