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जिसके खौफ से कई गांवों में बंद हो गईं शादियां, अब उसे नरेगा में भी काम नहीं मिल रहा

जयपुर : ढाई दशक तक बीहड़ाें में आतंक का पर्याय बना रहा जगन गुर्जर सरेंडर के बाद अब जेल से बाहर है। मुकदमों में कमियां और गवाही न होने से 85 मामलों में बरी हो चुका है। छह मामलों में जमानत पर है। अब वह खुद की और परिवार की हिफाजत काे लेकर दर-दर की ठाेकरें खा रहा है। हाल ही में वह जयपुर पहुंचा और सीएम अशाेक गहलाेत और डीजीपी के नाम पर एक पत्र दिया।

मीडिया से बातचीत में उसने कहा कि सरेंडर से पहले तक नेता, पुलिस अफसर, सरकारी मशीनरी या एनजीओ के लाेग आपके पक्ष में खड़े रहते हैं। सरेंडर के बाद सब पलट जाते हैं। मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ है। जेल से छूटने के बाद लगातार मुझे जान से मारने व बंदूक लेकर मुकाबला करने के लिए चुनाैतियां मिल रही हैं। फाेन व साेशल मीडिया के जरिए ऐसे हाेने के सबूत भी पुलिस में पेश किए। पुलिस ने सुनवाई नहीं की।

उधर, रिश्तेदाराें ने भी संपत्तियाें पर कब्जे की नीयत से मारपीट करते हुए मेरा सिर फाेड़ दिया। मैं चाहता ताे हिंसा का जवाब हिंसा से दे सकता था, पर नहीं दिया। पुलिस ने उल्टा मेरे पर केस दर्ज कर लिया। थाने में जाने पर पुलिस कहती है कि तेरी ताे तीन राज्याें में दहशत थी, तुझे काैन मार सकता है। मेरा बेटा 10वीं कक्षा में पढ़ता है। झूठे मामलाें में 14-15 साल के बच्चे काे फंसाएंगे ताे वह भी बागी हाेकर बंदूक उठाएगा, जाे हम नहीं देखना चाहते। जगन ने कहा कि परिवार के लालन-पालन के लिए किसी ने नरेगा तक में काम नहीं दिया। मैं भी चाहता हूं कि मेरेे बच्चे अच्छे आदमी बनें। लेकिन समाज और सिस्टम काे ये मंजूर नहीं। खुद का घर व खेती बाड़ी छाेड़कर पलायन को मजबूर हूं।

वसुंधरा का महल उड़ाने की धमकी देकर चर्चा में आया…
पूर्व दस्यु जगन गुर्जर करीब 27 साल पहले 1994 में अपराध की दुनिया में आया। अपने जीजा के हत्यारों की हत्या की और बीहड़ों में जाकर गिरोह बना लिया। चौतरफा बीहड़ों से घिरे धौलपुर के डांग क्षेत्र में इसका ठिकाना था। उस वक्त इसका ऐसा खौफ था कि डकैती के डर से कई गांवों में शादियां तक होनी बंद हो गई थीं। उसके खुद के गांव में 10 साल तक कोई शादी नहीं हुई। उसकी दहशत से न सिर्फ गांववाले बल्कि उसके पिता भी गांव छोड़कर चले गए।

जगन पर मुखबिरी के शक में महिलाओं से मारपीट और दुर्व्यवहार करने के भी आरोप लगे थे। उसी दौरान उस पर एक पुलिसकर्मी की हत्या का भी आरोप लगा। हत्या, डकैती और बदमाशी के उस पर 91 मुकदमे दर्ज हो गए थे। वर्ष 2008 में आरक्षण आंदाेलन के दाैरान पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का धाैलपुर महल उड़ाने की धमकी देकर देशभर में चर्चा में आया। तब पुलिस ने उस पर 11 लाख रुपए का इनाम रखा था और वह चंबल का सबसे बड़ा दस्यु बन गया था।

2009 में सचिन पायलट के सामने आत्मसमर्पण किया। इसके बाद अपनी पत्नी काे उपचुनाव लड़ाया और वह बुरी तरह हार गई। इसके बाद फिर हथियार उठा लिए। 2019 में महिलाओं संग बदसलूकी का आराेप लगने पर उसके एनकाउंटर की मांग उठी थी। जगन ऐसा इकलौता दस्यु था, जिसके एनकाउंटर की मांग संसद में उठी थी। 2019 में चौथी बार सरेंडर करने से पहले जगन 3 बार सरेंडर करके जेल जा चुका था और हर बार जमानत पर बाहर आकर और ज्यादा उत्पात मचाया।

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