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तबलीगी जमात ने जैसे महामारी को फैलाया, वैसे ही देश के नौकरशाहों ने भी खूब कोरोना फैलाया

दुनियाभर में कोरोना से लड़ने के लिए पुलिस और स्वास्थ्यकर्मियों के रूप में हमारे बीच मौजूद कोरोनावोरियर्स यानि कोरोना योद्धाओं की खूब तारीफ हो रही है। पुलिस जहां लोगों को घरों में रहने के लिए जद्दोजहद करती दिखाई देती है, तो वहीं डॉक्टर्स इस बीमारी से बीमार पड़े रोगियों को ठीक करने और इस बीमारी का इलाज ढूँढने के लिए दिन रात एक कर रहे हैं। लेकिन इन सब की इतनी मेहनत को मिट्टी में मिलाने के लिए भी कुछ लोग दिन रात नियमों और क़ानूनों की धज्जियां उड़ाते देखे जा सकते हैं। पहले हमने देखा कि कैसे तबलीगी जमात ने देश की कोरोना के खिलाफ लड़ाई को कमजोर किया, अब देखने में आ रहा है कि देश के कुछ टॉप ब्यूरोक्रेट भी बेहद गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार दिखाकर कोरोना को बढ़ाने में लगे हैं।

उदाहरण के लिए पश्चिम बंगाल सरकार प्रशासन में कार्यरत एक टॉप ब्यूरोक्रेट का 18 वर्षीय बेटा कुछ दिनों पहले UK से आया था, जहां वह पढ़ाई कर रहा है। वह दिल्ली में लैंड हुआ, उसके बाद उसने कोलकाता के लिए एक और फ्लाइट ली, और फिर वह कोलकाता पहुंचा। नियमों के मुताबिक उसे दिल्ली या फिर कोलकाता आकर अस्पताल में जाकर अपनी जांच करानी चाहिए थी और उसे एयरपोर्ट प्रशासन द्वारा भी इसी बात की सलाह दी गयी थी।

हालांकि, अपने ब्यूरोक्रेट पेरेंट्स की धाक पर उसने किसी भी कानून को मानने से मना कर दिया, और ऐसे ही शहर में घूमता रहा। यहाँ तक कि उसकी ब्यूरोक्रेट माता ने भी अपने आप को सरकारी काम काज से अलग नहीं किया और वह सभी सरकारी मीटिंग्स में जाती रही। बाद में लक्षण दिखने के बाद जब उस बाबू के बेटे की जांच की गई तो उसे कोरोना से ग्रसित पाया गया।

सरकारी बाबुओं का ऐसा ही बर्ताव हमें मध्य प्रदेश में भी देखने को मिल रहा है, जहां स्वास्थ्य विभाग की एक उच्च अधिकारी डॉ रूबी खान ने कोरोना पॉज़िटिव होने के बावजूद अपने आप को अस्पताल में भर्ती नहीं कराया, और उच्च अधिकारियों के लिए बनी ट्रेनिंग अकेडमी, भोपाल के हॉस्टल में ही शरण लेकर रही। बाद में प्रशासन द्वारा कड़ी मशक्कत के बाद इस ब्यूरोक्रेट को अस्पताल में भर्ती कराया गया। मध्य प्रदेश की ही एक और अफसर पल्लवी जैन ने भी पश्चिम बंगाल के अफसर की तरह अपने बेटे की ट्रैवल हिस्टरी कों सबसे छिपाया। उसका बेटा कुछ दिनों पहले US से लौटा था, लेकिन उसने आप कों क्वारंटाइन नहीं किया।

बाद में जब टेस्टिंग हुई तो उसे कोरोना पॉज़िटिव पाया गया। इतना ही नहीं, बाद में जब पल्लवी जैन में भी कोरोना के लक्षण दिखे और उन्हें कोरोना-पॉज़िटिव पाया गया, तो भी उन्होंने अपने आप कों आइसोलेट नहीं किया और वे ऐसे ही मीटिंग्स का हिस्सा बनती रहीं। अब उनके संपर्क में आने वाले 11 अधिकारी और कर्मचारी भी कोरोना पॉज़िटिव पाये गए हैं। इससे पहले कोरोना से ग्रसित होने के बावजूद काम करने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनकी तारीफ की थी, लेकिन यह समझ से परे है कि शिवराज सिंह चौहान को एक नियम तोड़ते ब्यूरोक्रेट की तारीफ करने का सुझाव कहाँ से आया।

इसी तरह हमें पिछले दिनों केरल के एक IAS अफसर का गैर-जिम्मेदराना व्यवहार देखने कों मिला था। अनुपम मिश्रा नाम का वह IAS अफसर मलेशिया-सिंगापुर में हनीमून मनाकर हाल ही में लौटा था और उसे क्वारंटाइन में रहने के लिए बोला गया था, लेकिन उसने चोरी-छिपे क्वारंटाइन से भागकर UP आना ही बेहतर समझा, और प्रशासन को इसकी कोई खबर नहीं दी।

इन ब्यूरोक्रेट्स का यह व्यवहार दिखाता है कि इनकी लाल बत्ती बेशक इनसे छिन गयी हो, लेकिन इनके दिमाग में मौजूद लाल बत्ती अभी तक वहीं टिकी हुई है। देश के अधिकतर ब्यूरोक्रेट्स सच्चे मन से देश की सेवा में लगे हैं, इसमें कोई शक नहीं है, लेकिन कुछ मुट्ठी भर बाबू इन सबकी मेहनत पर पानी फेरने में लगे हैं। ऐसे बाबुओं के खिलाफ राज्य सरकारों और केंद्र सरकारों कों सख्त से सख्त एक्शन लेना चाहिए ताकि इन्हें इस बात का अहसास हो सके कि भारत के लोगों की जान खतरे में डालने का अंजाम कैसा होता है।

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