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तालिबान सरकार के कई मंत्री आतंकियों की सूची में, गृह मंत्री पर करोड़ों का ईनाम

पिछले महीने अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद तालिबान ने कार्यवाहक सरकार का ऐलान कर दिया है।मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद को मंत्रीपरिषद का प्रमुख यानी नई सरकार का कार्यवाहक प्रधानमंत्री और मुल्ला अब्दुल गनी बरादर को कार्यवाहक उप प्रधानमंत्री (प्रथम) बनाया गया है।इस सरकार में अखुंद समेत कई ऐसे चेहरे हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र ने आतंकी घोषित किया हुआ है। वहीं गृह मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी पर तो 70 करोड़ रुपये से अधिक का ईनाम घोषित है। 

सभी अंतरराष्ट्रीय कानूनों का करेंगे पालन- तालिबान

तालिबान के प्रमुख नेता हैबतुल्लाह अखुंदजादा ने अपने बयान में कहा कि तालिबान उन सभी अंतरराष्ट्रीय कानूनों, संधियों और प्रतिबद्धताओं का सम्मान करेगा, जिनका इस्लामिक कानून से टकराव नहीं होता।बयान में अफगान नागरिकों को विदेशी शासन से मुक्त होने की बधाई देते हुए कहा गया है कि अभी अफगानिस्तान में शासन और जीवन के सभी मामले शरिया कानून के तहत नियंत्रित किए जाएंगे।काबुल पर कब्जे के बाद अखुंदजादा की तरफ से आया यह पहला बयान है।

जानकारी

आतंकियों की सूची में शामिल है प्रधानमंत्री अखुंद

मुल्ला हसन अखुंद का नाम संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आंतकियों की सूची में है। अखुंद ने तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर के साथ नजदीकी से काम किया था और वो पिछले सरकार में पहले विदेश मंत्री और फिर उप प्रधानमंत्री रहे थे।काबुल के रहने वाले अखुंद पिछले लंबे समय से तालिबान की रहबरी शूरा या नेतृत्व परिषद का प्रमुख पद संभाल रहे हैं।करीब 60 साल की उम्र के अखुंद को धार्मिक से ज्यादा राजनीतिक आदमी माना जाता है।

तालिबान

गृह मंत्री पर करोड़ों का ईनाम

हक्कानी की तलाश कर रहा था अमेरिका

तालिबान ने हक्कानी नेटवर्क के सिराजुद्दीन हक्कानी को गृह मंत्री बनाया है। हक्कानी नेटवर्क को अमेरिका ने आतंकी संगठन घोषित किया है।आतंकी संगठन अलकायदा से संबंध और कई आत्मघाती हमलों के पीछे हाथ होने के कारण सिराजुद्दीन FBI की ‘मोस्ट वांटेड’ सूची में शामिल हैं और उन पर 10 मिलियन डॉलर (लगभग 73 करोड़ रुपये) का ईनाम घोषित है।संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध समिति का कहना है कि हक्कानी नेटवर्क ड्रग्स के उत्पादन और व्यापार में शामिल है।

तालिबानी सरकार

अब्दुल गनी बरादर बने कार्यवाहक उप प्रधानमंत्री

मुल्ला उमर के करीबी माने जाने वाले अब्दुल गनी बरादर को कार्यवाहक उप प्रधानमंत्री बनाया गया है। तालिबान की पिछली सरकार में वो उप रक्षा मंत्री थे। संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति का कहना है कि बरादर अफगाान में काम करने वाली अमेरिकी और उसकी सहयोगी सेनाओं पर हमले का जिम्मेदार है।2010 में बरादर को पाकिस्तान में गिरफ्तार किया गया था। 2018 में रिहाई के बाद से वो दोहा में तालिबान का राजनीतिक कार्यालय संभाल रहे थे।

तालिबानी सरकार

33 मंत्रियों में एक भी महिला नहीं

तालिबान ने मुल्ला अबदस सलाम को कार्यवाहक प्रधानमंत्री (द्वितीय) नियुक्त किया है। ड्रग ट्रैफिकिंग के कारण संयुक्त राष्ट्र ने उन्हें प्रतिबंधित सूची में शामिल किया है। अमेरिका के साथ सैनिक वापसी के समझौते में उन्होंने अहम भूमिक निभाई थी।उनके अलावा तालिबान ने मुल्ला याकूब को नया कार्यवाहक रक्षा मंत्री बनाया है। याकूब तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर के बेटे हैं।बता दें कि तालिबान ने 33 मंत्रियों का नाम घोषित किया है और इनमें एक भी महिला नहीं है।

अफगानिस्तान

मौलवी आमिर खान मुतक्की को बनाया विदेश मंत्री

मौलवी आमिर खान मुतक्की को विदेश मंत्री, अब्दुल बाकी हक्कानी को उच्च शिक्षा मंत्री, यूनुस अखुंदजादा को ग्रामीण विकास मंत्री, खलीलउर्रहमान हक्कानी को शरणार्थी मामलों का मंत्री, मुल्ला अब्दुल मनन ओमारी को जन कल्याण मंत्री और नजीबुल्ला हक्कानी को संचार मंत्री बनाया गया है।इसी तरह मुल्ला मोहम्मद अस्सा अखुंद को पेट्रोलियम मंत्री, मुल्ला अब्दुल लतीफ मंसौर को ऊर्जा मंत्री, हमीदुल्लाह अखुंदजादा को उड्डयन मंत्री, मुल्ला खैरुल्लाह खैरख्वाह को सूचना और संस्कृति मंत्री पद सौंपा गया है।

अमेरिका ने कई नामों पर चिंता जताई

अमेरिका ने तालिबान सरकार के कई नामों पर चिंता व्यक्त की है। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि मंत्रीमंडल के कई सदस्यों के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए और महिलाओं को शामिल न किए जाने के कारण अमेरिका चिंतित है।

प्रतिक्रिया

विद्रोही नेताओं ने सरकार को गैर-कानूनी बताया

तालिबान के खिलाफ विद्रोह कर रहे नेशनल रजिस्टेंस फ्रंट ऑफ अफगानिस्तान (NRFA) ने नई सरकार को गैर-कानूनी बताते हुए अफगान नागरिकों से विरोध जारी रखने की अपील की है।NRFA ने अपने बयान में कहा है कि तालिबान की कार्यवाहक सरकार अवैध है और यह अफगान लोगों के साथ शत्रुता का साफ संकेत है।विद्रोही नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तालिबान की नई सरकार को मान्यता न देने और अफगानिस्तान के लोगों की मदद करने की अपील की है।

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