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तेजी से बढ़ रहे हैं कोरोना पेशेंट्स, क्या भारत में शुरु हो गया तीसरा चरण?

भारत में तेजी से बढ़ रहे कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या ने सरकार की चिंताओं को बढ़ा दिया है। कुछ विशेषज्ञों ने यह दावा किया है कि देश में कोरोना वायरस का संचरण तीसरे स्टेज यानी सामुदायिक प्रसार के चरण में पहुंच चुका है। हालांकि, इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (ICMR) द्वारा किए गए रेंडम सैंपलिंग टेस्ट के नतीजों ने उनकी इस आशंका को खारिज कर दिया है।

आईसीएमआर ने 15 फरवरी से 2 अप्रैल तक के पांच हफ्तों में 5911 मरीजों का कोरोना वायरस का टेस्ट किया। ये सभी मरीज सांस की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। इनमें से मात्र 104 मरीजों में कोरोना की पुष्टि हुई जो टेस्ट किए गए कुल मरीजों को मात्र 1.8 प्रतिशत है। ये सभी मरीज देश के 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 52 जिलों के रहने वाले थे।

पॉजिटिव पाए गए 104 मरीजों में 40 ऐसे भी थे जिन्होंने न तो विदेश यात्रा की थी और न ही किसी विदेशी यात्री के संपर्क में आए थे। देश के 15 राज्यों में सांस की बीमारी से जूझ रहे कुल मरीजों में एक प्रतिशत के आस-पास कोरोना वायरस से संक्रमित हैं।

आईसीएमआर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि देश के 15 राज्यों के सर्वाधिक प्रभावित 36 जिलों में कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए विशेष कार्य करने की आवश्यक्ता है। वहीं, 14 मार्च को आईसीएमआर द्वारा किए गए एक टेस्ट में भारत में सांस की बीमारी से ग्रसित कोई भी मरीज कोरोना से संक्रमित नहीं था, हालांकि अब यह आंकड़ा बदल गया है।

आईसीएमआर ने अपनी रिपोर्ट के आधार पर सरकार को सुझाव दिया है कि जिन जिलों में सांस से ग्रसित मरीजों में कोरोना वायरस के संक्रमण के मामले समाने आ रहे हैं। उनमें इन रोगियों पर ध्यान देने की जरूरत है। इन रोगियों की मॉनिटरिंग कर इस खतरनाक वायरस के प्रसार को कम किया जा सकता है।

क्या होता है सामुदायिक प्रसार (कम्यूनिटी ट्रांसफर)
कोरोना वायरस के संक्रमण के मामले में सामुदायिक प्रसार का अर्थ यह है कि जब यह पता न चल सके कि संक्रमित मरीज के शरीर में यह वायरस कहां से आया तब इसे सामुदायिक प्रसार माना जा सकता है। इसके अलावा यदि कोई संक्रमित व्यक्ति न तो किसी कोरोना वायरस से संक्रमित देश से लौटा हो या वह किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में न आया हो तो इसे भी सामुदायिक प्रसार का मामला माना जाएगा।

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