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राजस्थान के लिए अलर्ट जारी, इन 7 जिलों में तेज हवाओं के साथ होगी भारी बारिश

सीकर. राजस्थान में शेखावाटी इलाके सहित प्रदेश के सात जिलों में रविवार को तेज हवाओं व गरज के साथ बरसात होने की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार पूर्वी राजस्थान के सीकर, झुंझुनूं, अलवर, भरतपुर तथा पश्चिमी राजस्थान के चूरू, श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ जिले में रविवार को मेघगर्जन,वज्रपात के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार की हवाओं संग हल्की बरसात होने की संभावना है।

नीमकाथाना में 50 एमएम बारिश, शेखावाटी का शेष भाग रहा सूखा
इससे पहले गर्मी के तीखे तेवरों से तप रही शेखावाटी के एक हिस्से में शनिवार को हुई बारिश ने कुछ राहत दी। जिले के नीमकाथाना, गणेश्वर व टोडा क्षेत्र में दोपहर बाद 50 एमएम बारिश हुई। आधे घंटे की बारिश से क्षेत्र में सड़कों और नालों में पानी बह निकला। हालांकि नीमकाथाना क्षेत्र के अलावा शेखावाटी का शेष भाग सूखा ही रहा। लोग गर्मी से परेशान रहे। सीकर में दिन में बादल और सूरज की लुकाछिपी रही।

हवाओं की दिशा पश्चिम की बजाए पूर्वी होने से लू से कुछ हद तक निजात मिली। जिससे अन्य दिनों की तुलना में दोपहर बाद तेज धूप का असर कम रहा। शाम को कई इलाके में मौसम खुशनुमा रहा। फतेहपुर में अधिकतम तापमान 40 डिग्री और न्यूनतम तापमान 27.2 डिग्री दर्ज किया। सीकर में न्यूनतम तापमान 26.8 डिग्री और चूरू में न्यूनतम तापमान 30.4 डिग्री रहा।

चार- पांच दिन लू जैसे हालात
इधर, स्काईमेट वेदर रिपोट के अनुसार राजस्थान के कुछ जिलों में आगामी चार- पांच दिन लू जैसे हालात रहेंगे। रिपोर्ट के अनुसार गंगानगर, हनुमानगढ़, धौलपुर, अलवर, चुरू, पिलानी, सवाई माधोपुर, बूंदी और कोटा जैसे स्थानों पर अगले 4-5 दिनों तक लू जैसे हालात बने रहेंगे। अगले 2-3 दिनों में इन भागों में छिटपुट गरज के साथ धूल भरी आंधी चलने से इंकार नहीं किया जा सकता है।

बाड़मेर, फलोदी और जैसलमेर जैसे चरम पश्चिमी भाग कुछ हद तक इस प्रकोप से बच सकते हैं। इन भागों और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों पर एक चक्रवाती परिसंचरण अरब सागर से नम दक्षिण-पश्चिमी हवाएँ ला रहा है, जिससे आद्र्रता बढ़ रही है लेकिन तापमान गिर रहा है।

इधर, मौसम विभाग के अनुसार 7 जुलाई के बाद बंगाल की खाड़ी से आने वाली हवाएं उत्तर भारत में पहुंचने लगेंगी। इसके बाद मानसून गतिविधियां बढ़ जाएगी और मानसून सक्रिय होगा। 11-12 जुलाई को बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने से भी मानसून आगे बढ़ेगा।

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