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बार-बार खांसी पर डॉक्टर को दिखाया, जांच हुई तो बीमारी की जगह ये निकली!

इंदौर. खरगोन के रहने वाले एक 42 साल की मरीज को कई महीनों से खांसी की समस्या थी। इसके साथ बुखार भी आता था। हालत दिनों दिन बिगड़ती जा रही थी। हालांकि कोविड रिपोर्ट निगेटिव आई थी। डाॅक्टर ने जब मरीज की जांच की, तो पाया कि उनके फेफड़े में सुपारी फंसी हुई है। इस पर डॉ. अभिजीत खंडेलवाल और टीम ने सुपारी को ब्रोंकोस्कोपी के जरिए 2 से 2.30 घंटे के ऑपरेशन से बाहर निकाला।

डॉ. अभिजीत खंडेलवाल, एसोसिएट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ टीबी चेस्ट, इंडेक्स अस्पताल ने बताया कि कुछ दिनों पहले हमारे पास खरगाेन के रहने वाले 42 साल के एक मरीज सचिन आए थे। उन्हें कई महीनों से खांसी की समस्या थी। इस दौरान उन्हें कभी-कभी बुखार भी आ जाता था। मरीज जब हमारे पास आया तो उनकी हालत गंभीर थी। उनका CRP भी बढ़ा हुआ था। हमने सबसे पहले मरीज को इवेल्यूएट किया और सिटी स्कैन में देखा कि उनके दाएं फेफड़े में बड़ा निमोनिया और बाएं फेफड़े में कई छोटे-छोटे निमोनिया थे। वहीं, उनकी कोविड रिपोर्ट निगेटिव थी।

डाॅक्टर के अनुसार, मरीज को यह समस्या काफी समय से थी इसलिए हमने उन्हें ब्रोंकोस्कोपी (फेफड़ों की दूरबीन पद्धति) की सलाह दी। ब्रोंकोस्कोपी के द्वारा हमने देखा कि मरीज के फेफड़ों के दाहिने ऊपरी भाग में कोई गठान दिखाई दी जो कि कोई बाहरी पदार्थ (फॉरेन बॉडी) जैसी प्रतीत हो रही थी। इस पदार्थ की आगे की जांच के लिए जनरल एनेस्थीसिया में रिजिड ब्रोंकोस्कोपी का सोचा गया, लेकिन यह पदार्थ फेफड़े के ऐसे भाग में था, जहां पर रिजिड ब्रोंकोस्कोपी के द्वारा पहुंचना संभव नहीं था।

डॉ. खंडेलवाल ने आगे बताया कि मरीज को इंडेक्स अस्पताल में शिफ्ट किया गया और वहां उपलब्ध आधुनिक दूरबीन की सहायता से देखा गया कि वो पदार्थ (फॉरेन बॉडी) नहीं बल्कि सुपारी का टुकड़ा है जो कि दाहिने ऊपरी भाग को पूरी तरह बंद किया हुआ था, जिसके कारण वहां पर खून का रिसाव भी काफी ज्यादा हो रहा था। इसके बाद अपनी एक टीम तैयार की, जिसमें डॉ. कुमार गिरेन्द्र, डॉ. सुनील मुकाती, डॉ. सुदर्शन गुप्ता एवं पीजी स्टूडेंट्स की सहायता से लगभग 2 से 2.30 घंटे की मेहनत के बाद हमने सुपारी के टुकड़े को निकालने में सफलता हासिल की।

इस दौरान मरीज को जनरल एनेस्थीसिया देने की आवश्यकता नहीं हुई। लोकल एनेस्थीसिया में ही यह प्रोसिजर किया गया। डाॅक्टर के अनुसार काफी कम खर्च में मरीज को अपनी गंभीर समस्या से निजात मिली। इस पूरी प्रक्रिया में डॉ. मुद्रा, डॉ. विनोद, डॉ. शिव, डॉ. विशाल एवं एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. ट्विंकल पटेल, डॉ. तान्या जैन के साथ ही एनेस्थीसिया डिपार्टमेंट, ब्रोंकोस्कोपी टेक्नीशियन, पीजी स्टूडेंट्स की भी मदद ली गई।

सचिन ने बताया कि वह खरगोन का रहने वाला है। पिछले कई महीनों से खांसी, बुखार और सांस संबंधी समस्या बनी हुई थी। डॉ. अभिजीत खंडेलवाल ने जांच की तो पता चला कि मेरे फेफड़े में कोई बाहरी पदार्थ फंसा हुआ है। दूरबीन से जांच की तो पता चला कि फेफड़ों में सुपारी का टुकड़ा फंसा हुआ है। जांच के दौरान मुझे बेहोश भी नहीं किया।

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