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पंजाब ने नहरों में छोड़ा केमिकल, अब राजस्थान के 10 जिले पानी की जगह पी रहे धीमा जहर

बीकानेर, गंगानगर, हनुमानगढ़ समेत करीब 10 जिले के लोग इंदिरा गांधी नहर का जहरीला पानी पीने को मजबूर हैं। असल में पंजाब ने चार दिन पहले ही हरिके बैराज से राजस्थान में आने वाली इंदिरा गांधी नहर में पानी छोड़ा है। इस पानी के साथ भारी मात्रा में केमिकल बहकर आ रहा है। इसी केमिकल वाले पानी से कैंसर, अलजाइमर, हार्ट अटैक और किडनी फेल होने जैसी खतरनाक बीमारियां होने का खतरा बढ़ गया है। राजस्थान के करीब ये 10 जिले पूरी तरह पीने के पानी के लिए इंदिरा गांधी नहर पर निर्भर हैं।

दरअसल, पंजाब में राजस्थान की सीमा पर मौजूद फैक्ट्रियों, कारखानों, केमिकल प्लांट्स समेत कई गंदे नालों का पानी तक नहर में छोड़ा जा रहा है। जालंधर और लुधियाना में ऐसी फैक्ट्रियां सबसे ज्यादा हैं। ऐसी स्थिति में यहां आने वाले पानी में उनका अपशिष्ट भर गया है, जो यहां झाग के रूप में दिखाई दे रहा है।

पंजाब के एक्स्पर्ट्स का कहना है कि राज्य के 12 शहरों का अपशिष्ट यानी सीवरेज का गंदा पानी इसमें बहाया जा रहा है। यह जानकारी पूर्व में जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर स्तर के अधिकारी रहे कुलदीप विश्नोई ने तब भी दी थी, जब वे पंजाब से निकलने वाली नहर के आसपास के जिलों का दौरा करने गए थे। उन्होंने बताया था कि किस प्रकार दूषित पानी इस नहर में बहाया जा रहा है।

दूषित जल असुरक्षित कल समिति के प्रवक्ता रमजान अली चौपदार हरिके बैराज पर पहुंचे, ताकि पंजाब से आ रहे दूषित पानी की हकीकत सामने आए।

गंगानगर में दूषित जल असुरक्षित कल समिति के प्रवक्ता रमजान अली चौपदार हरिके बैराज पर पहुंचे और उन्होंने बताया कि जिस दूषित जल को रोकने का पंजाब ने दावा किया है, वह खोखला है। डैम का गेट अभी भी खुला है और लगातार पानी आ रहा है। उन्होंने बताया कि राजस्थान की नहरों में जो पानी आ रहा है, उसका रंग तक बदलकर काला, हरा या मटमैला जैसा हो गया है। पूरे पानी में झाग ही झाग नजर आने लगा है। गंदगी के इस पानी में दुर्गंध तक आ रही है। इसे हमारे 10 जिलों के लोगों को पीना है और सिंचाई के लिए लेना है।

इन 10 जिले की नहरों में गंगानहर, इंदिरा गांधी नहर परियोजना और भाखड़ा से पानी आ रहा है। यह पानी श्रीगंगानगर, बीकानेर, हनुमानगढ़, नागौर, जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, चूरू, झुंझुनूं, सीकर जिलों में जाता है। ऐसे में गंदगी से लबरेज इस पानी से प्रदेश का बड़ा हिस्सा रोगों की चपेट में आ सकता है।

आंदोलन हुए पर नहीं हुआ असर

असल में पूर्व में भी इस तरह गंदा पानी पंजाब से नहरों में आता रहा है। इसे लेकर कई लोगों ने सरकारों को चेताया भी, लेकिन न तो पंजाब सरकार और न ही राजस्थान सरकार के कोई असर ही पड़ा। लोगों का कहना है कि पंजाब और राजस्थान, दोनों जगह कांग्रेस की सरकार है, इसके बावजूद भी दोनों की आपसी समझ नहीं बन पा रही। किसान आर्मी के गुरलालसिंह बराड़ बताते हैं कि उनके गांव में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो रोगों की गिरफ्त में आए हुए हैं।

पानी में मिले हैं खतरनाक रसायन
एक्सपर्ट्स के अनुसार इस पानी में शीशा यानी लैड, एल्यूमीनियम, आरसेनिक और यूरेनियम जैसे पदार्थ मिले हुए हैं। इनसे पेट से जुड़े रोग अल्सर, आंत का कैंसर, मानसिक विक्षिप्तता, मिर्गी, अल्माइजर, हार्ट अटैक, आंखों की समस्या, किडनी फेल होना, गर्भपात का खतरा आदि समस्याएं सामने आ रही हैं। श्रीगंगानगर इलाके में पिछले कुछ समय में बड़ी संख्या में कैंसर रोगी सामने आए हैं, जो बीकानेर सहित विभिन्न जिलों में उपचार करवाते रहे हैं। पूर्व पीएमओ डॉक्टर पवन सैनी के अनुसार, नहरों में आ रहे गंदे पानी से हैजा, पीलिया, उल्टी, दस्त जैसी बीमारियां हो सकती हैं। पानी में मिले ये जीवन लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल सकती हैं

यूं पल्ला झाड़ रहे अधिकारी
गंग नहर परियोजना के एसई धीरज चावला ने इस बात को स्वीकार तो किया कि नहरों में गंदा पानी आ रहा है। लेकिन, उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि इसके लिए उनकी ओर से पंजाब के संबंधित विभाग को कह दिया गया है। अब उन्हें ही इस पर कार्रवाई करनी होगी।

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