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नीतीश की साइकिल योजना हुई पंचर, स्टूडेंट्स की अटेंडेंस और ड्रॉपआउट बड़ी समस्या

पटना : बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Cm Nitish) की साइकिल योजना को विकास का पहिया कहा गया. पूरे देश में इस योजना की चर्चा हुई. राज्य में 2007 में साइकिल योजना (Cycle Yojna) लागू की गई. शिक्षा विभाग के द्वारा इस योजना के लागू किए जाने के बाद स्कूलों में लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या अधिक हो गई. हालांकि दूसरी ओर पटना स्थित एएन सिन्हा शोध संस्थान ( AN Sinha Institute) ने 2019 में पूरे प्रदेश में सर्वे किए तो हकीकत कुछ और ही सामने आयी.

20% छात्र ही जा रहे स्कूल

एएन सिन्हा शोध संस्थान ( AN Sinha Institute) की 2019 के अध्ययन में ये खुलासा किया कि हाई स्कूल में केवल 20% बच्चे पढ़ने जाते हैं. केवल 50% छात्र-छात्राएं ही साइकिल खरीदते हैं. सबसे बड़ी चिंता की बात है कि ड्रॉपआउट (Dropout In School) राज्य में सबसे अधिक है. शोध संस्थान की ओर से 38 जिलों के 380 स्कूलों में यानी हर जिले में 10 स्कूलों का अध्ययन किया गया. इस दौरान छात्रों और शिक्षकों से बातचीत भी की गई. जिसके आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई है.

रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे
मुख्यमंत्री साइकिल योजना को लेकर एएन सिन्हा शोध संस्थान की टीम ने करीब एक साल तक अध्ययन करने के बाद नीतीश सरकार को भी रिपोर्ट सौंपी दी है. जिसमें में कई चौंकाने वाले खुलासे हैं. एएन सिन्हा शोध संस्थान के प्रोफेसर विद्यार्थी विकास और उनके एक सहयोगी नेतृत्व में ये सर्वे को किया गया.

‘जब हम लोगों ने स्कूलों में जाकर फिजिकल वेरीफिकेशन किया तो हाई स्कूल में केवल 20% छात्र-छात्राएं मौजूद थे. 41% उपस्थिति प्राइमरी में और मिडिल में 36% उपस्थिति थी. सीनियर सेक्शन में केवल 4% उपस्थिति थी. 27% औसत उपस्थिति छात्र-छात्राओं की स्कूल में थी.’ :- डॉ. विद्यार्थी विकास, प्रोफ़ेसर एएन सिन्हा शोध संस्थान 

50 % ने ही खरीदी साइिकल
एएन सिन्हा शोध संस्थान के प्रोफेसर डॉक्टर विद्यार्थी विकास ने बताया कि बिहार में ड्रॉपआउट भी बहुत ज्यादा है. 2018-19 में जब हम लोग रिपोर्ट तैयार कर रहे थे उस समय यह बात सामने आई कि पहली कक्षा में सरकारी स्कूलों में 2403526 छात्र- छात्राओं ने नामांकन लिया था. 10वीं कक्षा में संख्या घटकर 1537628 हो गई. वहीं12वीं कक्षा में ये संख्या 631379 पहुंच गई. इस तरह ग्रेजुएशन में केवल चार लाख ही स्टूडेंट बच गए. वहीं इस तरहत 20 लाख छात्र-छात्राएं क्लास वन से लेकर ग्रेजुएशन तक में घट गये.

‘हम लोगों ने स्कूल में फिजिकल वेरिफिकेशन किया तो यह भी बात सामने आई कि नामांकन करने वाले छात्र-छात्राओं में सिर्फ 50% के करीब ही साइकिल खरीद रहे हैं. इसका बड़ा कारण उनके घर में पहले से साइकिल होना.’ :- डॉ. विद्यार्थी विकास, प्रोफ़ेसर एएन सिन्हा शोध संस्थान

स्कूलों में बढ़ी लड़कियों की संख्या
एएन सिन्हा शोध संस्थान के अध्ययन में ये बात सामने आई कि स्कूलों में लड़कों की अपेक्षा लड़कियों की उपस्थिति अधिक थी. इसके अलावा लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या में काफी बढ़ गई. 2005-06 में स्टूडेंट की कुल संख्या में जहां लड़कों की संख्या 61% थी. वहीं लड़कियों की केवल 39% लेकिन 2018-19 में लड़कों की संख्या घटकर 48% हो गई तो वहीं लड़कियों की संख्या बढ़कर 52% हो गया.

75% फीसदी उपस्थिति अनिवार्य

सरकारी स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति की कम होती संख्या को देखते हुए शिक्षा विभाग ने साइकिल योजना सहित अन्य योजना का लाभ के लिए 75% उपस्थिति अनिवार्य भी किया था. चुनाव के समय उसे हटा भी लिया गया और अब कोरोना के समय भी उसे फिलहाल समाप्त किया गया है.

स्कूलों की जमीनों पर अतिक्रमण

वहीं एएन सिन्हा शोध संस्थान के अध्ययन में स्कूलों की जमीन अतिक्रमण किये जाने सहित कई बातों का भी खुलासा किया गया है. अब ये देखनेवाली बात होगी कि एएन सिन्हा शोध संस्थान के अध्ययन की सौंपी गई रिपोर्ट के बाद सरकार क्या रुख अख्तियार करती है.

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