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पंजाब कांग्रेस में घमासान के बीच मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने चली केजरीवाल की चाल

बधाई हो!! मंगल गीत गाओ। पंजाब कांग्रेस के मसीहा या शायद “मसीह” माननीय मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने मंत्रिमंडलीय बैठक की। फिर मीडिया के माध्यम से मुनादी करते हुए “मसीह चन्नी” ने खैरात में 2kilowatt तक के बिजली बिल माफी की घोषणा की।

पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने घोषणा करते हुए कहा है कि बिजली बिल पर राहत को लेकर दो दौर की बैठकें हो चुकी हैं। कई लोग मजबूरन बिना बिजली के रह रहे हैं। कई लोगों के बिजली का कनेक्शन कटा हुआ है और बिना बिजली के बीच रह रहे हैं। प्रदेश में 55 हजार से एक लाख लोगों का कनेक्शन कटा हुआ है। सितंबर महीने का बिल इस प्रक्रिया में शामिल नहीं होगा। अगस्त महीने तक का बकाया पंजाब सरकार भरेगी इस बिलों को भरने पर पंजाब सरकार पर 12 सौ करोड़ का भार आएगा

पंजाब में बिजली बिल माफी की घोषणा क्यों की गयी?

नग्नता बुरी बात है। उससे से बुरा है नग्न नृत्य परंतु, इस विकृति की पराकाष्ठा है- निर्लज्जता सहित नग्न नृत्य। पंजाब में कांग्रेस यही कर रही है। सिद्धू ने सत्ता हेतु अपने “कप्तान” के प्रतिष्ठा का सार्वजनिक चीरहरण किया। यह नैतिक नग्नता थी। इसको रोकने के बजाय पूरा दल कोलाहल पर उतर आया। यह राजनीतिक नंगई का मानद उदाहरण था। उसके बाद एक “राष्ट्रवादी कप्तान” को अपमानित करते हुए पाकिस्तान समर्थित सिद्धू को आधिपत्य सौपना निर्लज्जता सहित नग्न नृत्य नहीं था तो क्या था? उसके बाद जो भी घटनाक्रम हुए जैसे कठपुतली “मसीह चन्नी” का राज्याभिषेक, सिद्धू का त्यागपत्र और कप्तान को “ I am sorry, Amarindar” का आदर्शवाक्य एक आदर्श राजनीतिक व्यवस्था पर कलंक के समान है। इसके बाद भी पंजाब का कांग्रेस में मचा घमासान और बढ़ गया जब सिद्धू ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तिफा दे दिया। अतः, इसको बंद करना उनके “हाथ” में नहीं है।

इसलिए, सबसे बड़ा प्रश्न ये उठा कि आखिर ऐसा क्या किया जाये की पंजाब कांग्रेस में चल रहे घमासान से सभी का ध्यान भटकाया जा सके में व्यवधान न आए। तय हुआ मूर्ख जनता को और मूर्ख बनाया जाये। इसके लिए मूर्ख बनाने के महारथी अर्थात केजरीवाल का फ्री बिजली का सिद्धान्त अपनाया जाये। इसी क्रम में बिजली माफी की मुनादी कराई गयी। इससे पंजाब कांग्रेस में मचे घामासान से लोगों का ध्यान थोड़ा हटा।

बिजली बिल माफी मूर्खता क्यों है?

सदैव स्मरण रखिए। आप भारत भाग्य विधाता है। जनप्रतिनिधि सिर्फ सेवक और सेवा प्रदाता है। इस सेवा के बदले आप उन्हें कर देते हैं। ठीक वैसे ही जैसे किराने वाले को पैसे देने पर वो आपको 2 किलो चीनी देता है। अतः किसी सरकार ने बिजली बिल माफ नहीं किया। पंजाब की जनता ने किया है। हम आपके सामने कुछ तथ्य रखेंगे और निर्णय आपके विद्वता पर छोड़ेंगे। चन्नी अनुसार इस ऋण माफी के कारण पंजाब सरकार अर्थात आप पर 1200 करोड़ का भार आएगा। इसका तात्पर्य हम कान पकड़ेंगे, लेकिन दूसरी तरफ से पकड़ेंगे। यहीं तो मूर्ख बनाने की मानद प्रक्रिया है। पंजाब का बिजली सब्सिडी बिल लगातार बढ़कर 17,796 करोड़ रुपया हो गया है, जो पंजाब के कुल बजट का 10% से अधिक है। इसमें 1200 करोड़ और जोड़ लीजिये।

आपकी जानकारी हेतु आपकों बता दें कि भारत में बिजली वितरण गतिविधि ज्यादातर राज्य सरकार के स्वामित्व वाली कंपनियों (डिस्कॉम) द्वारा की जाती है।

पंजाब सरकार ने तो अभी डिस्कॉम का पिछले साल सिर्फ मार्च महीने का ही 291 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया है।

राजकोषीय घाटा भी उच्चतम स्तर पर है। वित्तीय वर्ष 2020 में पंजाब का सकल राजकोषीय घाटा लगभग 197 बिलियन भारतीय रुपये था।

अब आप स्वयं सोचिए वो अगर आपके ऋण माफ करते है तो कैसे करेंगे? कहाँ से करेंगे इसका जवाब तो निश्चित है वो है- “आपकी जेब”। जिससे कर निकलता है और देश चलता है; जिस दिन आपकी जेब से कर निकलना बंद हो गया आपकी सेवाएँ स्थगित कर दी जाएंगी ठीक उसी तरह जैसे बिना पैसे के किराने वाला चीनी देने से मना कर देता है।

ऋण माफी एक छल है। ऋण सिर्फ उदयम और अर्जन से माफ होता है ना कि सब्सिडि और माफी उद्घोषणा से। इसे ऋण माफी नहीं, बल्कि ऋण समन्वय कहते है। इससे नेता आपको दिग्भ्रमित कर छलतें है। एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते आपको इस खैरात से खुश होने के बजाय उन सातधीशों से प्रश्न करना चाहिए की आखिर ऋण माफ करोगे तो इसकी भरपाई का आर्थिक स्रोत और प्रक्रिया क्या होगी? अगर वो निरुत्तर है इसका मतलब आप छले गए।

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