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शहीद मेजर की पत्नी ने शेयर की अपनी लव स्टोरी, बताया- क्यों नहीं की शादी?

ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे ने एक शहीद हुए जवान की पत्नी की कहानी शेयर की है। जिसने अपने पति के दुनिया से चले जाने से बाद दोबारा शादी करने से मना कर दिया और उसकी खूबसूरत यादों और प्रेम पत्रों के साथ जीवन जीने का रास्ता चुना।

1995 में हुई थी दोनों की मुलाकात

इस पोस्ट में उन्होंने बताया, ‘साल 1995 में मैं अपनी आंटी के साथ ट्रेन में थी, जब मेरी आंखें मेजर पद्मपनी से मिली। वो लोगों की मदद कर रहे थे और उन्होंने मुझे शरमाते हुए देख लिया था।’

पास बैठकर पढ़ने लगे किताब

इसके बाद मेजर उनके पास बैठ गए और अपनी किताब पढ़ने लगे। ‘जब आंटी सो गई तो हम दोनों बात करने लगे, हम दोनों एक दूसरे की आंखों में सारी रात देखते रहे। जब हम पहुंचे तो मेजर अपनी किताब वहां छोड़ गए, उसके बीच उनका फोन नंबर था।’

शादी की बात चली

‘मैं घर गई और मैंने मेजर को फोन किया। उनकी मां ने फोन उठाया। उन्होंने बताया कि मेजर तुम्हारे बारे में बातें कर रहा था। मैं बहुत खुश हुई। इसके बाद जल्द ही हमारे परिवार मिले और सब शादी के लिए राजी हो गए।’

दोनों अलग-अलग भाषाएं बोलते थे

‘हम दोनों अलग-अलग भाषाएं बोलते थे। मैंने उनके लिए हिंदी बोलनी सीखी। वो काफी रोमांटिक थे। कई बार घर जल्दी आकर वो मुझे सरप्राइज देते थे।’

कारगिल से आया बुलावा

‘तीन वर्षों बाद में गर्भवती हुई, वो बहुत खुश थे। पर ड्यूटी की बात आती तो मेजर के लिए देश पहले आता था। उन्हें कारगिल से बुलावा आ गया। उन्होंने जाने का कारण भी नहीं बताया। उन्होंने मुझे गले लगाया और कहा मैं जल्द ही वापस आउंगा।’

लिखते थे वहां से पत्र

‘वो मुझे कारगिल से पत्र लिखते थे कि हमारे बच्चे का ध्यान रखना। जब मुझे पता चला कि वो कारगिल में हैं तो मैं बहुत चिंतित हुई। फिर एक दिन मेरे ससुराल वालों ने बताया कि मेजर वॉर में शहीद हो गए। मैं टूट चुकी थी। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मुझे गर्व करना चाहिए, मैं विधवा हो चुकी थी। कई हफ्तों तक मैं रोती रही।’

बेटी को दिया जन्म

 

‘उनकी शहादत के 3 महीने बाद मैंने एक बच्ची को जन्म दिया। वो बिलकुल मेजर जैसे दिख रही थी। बाद में मेजर के परिवारवालों ने मुझे दोबारा शादी करने के बारे में कहा। मैंने मना कर दिया। मैंने कहा-मैं उनकी विरासत का सम्मान करूंगी।
मैं उनके साथ ही जी, अपना बिजनेस शुरू किया। एक ऐसी टीम बनाई जो वॉर में शहीद हुए सैनिकों के परिवार को इमोशनल सपोर्ट दे।

बेटी को सुनाती हूं उनकी कहानी

‘मैं अपनी बेटी को मेजर की कहानियां सुनाती हूं। शादी की सालगिरह पर मैं उनका पसंदीदा इडली, सांबर और डोसा बनाती हूं। एक बार की बात हैं मैं अकेला फील कर रही थी। तभी मेरे को एक पुराने दोस्त का फोन आया। मैंने सोचा कि मेजर तुम्हें कैसे पता चल जाता है कि मुझे किसी की कंपनी की जरूरत है। जब भी मैं अपनी बेटी के साथ होती हूं तो मुझे मेजर का हंसता हुआ चेहरा उसमें दिखता है। 25 वर्ष हो चुके हैं लेकिन आज भी मैं खुद को नहीं समझाई पाई हूं कि वो वह स्टेशन से घर नहीं आ रहे हैं।’

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