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वाराणसी: ज्ञानवापी मस्जिद केस पर बड़ी खबर, पुरातात्विक सर्वे की याचिका पर सुनवाई की तारीख तय

वाराणसी : सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड (Sunni Central Waqf Board) और अंजुमन इंतजामिया मसाजिद ने पुरातात्विक सर्वेक्षण के आदेश के खिलाफ जिला जज ओम प्रकाश त्रिपाठी की अदालत में दो सिविल रिवीजन दाखिल किया था. शुक्रवार को इन दोनों याचिकाओं पर सुनवाई हुई. दाखिल याचिकाओं के खिलाफ मंदिर पक्ष ने आपत्तियां दाखिल की. इस पर प्रतिउत्तर शपथ पत्र दाखिल करने के लिए सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और अंजुमन इंतजामिया मसाजिद ने कोर्ट से समय मांगा है. कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 27 जुलाई 2021 की तारीख तय की है.

ज्ञानवापी मामले में सिविल कोर्ट ने 8 अप्रैल 2021 को फैसला सुनाते हुए पुरातात्विक सर्वेक्षण के प्रार्थना पत्र को स्वीकार कर लिया था. इसके बाद कोर्ट ने इस मामले की जिम्मेदारी केंद्र सरकार को सौंपी थी. कोर्ट ने इस मामले में पांच लोगों की टीम बनाकर पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने का आदेश जारी किया था. इसमें मुस्लिम पक्ष से भी दो लोगों को शामिल करने का आदेश था. सीनियर डिविजन फास्ट ट्रैक कोर्ट के सिविल जज ने ज्ञानवापी परिसर के पुरातात्विक सर्वेक्षण के लिए सर्वे का फैसला सुनाया था. कोर्ट ने विवादित स्थान का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने, खुदाई कराने और उसकी आख्या न्यायालय में प्रस्तुत करने के लिए आदेश जारी किया था.

इस संबंध में बात करते हुए सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड लखनऊ के अधिवक्ता मो. तौहीद खान ने बताया कि 8 अप्रैल 2021 को कोर्ट ने ASI के सर्वे का आदेश पारित किया था. उसी आदेश के खिलाफ हम लोगों ने रिवीजन सेक्शन 115 सीपीसी में दाखिल किया है. उसके एडमिशन के लिए 9 जुलाई का दिन नियत था, जिसमे विपक्ष ने काउंटर काफी लंबा चौड़ा दाखिल किया है. इस पर कोर्ट से हम लोगों ने प्रार्थना की काउंटर का रिजॉइंडर दाखिल करना जरूरी है. इसलिए कोर्ट ने रिजॉइंडर दाखिल करने के लिए 27 जुलाई 2021 की तारीख निर्धारित की है.

अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी ने बताया कि यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और अंजुमन इंतजामिया मसाजिद ने दो अलग-अलग सिविल रिवीजन दाखिल किया था. मंदिर पक्ष की तरफ से मैंने न्यायालय से पूर्व में समय प्राप्त किया था. शुक्रवार को हमने उनके याचिका और स्टे प्रार्थना पत्र के खिलाफ बहुत विस्तृत प्रति शपथपत्र दाखिल किया. जिस पर शुक्रवार को न्यायालय में दोनों पक्षो की सुनवाई थी. दोनों याचिकाओं के ग्रहण किए जाने पर एडमिशन के लिए लेकिन उन्होंने बहस करना उचित नही समझा और न्यायालय से यह कहा कि ये जो विस्तृत आपत्तियां दाखिल की गई है. इसका हम प्रतिउत्तर शपथपत्र दाखिल करेंगे, जिसके लिए कुछ समय दे दिया जाए. इस पर न्यायालय ने उनको समय दे दिया है.

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