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यूपी की कहानी : मर गई मानवता और संवेदना तार-तार, मोहल्ले वालों ने मुंह फेरा तो प्रशासन भी लाचार

गोरखपुर। गोला थाना क्षेत्र के रामनगर चौराहे पर किराये के कमरा लेकर रहने वाले पीडब्लूडी ड्राइबर की कोरोना संक्रमण से मौत हो गई। एक दिन पहले ही कोरोना पाजिटिव निकलने के बाद चिकित्सकों की सलाह पर होम आईसोलेशन में रह रहे थे। सीएमओ से गुहार लगाने के बाद भी इन्हे बेड नही मिल सका था। परिजनों ने इलाज के अभाव में मौत का आरोप लगाया। मौत के बाद परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल रहा। इनकी मौत की सूचना के बाद भी मोहल्ले वाले घंटों शव के नजदीक तक नही गए। बाद में तहसील प्रशासन ने पीपीई किट के साथ टीम भेजकर शव को वहां से उठवाया।

मिली जानकारी के मुताबिक, देवरिया जनपद के बरांव निवासी 55 वर्षीय व्यास मुनि पांडेय पीडब्लूडी में चालक है। यह गोला थाना क्षेत्र के बांसगांव तहसील अन्तर्गत रामनगर चौराहे पर किराया का कमरा लेकर रहते थे। तथा यहीं से गोरखपुर आते जाते थे। लोगों ने बताया कि बुधवार को इन्हे अपनी तबियत खराब महसूस होने पर सीएचसी बांसगांव दिखाने गए।

जहां एंटीजन किट से हुई जांच में कोरोना पाजिटिव निकले थे। और चिकित्सकों ने इन्हे दवा का किट देकर होम आईसोलेशन में रहने की सलाह दी थी। इन्होने परिजनों को इसकी सूचना दी तो बुधवार की शाम को ही बेटा रामअशीष मां को साथ लेकर इनके पास पहुंच गया। बेटे ने गुरूवार की सुबह से उनकी तबियत काफी बिगड़ती देख 108 एम्बुलेंस सेवा को फोन किया। पर कोई रिस्पांस नही मिला। कोरोना पाजिटिव केस होने के कारण निजी वाहन वाले भी उन्हे ले जाने के लिए तैयार नही हो रहे थे। लोगों की सलाह पर बेटे ने डीएम को सूचना दी।
डीएम ने सीएमओ का नम्बर देकर उनसे बात

करने के लिए कहा। बेटा का आरोप है कि सीएमओ ने कहा कि बेड खाली नहीं है। यह सब करते दोपहर हो गई। आखिर कार में 2:30 बजे पिता के प्राण पखेरू उड़ गए। फिर शव को ले जाने के 108 नम्बर पर फोन किया तो उधर से कहा गया कि कोरोना पॉजीटिव का शव ले जाने के लिए 108 नहीं है। फिर थक हार कर एसडीएम सदर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कुलदीप मीणा व बांसगांव एसडीएम ने स्वास्थ्य कर्मियों को एम्बुलेंस लगाकर शव उठवाने के इंतजाम करने का निर्देश दिया। लेकिन उनके निर्देश के घंटो बाद भी शव को उठवाने का कोई इंतजाम नही हो सका। शुक्रवार की दोपहरी में शव को किसी तरह ले जाया जा सका। लेकिन मौत के 24 घंठे बाद तक शव पड़े रहने से संवेदना तार-तार रही। परिजन परदेश में आकर शव को किसी तरह ले जाने के लिए परेशान रहें। बावजूद इसके मोहल्ले वालों का दिल नही पसीजा और मुह फेरे रहे तो प्रशासनिक सिस्सटम भी लाचार ही दिखा।

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