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फर्जी वोटर ID बनाने का जाल कई राज्यों तक फैला, दिल्ली से अरेस्ट सरगना ने उगले कई राज

चुनाव आयोग की वेबसाइट का ID और पासवर्ड हासिल करके फर्जी वोटर ID कार्ड बनाने का जाल केवल यूपी नहीं बल्कि कई राज्यों तक फैला है। दो दिनों के अंदर सहारनपुर पुलिस ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली से 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मध्य प्रदेश के हरदा का रहने वाला अरमान मास्टरमाइंड है। ये लोग चुनाव आयोग में काम करने वाले संविदा कर्मचारियों की ID पासवर्ड हासिल करके हजारों की संख्या में फर्जी वोटर आईडी कार्ड बना चुके हैं। पूछताछ में अरमान ने कई राज भी उगले हैं। मध्य प्रदेश के ही अंबाह के रहने वाले कम्प्यूटर ऑपरेटर हरिओम सखवार का नाम भी सामने आया है। पुलिस इसकी गिरफ्तारी के लिए भी जुटी हुई है।

हर राज्य के लिए अलग-अलग रेट था
पुलिस ने रविवार को राजस्थान के कोटा बारां से यूट्यूबर दीपक और उसके भाई संजीव को गिरफ्तार किया। ये यूट्यूबर भी हजारों की संख्या में फर्जी वोटर कार्ड बना चुका है। अब पुलिस, IB और चुनाव आयोग इस बात का पता लगा रही है कि इन वोटर आईडी का इस्तेमाल कब-कब और किन-किन लोगों ने किया है। पुलिस का दावा है कि ये आरोपी हर राज्य में अलग-अलग रेट पर वोटर आईडी तैयार करते थे। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में इसकी कीमत 300 रुपए थी, इसी तरह दिल्ली में 100 रुपए, राजस्थान में 200 रुपए में वोटर आईडी कार्ड बनाया जाता था।

यूट्यूबर भी निकला फ्रॉड

फर्जी वोटर कार्ड बनाने के मामले में पुलिस ने राजस्थान में कोटा के पास बारां से यूट्यूबर दीपक मेहता और उसके भाई संजीव को गिरफ्तार किया है। दीपक से पूछताछ में सामने आया है कि इस फर्जीवाड़े में दीपक अपने बड़े भाई संजीव के अकाउंट का इस्तेमाल करता था। दोनों भाइयों के 5 अकाउंट में पैसा आता था। इन अकाउंट को दीपक ऑपरेट करता था, फिर इसमें से दीपक 50% हिस्सा मुख्य आरोपी विपुल सैनी और अरमान मलिक को दे देता था। दीपक का यूट्यूब पर अपना खुद का चैनल है और उसके लाखों की संख्या में फॉलोअर्स हैं।

अरमान ने जुटाया था ID पासवर्ड
भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट में सेंध लगाकर 10 हजार से ज्यादा फर्जी वोटर ID कार्ड बनाने के मामले में गिरफ्तार मास्टरमाइंड अरमान मलिक ने कई राज उगले हैं। अरमान ने चुनाव आयोग के दिल्ली कार्यालय में काम करने वाले संविदा कर्मचारी आदित्य खत्री और नितिन से ID पासवर्ड हासिल किया था। इसके बाद अरमान ने ये आईडी पासवर्ड सहारनपुर के विपुल सैनी को दे दिया था। इसके बाद से विपुल फर्जी वोटर कार्ड बनाने लगा था। इस मामले में अरमान ने इसमें मुरैना के अंबाह के रहने वाले कंप्यूटर ऑपरेटर हरिओम सखवार का नाम भी बताया है। हरिओम ने भी बड़ी संख्या में फर्जी वोटर आईडी कार्ड बनाया है।

क्या है पूरा मामला ?

सहारनपुर पुलिस की साइबर सेल ने बुधवार 11 अगस्त को सहारनपुर के मच्छरहेड़ी गांव से विपुल सैनी को गिरफ्तार किया था। विपुल पर फर्जी वोटर आईडी कार्ड बनाने का आरोप था। विपुल की शह पर पुलिस ने दिल्ली से इसके मास्टरमाइंड अरमान मलिक और उसके तीन अन्य साथियों को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद से अब तक 10 लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि यह लोग चुनाव आयोग में काम करने वाले दो संविदा कर्मचारियों का ID पासवर्ड लेकर लोगों को वोटर कार्ड बनाकर दिया करते थे। इसके एवज में मोटी रकम भी वसूलते थे। पुलिस ने अरमान, विकेश, हर्षा उर्फ हरिओम और दीपक मेहता उर्फ टेक्नीकल मेहता के खिलाफ FIR दर्ज की है। इसमें अरमान, दीपक मेहता, विकेश गिरफ्तार हो चुके हैं। अब केवल हरिओम ही पुलिस की पकड़ से बाहर है।

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