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क्या आतंकियों से जुड़े हैं धर्मान्तरण कराने वालों के तार, दिव्यांग हिंदू बच्चों को फिदाइन बनाने की साजिश!

डेमो

मूक बधिर बच्चों का धर्मान्तरण कर क्या उन्हें फिदाईन बनाए जाने की साजिश थी? क्या आईएसआई ने भारत की सुरक्षा एजेंसियों को धता बताते हुए देश की एकता-अखण्डता को छिन्न-भिन्न करने के का पूरा ताना-बाना तैयार कर लिया? क्या देश और धर्म विरोधी कार्रवाईयों को भारत के लॉ मेकर्स (संसद सदस्यों) में से किसी का प्रश्रय मिला हुआ है? सुनने और देखने में तो ये बातें बहुत छोटी और मामूली लगती हैं लेकिन है बहुत खतरनाक!

डासना के एक मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती की हत्या की कोशिश की खबरें शुरुआती दौर में सामने आई तो मामला मामूली लगा। लेकिन धीरे-धीरे यह गंभीर होता जा रहा है। यति नरसिंहानंद सरस्वती को मारने की धमकी दिल्ली की आप सरकार के विधायक अमानतुल्ला खां ने भी दी थी। इसी के बाद पहाड़गंज से एक कश्मीरी आतंकी पकड़ा गया था। जो हिंदू साधु का वेश रख कर नरसिहांनंद सरस्वती की हत्या के लिए आया था।

अब तक यह तो समझ आ गया था कि महतं यति नरसिंहानंद सरस्वती का मामला गंभीर होता जा रहा है, लेकिन तब तक यह नहीं पता था कि घर के भीतर सेंध काफी भीतर लग चुकी है। आतंकी कहीं बाहर से नहीं बल्कि घर में ही तैयार किए जा रहे हैं। इन आतंकियों में भी वो लोग शामिल हो सकते हैं जो हिंदुओं से मुसलमान बने हैं। वैसे तो हिदुंस्तान में जितने भी मुसलमान हैं उनमें से अधिकांश कभी न कभी हिंदु ही थे।

बहरहाल, ताजा मामला बहुत अधिक गंभीर हो चुका है। यूपी की एटीएस ने जिन दो मौलानाओं को गिरफ्तार किया है उनमें से एक कुछ साल पहले तक हिंदू ही था। मौलानाओं जहाँगीर आलम कासमी और मोहम्मद उमर गौतम को दिल्ली से दबोचा गया था। अब इनसे पूछताछ में कई राज़ सामने आए हैं। अब सामने आया है कि ये मूक-बधिर बच्चों को मुस्लिम बना कर उनका इस्तेमाल आत्मघाती हमलावरों के रूप में करने वाले थे।

नोएडा के सेक्टर-117स्थित डेफ सोसाइटी के बच्चों को खास कर के इस गिरोह ने निशाना बनाया। इनकी साजिश थी कि मूक-बधिर विद्यार्थियों का उपयोग ‘मानव बम’ के रूप में किया जाए। भारत ही नहीं, इन्हें ‘मानव बम’ बना कर विदेश में भी उनका इस्तेमाल करने की साजिश थी। पाकिस्तान और अरब देशों से इन्हें भारी फंडिंग मिल रही थी, जिससे इस्लामी धर्मांतरण का गिरोह फल-फूल रहा था।

उस प्रकरण में पकड़े गए विपुल, कासिफ व सलीमुद्दीन के तार कई इस्लामी कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े हुए मिले हैं। सुरक्षा एजेंसियाँ अब इनके नेटवर्क के तह तक जाने में लगी है। चैरिटेबल सोसाइटी द्वारा संचालित स्कूल के मूक-बधिर बच्चों के अलावा ये गिरोह महिलाओं को भी अपना शिकार बनाता था। कई महिलाओं का इस्लामी मतांतरण करा कर उनका निकाह करा दिया गया। ये दिव्यांग बच्चे बोल-सुन नहीं सकते हैं, इसीलिए उन्हें निशाना बनाया गया।

इनमें से एक कलीमुद्दीन से यूनानी पद्धति में पैरामेडिकल का प्रशिक्षण लिया था। नागपुर का एक कट्टरपंथी संगठन भी एजेंसियों की रडार पर है, जिसका महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में प्रभाव है। विपुल इसी संगठन से जुड़ कर इस्लाम के प्रचार-प्रसार में लगा हुआ था। गरीब परिवार से आने वाले विपुल का धर्मांतरण भी पैसे, नौकरी और शादी का लालच देकर कराया गया था। सलीमुद्दीन ने कासिफ की बहन से उसकी शादी करा कर उसके लिए क्लिनिक भी खुलवा दिया था।

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