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Home / उत्तर प्रदेश / कोरोना को कंट्रोल करना है तो बच्चों का वैक्सीनेशन जरूरी, तीसरी लहर रोकने के 3 तरीके जानिए
Children of stranded migrant workers wait to board a special train to Bihar state from MGR central railway station after the government eased a nationwide lockdown imposed as a preventive measure against the COVID-19 coronavirus, in Chennai on June 18, 2020. - The epidemic has badly hit India's densely populated major cities and Chennai in the south has ordered a new lockdown from June 19 because of a surge in cases. (Photo by Arun SANKAR / AFP)

कोरोना को कंट्रोल करना है तो बच्चों का वैक्सीनेशन जरूरी, तीसरी लहर रोकने के 3 तरीके जानिए

बच्चों की वैक्सीन के मुद्दे पर ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज दिल्ली (AIIMS) के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया ने जरूरी बात कही है। उन्होंने कहा है कि यदि महामारी को पूरी तरह रोकना है तो बच्चों का वैक्सीनेशन बहुत जरूरी है। हमें जल्द से जल्द बच्चों के लिए वैक्सीन बनानी होगी, ताकि उनका वैक्सीनेशन किया जा सके।

दूसरे देशों से वैक्सीन आयात करने पर डॉ. गुलेरिया ने कहा है कि अमेरिकी कंपनी फाइजर से कई मुद्दों पर बातचीत चल रही है। सरकार और कंपनी के बीच जल्द ही वैक्सीन को लेकर समझौता हो सकता है और मुझे उम्मीद है कि जल्द ही दोनों के बीच करार हो जाएगा। डील होते ही तेजी से फाइजर की वैक्सीन देश में इंपोर्ट की जाएगी।

तीसरी लहर रोकने के 3 तरीके
1. भारत की ज्यादा से ज्यादा आबादी का वैक्सीनेशन करना होगा।
2. लोगों को कोविड गाइडलाइंस का पालन करना होगा।
3. ऐसे इलाकों की मॉनिटरिंग करनी होगी, जहां कोरोना केस तेजी से बढ़ रहे हैं।

6 से 8 हफ्तों में तीसरी लहर की चेतावनी दी थी
इससे पहले डॉ. गुलेरिया ने 19 जून को कोरोना की तीसरी लहर को लेकर चेतावनी जारी की थी। उन्होंने कहा था कि यदि कोरोना गाइडलाइंस का पालन नहीं किया गया और बाजारों या टूरिस्ट स्पॉट पर लगने वाली भीड़ को नहीं रोका गया तो कोरोना की तीसरी लहर सिर्फ 6 से 8 हफ्तों में पूरे देश पर अटैक कर सकती है।

बच्चों पर तीसरी लहर का खतरा कम: डॉ. गुलेरिया
डॉ. गुलेरिया ने कहा था कि अभी तक की रिसर्च में ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं कि कोरोना की तीसरी लहर बड़ों से ज्यादा बच्चों को प्रभावित करेगी। इससे पहले भारत के महामारी विशेषज्ञों ने पहले सितंबर-अक्टूबर तक कोरोना की तीसरी लहर आने की आशंका जताई थी।

भारत में कैसे होता है बच्चों पर कोरोना वैक्सीन का ट्रायल?
ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया यानी DCGI ने हाल ही में वैक्सीन को बच्चों पर ट्रायल करने की मंजूरी दी है। इसमें 2 साल से 18 साल के बच्चे शामिल होंगे। ट्रायल में 2 से 18 साल के 515 पार्टिसिपेंट्स होंगे। बच्चों में वैक्सीनेशन को दो चरणों में बांटा गया है। पहले चरण में बच्चों को अलग-अलग डोज दिया जाएगा। इसके 28 दिन बाद दूसरा डोज दिया जाएगा। वैक्सीनेशन के बाद बच्चों के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जाएगी।

यह हू-ब-हू वयस्कों पर किए जा रहे ट्रायल की तरह ही है, लेकिन इसमें वैक्सीनेशन का दूसरा भाग अहम हो जाता है। बच्चों का सुपरविजन और एक्स्ट्रा केयर करनी पड़ती है। हर बच्चे का अपना इम्यून सिस्टम होता है, ऐसे में कोई ड्रग बच्चों पर कैसे रिएक्ट कर रही है, उसका ध्यान रखना बेहद जरूरी है। इसलिए बच्चों के स्वास्थ्य की कम से कम 6 से 8 महीने निगरानी की जाएगी। इसके बाद ही ट्रायल को पूरा माना जाएगा।

इन देशों में चल रहा है बच्चों का वैक्सीनेशन
कनाडा- 
पूरी दुनिया में बच्चों का कोरोना वैक्सीनेशन सबसे पहले कनाडा ने शुरू किया। यहां 12-15 साल तक के बच्चों के लिए फाइजर की वैक्सीन को मंजूरी दी गई है। इससे पहले यह वैक्सीन 16 से ज्यादा उम्र वालों को लगाई जा रही थी।

अमेरिका- यहां भी 12 से 15 साल के बच्चों के लिए फाइजर-बायोएनटेक (Pfizer-BioNTecch) की कोरोना वैक्सीन लगाई जा रही है। अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (US-FDA) ने इसे इजाजत दी है। कनाडा की ही तरह पहले यह भी 16 साल से ज्यादा उम्र वाले लोगों को लगाई जा रही थी। जिसके बाद अब 12 से 15 साल के छह लाख बच्चों को वैक्सीन के डोज लगाए जा चुके हैं।

अमेरिका में जॉनसन एंड जॉनसन और नोवावैक्स जैसी कंपनियां भी अपनी-अपनी वैक्सीन के बच्चों पर ट्रायल की शुरुआत कर चुकी हैं। नोवावैक्स ने 12-17 आयु वर्ग के 3,000 बच्चों पर अपनी वैक्सीन के ट्रायल्स शुरू किए हैं, लेकिन इसे अभी तक किसी भी देश में मंजूरी नहीं मिली है। इसमें शामिल हो रहे बच्चों की दो साल तक निगरानी की जाएगी।

ब्रिटेन- ब्रिटेन में एस्ट्राजेनेका 6 साल से 17 साल के बच्चों पर ट्रायल कर रही है। एस्ट्राजेनेका की ही वैक्सीन कोवीशील्ड के नाम से भारत में लगाई जा रही है।

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