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7 साल पहले जिस स्कूल को ध्वस्त किए माओवादी, सरेंडर करने के बाद खुद उसे दोबारा बनाये

जगदलपुर/दंतेवाड़ा. दंतेवाड़ा जिले के नक्सलगढ़ मासापारा में 7 साल बाद एक बार फिर शिक्षा की अलख जगेगी। मासापारा के प्राथमिक शाला में 2 अगस्त से घंटियों की आवाज भी सुनाई देगी। इसमें खास बात यह है कि यह वही मासापारा का स्कूल है जिसे नक्सलियों ने साल 2014 में तोड़ दिया था। लेकिन, अब साल 2020 में सरेंडर कर चुके माओवादियों ने खुद ही इस स्कूल को बना दिया है। अब 2 अगस्त को यहां पूरे 7 साल बाद स्कूल खुलेगा। स्कूल खुलने की खबर सुन कर इलाके के ग्रामीण व सरेंडर नक्सली भी बेहद खुश हैं। इतना ही नहीं आत्मसमर्पण कर चुके नक्सली तो बच्चों को स्कूल दिखाने भी लेकर आए और कहा कि यहीं पढ़ना है और आगे चलकर बड़ा अफसर बनना है।

उंगलियां पकड़ दिखाई स्कूल, कहा- अब पढ़ाई करने रोज यहीं आना है

दंतेवाड़ा जिले के मासापारा में 2 अगस्त से स्कूल खुलने की खबर सुनते ही ग्रामीण सहित इस गांव के सरेंडर नक्सली बहुत खुश हैं। सरेंडर नक्सली अनिल व शंकर ने गांव में खेल रहे बच्चों को एकत्रित किया, उनकी उंगलियां पकड़ी और उन्हें स्कूल दिखाने लेकर भी गए। दोनों सरेंडर नक्सलियों ने बच्चों से कहा कि अब कल से सभी को इसी स्कूल में पढ़ाई करने आना है। पढ़ाई कर बड़ा अफसर बनना है। ग्रामीणों ने कहा कि अब हमारे बच्चों को दूसरे गांव के स्कूल में भेजना नहीं पड़ेगा। 7 साल बाद अब गांव में ही स्कूल खुलेगा। हमें बहुत खुशी हो रही है। इधर दंतेवाड़ा कलेक्टर दीपक सोनी ने भी स्कूल खोलने की तैयारी करने अधिकारियों को कहा है।

लोन वर्राटू अभियान के तहत किया सरेंडर,स्कूल बनाने की थी मांग

दंतेवाड़ा पुलिस के द्वारा लोन वर्राटू अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान से प्रभावित होकर जुलाई 2020 में भांसी थाना क्षेत्र के 18 से ज्यादा नक्सलियों ने कलेक्टर दीपक सोनी व SP डॉ अभिषेक पल्लव के सामने हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटे थे। अच्छी बात यह थी कि इन्हीं नक्सलियों ने सरेंडर करने के तुरंत बाद मासापार के स्कूल भवन को बनाने की मांग की थी। कलेक्टर ने तुरंत स्वीकृति भी दी थी। जिन हाथों ने संगठन में रहते शिक्षा के मंदिर को ध्वस्त किया था, सरेंडर के बाद उन्हीं हाथों ने कुछ ही महीनों में स्कूल को वापस बना दिया। ताकि यहां के बच्चे भी दूसरे बच्चों की तरह पढ़ सकें।

हम नहीं चाहते की गांव में कोई दूसरा नक्सली जन्में

मासापारा गांव के ही रहने वाले सरेंडर नक्सली शंकर और अनिल ने बताया कि, बड़े नक्सलियों के दबाव में हमने 7 साल पहले गांव के ही स्कूल को तोड़ दिया था। हम भूल गए थे कि इससे हमारे बच्चों को ही नुकसान होगा। बच्चे पढ़ाई के लिए काफी परेशान हो रहे थे। हम नहीं चाहते थे कि हमारे बच्चे अशिक्षित रहें और बड़े होकर हमारे जैसे ही नक्सली बने। इस लिए हमने संगठन को छोड़ने का निर्णय लिया और सालभर पहले पुलिस के सामने हथियार डाल दिए। हमने स्कूल बनाने की मांग की। स्वकृति मिलने के बाद खुद ही अपने हाथों से भवन बना दिया। अब इसी स्कूल में बच्चे पढ़ाई करेंगे।

दंतेवाड़ा में नक्सलियों ने ढहाए 10 से ज्यादा स्कूल

जिले में सिर्फ मासापारा ही नहीं बल्कि पोटाली, बुरगुम, नहाड़ी सहित अन्य इलाकों में भी नक्सलियों ने साल 2004 से 2014 के बीच 10 से ज्यादा स्कूल, आश्रम भवनों को ढहाया था। अब उन इलाकों के ग्रामीण भी दोबारा स्कूल- आश्रम बनाने की मांग कर रहे हैं। कलेक्टर दीपक सोनी ने कहा कि अंदरूनी इलाकों में जहां भी स्कूल-आश्रम नक्सलियों ने तोड़े थे उसे भी दोबारा बनाने की पूरी कोशिश होगी। SP डॉ अभिषेक पल्लव ने कहा कि भवन को बनाने जहां जरूरत होगी सुरक्षा देंगे।

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