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बिना लाइसेंस कोरोना का इलाज, मरीजों से जबरन वसूली, पटना में बेनकाब हुए सांस के सौदागर

कोरोना काल में मरीजों की हर सांस का सौदा हो रहा है।  निजी अस्पतालों में मची लूट के साथ ऑक्सीजन सिलेंडर को लेकर भी बड़ा खुलासा किया गया था। इस खुलासे के बाद प्रशासन जागा और छापेमारी होने लगी। DM के आदेश पर हुई छापेमारी में ऑक्सीजन की ब्लैक मार्केटिंग के साथ अस्पतालों की अवैध वसूली की पोल खुली है। ऐसा भी खुलासा हुआ कि जिस अस्पताल को प्रशासन ने अनुमति भी नहीं दी थी वह भी कोरोना का इलाज कर रहा है।

ऐसे हो रहा था सांस का सौदा

पटना के DM डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने अस्पतालों में मनमानी और ऑक्सीजन की कालाबाजारी का खुलासा करने के लिए एक टीम बनाई थी। इस टीम को अलग अलग क्षेत्राें में लगाया था। टीम ने ऑक्सीजन सिलेंडर अवैध रूप से खरीद बिक्री और जमाखोरी का बड़ा खुलासा किया। शहर के पॉस इलाके में यह धंधा चल रहा था। SK पुरी थाना क्षेत्र में चल रहे इस धंधे का खुलासा करते हुए प्रशासन ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आनंदपुरी इलाके में किराए के मकान में एक न्यूज चैनल के दफ्तर से प्रशासन ने ऑक्सीजन के 60 सिलेंडर बरामद किए।

10 हजार में बेच रहे थे छोटा सिलेंडर

प्रशासन की टीम जब आनंदपुरी में न्यूज चैनल के दफ्तर पहुंची तो वहां एक ग्राहक मिला, जिसने बताया कि एक छोटा 5 लीटर का सिलेंडर 10 हजार में बिक रहा है। पड़ोस के लोगों ने भी बताया कि रातभर सिलेंडर ढोया गया है। प्रशासन ने रितेश शर्मा नाम के युवक को हिरासत में लिया है। यह कार्यालय कटिहार जिला के रहने वाले ललित अग्रवाल के मकान में किराए पर चल रहा था। प्रशासन ने तत्काल आपदा प्रबंधन अधिनियम, IPC ,oa एक्सप्लोसिव एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।

बिना लाइसेंस कर रहे थे इलाज

प्रशासन ने एक और बड़ा चौंकाने वाला खुलासा किया है। पटना के कंकड़बाग में स्थिति ऑक्सीजन हॉस्पिटल कोरोना के इलाज के लिए रजिस्टर्ड नहीं था इसके बाद भी वह इलाज कर रहा था। बाढ़ की रहने वाली कुमारी मंजू ने इसकी शिकायत प्रशासन से की थी जिसपर टीम ने छापेमारी की। मंजू को यह नहीं पता था कि अस्पताल कोरोना के लिए पंजीकृत नहीं है। उससे अधिक पैसा वसूला जा रहा था और उसने इसी से संबंधित शिकायत की थी। इस शिकायत के बाद जांच में पाया गया कि ऑक्सीजन हॉस्पिटल पंजीकृत ही नहीं है। प्रशासन ने अस्पताल से अभिलेखों की मांग करते हुए नोटिस जारी किया है।

राजेश्वर हॉस्पिटल में छापेमारी

प्रशासन की टीम ने राजेश्वर हॉस्पिटल में भी छापेमारी की है। यहां इलाज करा रही कनिका कौशिक ने रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर शिकायत की थी। हॉस्पिटल में इस इंजेक्शन के नाम पर धाेखा देने का आरोप लगाया गया था। प्रशासन ने हॉस्पिटल प्रबंधन से पंजीकरण के साथ अभिलेखों की मांग की है। कंकड़बाग के ही पालिका विनायक हॉस्पिटल में भी सरकार द्वारा निर्धारित राशि से अधिक पैसा वसूलने की शिकायती पटना के रोहित कुमार ने की थी, जांच में प्रबंधन से पंजीकरण के साथ अन्य अभिलेखों की मांग की गई है।

बिना पंजीकरण के कोरोना का इलाज

भागवत नगर में ओम पाटलिपुत्र इमरजेंसी हॉस्पिटल में भी बिना पंजीकरण के इलाज चल रहा था। अस्पताल के खिलाफ शिकायत थी कि बिना पंजीकरण के ही कोरोना का इलाज किया जा रहा है और ऑक्सीजन के नाम पर मरीजों से अधिक पैसे की डिमांड की जा रही है। ऑक्सीजन के नाम पर ही मरीजों को डिस्चार्ज करने का काम किया जा रहा है। इसी तरह पालिका विनायक हॉस्पिटल में सरकार द्वारा निर्धारित एक दिन की राशि 13 हजार रुपए के बदले 15 हजार रुपए वसूलने का मामला सामने आया है। संक्रमित के परिजनों ने 46570 रुपए 14 दिन का लिया गया है। इस मामले में जांच में पाया गया कि हर दिन 2000 रुपए अधिक वसूले गए हैं। DM का कहना है कि ऐसे मामलों की जांच चल रही है। रिपोर्ट आने के बाद हॉस्पिटल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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