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बिहार: 12 करोड़ का बालू रोजाना लूटती हैं 3000 नावें, न पुलिस देखती है और न सरकार रोकती है!

एक जून से एनजीटी की रोक के बावजूद सोन नदी में बालू का अवैध खनन जारी है। हर दिन 3 हजार से अधिक नाव से करोड़ों के बालू की लूट हो रही है। इससे सवाल उठता है कि आखिर किसके संरक्षण और शह पर बालू माफिया ऐसा दुस्साहस कर रहे हैं। मीडिया  की टीम जब मौके पर पहुंची तो अंधेरगर्दी के कई नजारे कैमरे में कैद हुए।

यह न केवल राज्य के प्राकृतिक संसाधन पर डाका है, बल्कि सरकार को भी रोज 10 से 12 करोड़ों का राजस्व नुकसान हो रहा है। लेकिन पुलिस-प्रशासन कार्रवाई नहीं कर रहा है। वहीं जिला खनन पदाधिकारी राजेश कुशवाहा बोले-कई बार कार्रवाई की गई है। इस बार विशेष टीम बनाएंगे।

बड़ा सवाल : क्या नेताओं-अफसरों के संरक्षण के बिना यह संभव?
एक फीट बालू के सरकारी चालान की कीमत करीब 800 रु. है। एक 10 चक्का ट्रक पर 5 फीट बालू आता है, जिसकी अनुमानित कीमत 4000 रु. हुई। औसतन एक बड़ी नाव पर 10 ट्रक बालू आता है तो हर नाव से 40 हजार के राजस्व की चोरी हो रही।

इस तरह अगर रोज 3000 नाव से अवैध खनन कर बालू की ढुलाई की जा रही है, तो कुल 12 करोड़ के राजस्व का रोज चूना लगाया जा रहा है। पटना, भोजपुर एवं सारण तीन जिलों में खनन करने वाली कंपनी के एमडी अशोक कुमार भी बालू लूट के इस गणित को सही मानते हैं। शेष पेज-11 पर

पाये के पास भी लगातार खुदाई, पुल को खतरा
अब माफियाओं ने अब्दुल बारी पुल के नीचे से भी बालू निकालना शुरू कर दिया है। जबकि, पुल की सुरक्षा को लेकर डीएम ने इसे प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर रखा है। इससे अंग्रेजों के जमाने के इस पुल को खतरा उत्पन्न हो गया है। अवैध खनन को लेकर रेलवे कई बार सरकार को लिखा पर कार्रवाई नहीं हुई।

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