Saturday , November 27 2021
Home / ऑफबीट / बेटे की मौत का न मातम मनाया, न ही पोंछे बीवी के आंसू, सिपाही ने फ़र्ज़ के आगे सब किया कुर्बान !

बेटे की मौत का न मातम मनाया, न ही पोंछे बीवी के आंसू, सिपाही ने फ़र्ज़ के आगे सब किया कुर्बान !

एक ऐसे वक्त में जब देश और दुनिया कोरोना की महामारी से खुद को बचाने के लिए जूझ रही है तब हिमाचल प्रदेश पुलिस के इस सिपाही ने बेटे की मौत का गम मनाना भी मंजूर नहीं किया। उन्होंने ये फैसला इसलिए लिया क्योंकि उनको लगा कि वो मां और पत्नी को ढांढ़स बंधाएंगे तो ऐसा न हो कि वे भी कोरोना संक्रमित हो जाएं। या फिर जाने-अनजाने इन भावुक पलों में हुई एक भूल के चलते कहीं कोई और नया कोरोना पीड़ित दुनिया को न मिल जाए।

हिमाचल प्रदेश पुलिस के इस रण-बांकुरे का नाम है अर्जुन सिंह जो 2009 बैच के सिपाही हैं। उनकी पत्नी सुमन भी हिमाचल प्रदेश पुलिस में 2010 बैच की सिपाही है। अर्जुन करीब डेढ़ साल से नाहन जिला सिरमौर ट्रैफिक में तैनात हैं। नाहन के लोग अक्सर अर्जुन को ट्रैफिक इंतजाम रोड पर संभालते हुए देखते हैं। अब तक जो अर्जुन हिमाचल प्रदेश पुलिस के सिपाही और नाहन में ट्रैफिक पुलिस कर्मी भर थे। वे ही अर्जुन कोरोना जैसी महामारी में सूबे की पुलिस के सिरमौर और जनता के चहेते सिपाही बन चुके हैं।

उनकी पत्नी सुमन की पोस्टिंग शिलाई थाने में है। बीते गुरुवार को सुमन को प्रसव पीड़ा के चलते अस्पताल में दाखिल होना पड़ा था। जब सुमन अस्पताल पहुंची उस वक्त अर्जुन की ड्यूटी एक कोरोना संक्रमित तबलीगी (पॉजिटिव) को नाहन से बद्दी ले जाने में लग गयी। बीच रास्ते में उनको पता चला कि पत्नी ने जिस शिशु को जन्म दिया, उसकी मृत्यु हो गयी।

ऐसे में अर्जुन ने खुद ही तय किया कि, वो यह बात फिलहाल किसी से नहीं कहेगा और न ही नवजात की मौत का गम मनायेगा। अर्जुन ने इसकी वजह बताई, “दुख की इस घड़ी में टूटन तो बहुत मसहूस हुई। फिर लगा कोरोना पॉजिटिव तबलीगी को साथ लेकर जा रहा हूं। अगर मैं टूटकर बेटे की मौत का दुख मनाने लगा तो मां और पत्नी भी टूट जायेंगी।”

अर्जुन ने आगे कहा, “मैं इंतजाम करके किसी तरह से घर पहुंचा। नवजात बेटे के शव पर पिता होने की रस्म निभाते हुए मिट्टी (जिसे जीवित तो देखा ही नहीं था) डाली। उसके बाद मैं मां से भी नहीं मिला। पत्नी से बहुत दूर से मिला। उसे दिलासा देना मुनासिब नहीं लगा। इससे वह टूट जाती। अगर वो टूटती तो उसे ढांढस बंधाने मुझे उसके करीब पहुंचना होता। लिहाजा मैं जिन कदमों से पत्नी के सामने गया, उन्हीं से जल्दी से वापस लौट गया।”

अर्जुन के पिता की बीते साल मृत्यु हो चुकी है। घर में बूढ़ी मां अकेली रहती हैं। उन्होंने भी पोते का मुंह नहीं देखा। बकौल अर्जुन, “अगर मैं मां के सामने जाता तो वे खुद को नहीं संभाल पातीं। और मैं खुद भी शायद मां के सामने हार जाता। लिहाजा मैंने मां से न मिलने में ही अपनी सबकी और समाज की भलाई समझी। ईश्वर का शुक्र है कि पॉजिटिव तबलीगी को छोड़कर आने के बाद भी मैं स्वस्थ हूं। मगर कोरोना का कोई भरोसा नहीं होता। ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग मेंटन करना जरुरी था।”

गुरुवार को इस बारे में हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक सीताराम मरडी से बात की। उन्होंने कहा, “अर्जुन का पद महकमे में सिपाही जरुर है। उसने मगर महकमे का सिर बहुत ऊंचा कर दिया है। यह मौका सबके हाथ वर्दी की नौकरी में नहीं आता। इतनी कम उम्र में ही अर्जुन की वर्दी की नौकरी में जो स्वर्णिम और परीक्षा की घड़ियां आईं, उसने उसका भरपूर जायज इस्तेमाल किया। रिजल्ट जमाने के सामने है। मैंने अर्जुन को नकद राशि से पुरस्कृत करने की घोषणा की है। साथ ही हिमाचल प्रदेश पुलिस में पुलिस महानिदेशक द्वारा दिया जाने वाला ‘क्लास-वन’ सर्टिफिकेट भी मैं अर्जुन को देकर सम्मानित करुंगा।”

 

loading...

Check Also

पेट्रोल-डीजल की कमी के बाद अब इस देश में अंडरवियर्स और पजामे की भारी किल्लत

लंदन (ईएमएस)।आपकों जानकार हैरानी होगी कि यूके में इन दिनों अंडरवियर्स और पजामे की भारी ...