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बेटे को पहली बार भगवा वस्त्र में देख भावुक हो गए थे पिता, योगी भी खूब बहाए थे आंसू

यूपी के मुख्यमंत्री और गोरक्षा पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ के पिता आनंद सिंह बिष्ट का दिल्ली के एम्स अस्पताल में सोमवार को निधन हो गया। आनंद सिंह ऐसे पिता थे, जिन्होंने अपने होनहार बेटे का पढ़ाई के दौरान स्कूल छोड़ना देखा, महीनों तक पुत्र विरह को झेला। उसी बेटे को सन्त होते देखा, गोरखनाथ मन्दिर का महंत होते भी देखा, देश की लोकसभा में पांच बार सांसद होने के साथ देश के सबसे बड़े सूबे का मुखिया बनते भी अपने आंखों के सामने देख लिया। सोमवार को सीएम योगी के पिता के निधन के बाद जहां तमाम लोग उन्हें श्रंद्धांजलि दे रहे हैं। वहीं गोरखनाथ मन्दिर में भी सन्त समाज गम में हैं। आज लोग उस पुराने दिन को याद कर रहे हैं जब आनंद सिंह बिष्ट ने अपने बेटे को भगवा वेश में पहली बार देखा था। ये स्थान था गोरखनाथ मन्दिर।

दरअसल, बीएससी की पढ़ाई के दौरान ही घर वालों को बिना बताए ही अजय सिंह बिष्ट यानी सीएम योगी अपना घर बार छोड़कर पौड़ी के गांव पंचूर से निकल गए थे। बेटे का कहीं पता न लग पाने से पिता परेशान रहते। तकरीबन छह महीने के बाद आनंद सिंह बिष्ट की बड़ी बेटी पुष्पा ने किसी अखबार में पढ़ा कि गोरखपुर के सांसद और गोरक्षपीठाधीश्वर ने दो महीने पहले अपने उत्तराधिकारी के नाम की घोषणा कर दी है। वह योगी आदित्यनाथ हैं और पौड़ी के रहने वाले हैं। पुष्पा को आशंका हुई की कहीं ये उनका अपना भाई अजय तो नहीं?

भगवा वस्त्र में देख भावुक हुए थे सीएम योगी के पिता

दिल्ली में रहने वाली पुष्पा ने पिता को पत्र लिखा की आप गोरखनाथ मंदिर जाएं वहां शायद कुछ पता लग जाये। मंदिर से जुड़े लोग बताते हैं की जानकारी के बाद सीएम योगी के पिता गोरखपुर के लिए चल दिए। गोरखपुर पहुंचते ही वह सीधे गोरखनाथ मंदिर पहुंच गए। वहां पहुंचते ही उन्होंने देखा कि भगवा धारण किए सिर मुड़ाए एक युवा संन्यासी फर्श की सफाई का मुआयना कर रहा था। वह जब उनके पास पहुंचे तो हकीकत उनके सामने आ गई। वह उनका अपना बेटा था। अपने पुत्र को सन्यासी के रूप में देखकर वह अवाक रह गए। उन्होंने तो इसकी कल्पना भी नहीं की थी। उनके अंदर का पिता जाग उठा। उन्होंने कहा कि बेटा यह क्या हाल बना रखा है, यहां से तुरंत चलो। बेटे को जोगिया वेश में देख पिता की आंखे भरभरा गईं। सन्त कहते हैं योगी आदित्यनाथ भी पिता से लिपट कर अपने भावनाओ को काबू न कर सके। इनके आंखों से भी आंसुओ की धार फूट पड़ी।

मिलने के बाद योगी अपने पिता को मंदिर स्थित कार्यालय ले गए। उस समय महंत अवैद्यनाथ कहीं बाहर थे। फोन के माध्यम से अवैद्यनाथ जी को बताया गया कि योगी जी के पिता आए हैं। पीठाधीश्वर ने उनके पिता से बात की और कहा, ‘आप के पास चार पुत्र हैं, उनमें से एक को समाज सेवा के लिए नहीं दे सकते हैं।’ उनके पास कोई जवाब नहीं था। उस समय उनके सामने उनका बेटा नहीं, योगी आदित्यनाथ दिखाई दे रहे थे। इसके बाद योगी के पिता कुछ समय मंदिर में व्यतीत करने के बाद पंचूर लौट गए।

1998 से लेकर 2014 तक योगी आदित्यनाथ गोरखपुर संसदीय सीट से पांच बार सांसद चुने गए। 2017 में यूपी में ऐतिहासिक जीत के बाद वो प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। देश भर के चर्चित और चहेते मुख्यमंत्रियो में भी उनका नाम अक्सर आता रहता है। सोमवार को सीएम योगी आदित्यनाथ के पिता ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

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