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ताइवान को प्रोपेगेंडा पोस्टर्स और वीडियो से धमकाई चीनी सेना, बोली- ‘युद्ध के लिए तैयार’

पेइचिंग :  चीनी सेना ने ताइवान के खिलाफ प्रॉपगैंडा वॉर छेड़ते हुए धमकियों भरे कई पोस्टर और वीडियो जारी किए हैं। इनमें ताइवान को चीनी भाषा में ‘युद्ध के लिए तैयार’ रहने की धमकी दी है। इतना ही नहीं, चीनी सैनिकों को हथियारों और जंगी साजोसामान के साथ दिखाया गया है। कई पोस्टरों में मिसाइल, टैंक जैसे हथियारों को लाइव फायर करते हुए भी दिखाया गया है। इन तस्वीरों और वीडियो को पीएलए 80वीं ग्रुप आर्मी के प्रॉपगैंडा विंग ने जारी किया है।

इन पोस्टरों और वीडियोज को चीन की सोशल मीडिया वीबो और वीचैट पर काफी बड़ी संख्या में शेयर किया जा रहा है। जिसमें ताइवान को युद्ध के लिए कड़ी चेतावनी दी गई है। ताइवान के नजदीक स्थित चीन के शानदोंग प्रांत में तैनात 80वीं ग्रुप आर्मी के जवानों को भी एक ब्रिगेड शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेते दिखाया गया है। इन तस्वीरों में वर्दीधारी चीनी सैनिक मिसाइल, रॉकेट और टैंकों के साथ दिखाई दे रहे हैं।

इस प्रॉपगैंडा तस्वीरों के अनुसार, चीनी सेना के जवानों ने शपथग्रहण समारोह में ‘सभी आज्ञाओं का पालन करने’ और ‘किसी भी चुनौती से नहीं डरने’ की शपथ ली। बताया गया कि सैनिकों ने कहा कि वे मौत के डर के बिना सम्मान से लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इन पोस्टरों को 80वीं ग्रुप आर्मी पोलिटिकल वर्क्स डिपार्टमेंट ने तैयार किया था। यह डिपार्टमेंट ताइवान से खुफिया सूचनाओं को प्राप्त करने और वहां के लोगों के मन में चीन के प्रति आदर जगाने के लिए काम करता है।

इसी डिपार्टमेंट के जरिए चीनी सेना अपने विरोधी देशों के बॉर्डर पर रेडियो स्टेशन चलवाती है। इसके जरिए वह दुश्मन देशों की संस्कृति में घुसपैठ करने और वहां के लोगों में अपने प्रति नकारात्मकता खत्म करने की कोशिश करती है। रेडियो के जरिए चीनी सेना कम्युनिस्ट विचारधारा का प्रचार भी करती है। चीन ने ऐसे ही पांच रेडियो स्टेशन फुजियान प्रांत में स्थापित किया हुआ है, जो ताइवान में लोगों को चीन के प्रति ईमानदार बनाने का काम करती है।

चीनी सेना ने जो वीडियो जारी किया है, उसमें पैदल सेना, टैंक और रॉकेट के धमाकों के फुटेज भी शामिल हैं। इन वीडियोज को मंडारिन और दक्षिणी मिन बोली में जारी किया गया है। यह दोनों ही ताइवान में काफी व्यापक रूप से बोली जाती हैं। ताइवान कभी भी चीन के झंडे के नीचे शासित नहीं रहा है। इसके बावजूद चीन हमेशा से ही इस देश को अपना हिस्सा बताता रहा है।

 

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