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भारतीय हॉकी टीम ने Olympics में रचा इतिहास, नवीन पटनायक को जाता है पूरा क्रेडिट

2015, World Hockey League Finals (FIH ), भारत और द नीदरलैण्ड्स के बीच कांस्य पदक के लिए मुकाबला होना था। किसी को आशा नहीं थी कि भारत कुछ कर पाएगा, लेकिन भारत ने सबको चौंकाते हुए इतिहास रचा और अपने से कहीं गुना शक्तिशाली द नीदरलैण्ड्स को सडन डेथ में 3-2 से हराते हुए किसी भी FIH अधिकृत टूर्नामेंट में 32 वर्ष बाद कांस्य पदक जीता। इसने एक ऐसे ऐतिहासिक यात्रा की नींव रखी, जिसका सुखद परिणाम आज 5 अगस्त 2021 को टोक्यो ओलंपिक में देखने को मिला।

प्रारंभ में 1-3 से पिछड़ रही भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने जबरदस्त वापसी करते हुए जर्मनी को टोक्यो ओलंपिक में न केवल 5-4 से हराया, बल्कि 41 वर्ष बाद ओलंपिक हॉकी में पदक का सूखा भी खत्म किया। भारतीय टीम 20 वर्ष में पहली एशियाई टीम बनी है, जिसने पुरुष हॉकी में ओलंपिक पदक प्राप्त किया हो।

रोचक बात तो यह है कि टोक्यो वही जगह है जहां कभी भारत ने दशकों पहले इतिहास रचा था। 1964 में जब हॉकी एस्ट्रो टर्फ पर नहीं, बल्कि घास पर खेली जाती थी, तब टोक्यो ओलंपिक में एक भीषण मुकाबले में भारत ने पाकिस्तान को 1-0 से परास्त न केवल अपना सातवाँ ओलंपिक स्वर्ण पदक जीता था, बल्कि अपना खोया हुआ सम्मान भी प्राप्त किया था। ये इसलिए क्योंकि रोम ओलंपिक में पाकिस्तान ने 1928 से चला आ रहा भारत का विजय रथ रोक दिया था। इस बार भी पाकिस्तान ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी, और टोक्यो ओलंपिक का फाइनल मैच कम, युद्ध अधिक बन चुका था।

परंतु रोम में हार के साक्षी गोलकीपर शंकर लक्ष्मण शेखावत ने सौगंध ली थी कि वे रोम की गलती टोक्यो में नहीं दोहराएंगे, और उन्होंने अपने सौगंध ने अनुरूप एक भी पाकिस्तानी को गोल के पास फटकने तक नहीं दिया। आखिरकार भारत को दूसरे हाफ में एक पेनाल्टी स्ट्रोक मिला, जिसे भारतीय सेना के सिपाही मोहिन्दर लाल ने बड़ी चपलता से गोल में परिवर्तित कर दिया।

ठीक इसी प्रकार से बीजिंग ओलंपिक में क्वालिफ़ाई न कर पाने और लंदन ओलंपिक में अंतिम स्थान पर रहने वाली भारतीय हॉकी टीम ने कसम खाई थी कि कुछ भी हो जाए, परंतु वे ओलंपिक से खाली हाथ नहीं लौटेंगे। इसी बीच 2014 में हॉकी के खेलों में कुछ अहम बदलाव हुए – जैसे नीला टर्फ, चार क्वार्टर, पेनाल्टी शूट आउट इत्यादि।

बीजू जनता दल के नव निर्वाचित सदस्य और पूर्व हॉकी खिलाड़ी दिलीप टिर्की ने अपने पार्टी प्रमुख और ओडिश के मुख्यमंत्री, नवीन पटनायक का ध्यान आकृष्ट करवाया। आम तौर पर राजनेता खेलों को अधिक बढ़ावा देते हुए नहीं दिखाई देते, लेकिन नवीन पटनायक वैसे नेता नहीं हैं। उन्होंने न केवल इन नियमों में बदलाव का स्वागत किया, बल्कि ओडिश को एक हॉकी हब में भी परिवर्तित किया।

इसलिए आज जब भारत ने 41 वर्ष बाद ओलंपिक हॉकी में पदक का सूखा खत्म किया है, तो इसका श्रेय काफी हद तक नवीन पटनायक को भी जाता है, जिन्होंने ओडिशा को ‘हॉकी हब’ में परिवर्तित किया। इसीलिए उनका नाम ट्विटर पर ट्रेंडिंग में भी दिखाई दे रहा है।

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