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महाराष्ट्र की बिसात: कितना पुराना है राणे और ठाकरे के बीच टकराव?

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को थप्पड़ मारने संबंधी केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के बयान ने राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। उनके खिलाफ कम से कम तीन FIR दर्ज की गई हैं और उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया गया है। हालांकि राणे और उद्धव के बीच ये टकराव नया नहीं है और इसकी जड़ें काफी पुरानी हैं। चलिए आपको राणे और उद्धव के बीच टकराव के इतिहास के बारे में बताते हैं।

पहले शिवसेना में ही थे राणे, उद्धव के आने से टकराव शुरू हुआ
आज उद्धव ठाकरे को थप्पड़ मारने की बात कह रहे नारायण राणे ने कभी अपनी राजनीति की शुरूआत शिवसेना से ही की थी। 1990 में में वो पहली बार शिवसेना की टिकट पर विधायक चुने गए और सफलता की सीढ़ियां चढ़ते हुए 1999 में आठ महीने के लिए मुख्यमंत्री भी बने। हालांकि उद्धव के पार्टी में आने के साथ ही राणे को अपनी प्रगति के लिए खतरा नजर आने लगा और यहीं से इन दोनों के बीच टकराव शुरू हुआ।

उद्धव के नेतृत्व के विरोध के कारण पार्टी से निकाले गए थे राणे
बाल ठाकरे ने राणे को निकाला था पार्टी से बाहर (तस्वीर- इंडियन एक्सप्रेस)
2003 में महाबलेश्वर में हुए सम्मेलन में जब उद्धव ठाकरे को शिवसेना का कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया तो राणे ने इसका विरोध किया और फिर उन्होंने उद्धव के नेतृत्व का भी चुनौती दी। राणे ने पार्टी पर टिकट और पद बेचने का आरोप भी लगाया जिसके बाद 2005 में बाल ठाकरे ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए शिवसेना से बाहर निकाल दिया। इसके बाद से ही राणे उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते रहे हैं।

राणे ने की थी शिवसेना को तोड़ने की कोशिश
शिवसेना से बाहर निकाले जाने के बाद राणे ने 40 विधायकों को अपने साथ लेकर पार्टी को तोड़ने की कोशिश भी की, हालांकि वो इसमें नाकामयाब रहे। अंत में लगभग एक दर्जन विधायकों के साथ वे कांग्रेस में शामिल हो गए। 2017 में उन्होंने कांग्रेस भी छोड़ दी और महाराष्ट्र स्वाभिमान पक्ष नामक अपनी अलग पार्टी बना ली। इसके बाद पहले उन्होंने भाजपा को समर्थन दिया और फिर 2019 में अपनी पार्टी का भाजपा में विलय ही कर दिया।

अभी क्यों गिरफ्तार किए गए राणे?
मौजूदा विवाद का कारण रायगढ़ में दिया गया राणे का एक बयान बना है जिसमें उन्होंने दावा किया था कि उद्धव ठाकरे 15 अगस्त के अपने भाषण के दौरान आजादी के साल भूल गए थे। उन्होंने कहा था, “यह शर्मनाक है कि मुख्यमंत्री को यह नहीं पता कि आजादी को कितने साल हुए हैं। भाषण के दौरान वह पीछे मुड़ कर इस बारे में पूछताछ करते नजर आए थे। अगर मैं वहां होता तो उन्हें एक जोरदार थप्पड़ मारता।”

राणे को आगे करने के पीछे क्या है भाजपा की रणनीति?
भाजपा राणे की मदद से शिवसेना को बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) की सत्ता से बेदखल करना चाहती है। शिवसेना 1970 के दशक से ही BMC की सत्ता पर काबिज है और 1990 में मात्र कुछ समय के लिए सत्ता से बाहर रही थी। BMC के चुनाव अगले साल होने हैं। इसके अलावा ठाणे और नवी मुंबई जैसे कई निगमों के चुनाव भी होंगे और भाजपा का लक्ष्य इनके लिए माहौल बनाना भी है।

राणे के बयानों से भाजपा को कितना फायदा, कितना नुकसान?
उद्धव ठाकरे के खिलाफ राणे के बयानों से भाजपा को फायदा और नुकसान दोनों हैं। फायदों की बात करें तो ये BMC चुनाव में भाजपा को कोंकण क्षेत्र से आने वाली आबादी के इलाकों में वोट हासिल करने में मदद करेंगे। नुकसान की बात करें तो उद्धव के खिलाफ विवादित शब्दों का प्रयोग भाजपा के खिलाफ जा सकता है क्योंकि उद्धव की शांत और सौम्य छवि है जो लोगों को पसंद भी है।

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