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महासभा में प्रदेश सचिव सुरेंद्र कुशवाहा की प्रदेश महासचिव पद पर नियुक्ति

Lucknow : महासभा के प्रांतीय संगठन में प्रदेश सचिव सुरेंद्र कुशवाहा को प्रदेश महासचिव के पद पर नियुक्त किया जाता है, क्योंकि वर्तमान प्रदेश महासचिव इंद्रदेव मौर्य को राष्ट्रीय कार्यकारिणी द्वारा राष्ट्रीय सचिव नियुक्त कर दिया गया है :

  1. सामाजिक न्याय समिति 2001 सिफारिशों को लागू करने के लिए तत्कालीन सरकार के समय दिया गया था। आज भी वही सरकार है। 15 वर्षों तक मैं वहां पर यह बहाना रहा कि इन वर्षों में दूसरी सरकारें इस रिपोर्ट की सिफारिशों के पक्ष में नहीं हैं परंतु अब जब पुनः 4 वर्षों से प्रदेश और केंद्र में भाजपा सरकार है तब भी इन सिफारिशों को कभी राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग का गठन कर राज्य के पिछड़े आयोग की शक्तियों को निष्क्रिय कर और कभी कोर्ट के स्टे का हवाला देते हुए ठंडे बस्ते में डाला गया है।
    सभी सरकारों से जो इस सामाजिक न्याय की रिपोर्ट को फुटबॉल की तरह सिर्फ एक दूसरे को पास कर रही हैं। उनको इस रिपोर्ट को लागू करने वाले बिल का प्रस्ताव लाए।
  2. वर्तमान केंद्रीय सरकार ने हाल में ही केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार किया और ओबीसी के 27 मंत्री दिए। क्या 14% का समाज जो कुशवाहा मौर्य शाक्य और सैनी जाति से जाना जाता है उसके लिए उनको कोई जगह नहीं दी। सरकार की इस कार्यशैली पर समाज अपना रोष प्रकट करता है।
  3. 26 दिसंबर 2016 को उत्तर प्रदेश शासन के पिछड़े वर्ग कल्याण विभाग से अधिसूचना के माध्यम से उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या-4 सन 1994 की धारा-13 के अधीन शक्ति का उपयोग करके अनुसूची 1 में क्रमांक 11 में ताकि कुशवाहा शाक्य कोइरी सैनी मुराव व बुराई मौर्य को प्रतिस्थापित किया जिसका आदेश कार्मिक विभाग से जारी नहीं किया गया है। वर्तमान उत्तर प्रदेश सरकार अभी पुरानी सूची जिसमें यह जातियां भिन्न-भिन्न क्रमांक पर हैं उसका उपयोग अपने सरकारी विभागों में कर रही है, इसके पीछे क्या मंशा है? समाज की अप्रत्यक्ष संगठन का प्रथम दृष्टया हनन हो रहा है।
  4. NEET परीक्षा में ओबीसी का आरक्षण समाप्त। केंद्रीय सरकार ने आगे होने वाली नीट परीक्षाओं में से ओबीसी का आरक्षण समाप्त कर दिया है, जिससे लगभग 11000 सीट ओबीसी की समाप्त हो थी। ओबीसी समाज के प्रतिभाशाली छात्रों हेतु डॉक्टर बनने की राह में बाधा पड़ गई है।
    महासभा मांग करती है कि जो सजातीय एवं पिछड़े वर्ग के सांसद व मंत्री जो भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकारों में शामिल हैं उन्हें आवाज उठाना चाहिए अथवा परीक्षणों के हित में सामूहिक इस्तीफा दे देना चाहिए। समाज के कद्दावर नेता क्या फर्जी आवाज बुलंद कर जाती को भ्रमित करते रहेंगे और पिछड़ों के हित विरोधी दलों को अपनी जाति का वोट ट्रांसफर करते रहेंगे।
  5. वर्तमान पिछड़ा वर्ग कल्याण के अंतर्गत पिछड़े वर्ग के छात्रों की छात्रवृत्ति योजना जो मात्र 1375 करोड़ है उसे बढ़ाकर 4 गुना किया जाए।
  6. विधानसभा चुनाव 2022 में जो राजनीतिक दल इस 30000000 के समाज को राजनीति में हिस्सा देने को उनके जनसंख्या के अनुपात में तैयार हैं, उनको महासभा अपने कार्यालय आमंत्रित करती है, और दल को आगामी चुनाव हेतु इस समाज के प्रत्याशी की घोषणा करनी होगी।
    समाज यह देख रहा है और भली-भांति समझ भी रहा है की मजबूत पक्ष के साथ साथ सत्ता में मजबूत विपक्ष भी होना चाहिए, यदि समाज के ऊपर वर्णित सभी बिंदुओं का चिंतन वर्तमान सरकार नहीं करती है तो हमें अपना गारंटर कोई और ढूंढना पड़ेगा। इसको केंद्र और राज्य की सरकार भली-भांति समझ ले और चिंतन करें।
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