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मांझी-सहनी के 6 बयानों से बिहार में सियासी तूफान के संकेत, दोनों का मन बदला तो RJD की सत्ता

पटना : RJD (राष्ट्रीय जनता दल) सुप्रीमो लालू यादव के जमानत पर बाहर आने और NDA के अहम सहयोगी हम सुप्रीमो जीतन राम मांझी व VIP अध्यक्ष मुकेश सहनी के हाल के बयानों ने बिहार की सियासत में गरमाहट ला दी है। NDA जहां अपने को मजबूत होने का दावा कर रही है। वहीं, मांझी और सहनी के हाल में दिए गए बयान विपक्ष को एक मौके की तरह लग रहे हैं।

पक्ष-विपक्ष के दावों के बीच अब नीतीश सरकार की स्थिरता पर सवाल खड़े होने लगे हैं। राजनीतिक जानकार बिहार में सियासी उलटफेर होने की बात कह रहे हैं। मीडिया  से जानिए, वो कौन सी बातें हैं जिससे बिहार का सियासी पारा इस समय चढ़ गया है।

जीतन राम मांझी के तीन बयान से विपक्ष गदगद

  • 24 मई को जीतन राम मांझी ने वैक्सीन सर्टिफिकेट पर PM नरेंद्र मोदी की तस्वीर पर सवाल खड़ा कर दिया। ऐतराज जताते हुए सोशल मीडिया पर लिखा था कि अगर वैक्सीन सर्टिफिकेट पर तस्वीर है तो कोरोना से होने वाली मौत के डेथ सर्टिफिकेट पर भी प्रधानमंत्री की तस्वीर होनी चाहिए। हालांकि, बाद में मांझी ने इस ट्वीट को हटा दिया था।
  • कोरोना महामारी की वजह से पंचायत चुनाव नहीं हो सके हैं। 28 मई को मांझी ने पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकार को आगे बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा था कि पंचायत प्रतिनिधियों के कार्यकाल को 6 महीना बढ़ा दिया जाए।
  • 1 जून को जीतन राम मांझी ने लालू यादव और राबड़ी देवी को शादी की सालगिरह की बधाई दी। इससे भी सियासी गलियारों में गर्माहट बढ़ गई थी। लोग तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं।

मुकेश सहनी भी समय-समय पर सरकार पर साध चुके हैं निशाना

  • 29 मई को मुकेश सहनी ने भी पंचायत प्रतिनिधियों के हक में सरकार की नीतियों का विरोध किया। सहनी ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ना चाहिए। अधिकारियों को इनके अधिकार नहीं देना चाहिए।
  • बिहार सरकार में मंत्री मुकेश सहनी ने 11 मई को पप्पू यादव की गिरफ्तारी का भी विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि जनता की सेवा में लगे पप्पू यादव को गिरफ्तार करना सरकार का अंसवेदनशील रवैया है।
  • 16 मार्च को बिहार विधान परिषद में राज्‍यपाल कोटे की 12 सीटों पर शपथ ग्रहण के दिन मुकेश सहनी अचानक अपनी पार्टी के सभी विधायकों के साथ राज्‍यपाल से मिलने चले गए और हल्‍ला मच गया कि वे सरकार से समर्थन वापस ले सकते हैं। उस दिन मुकेश सहनी ने कहा था कि ऐसी कोई बात नहीं है, लेकिन अगर जरूरत हुई तो वे फैसला लेने में देरी भी नहीं करेंगे।
अब बिहार का सियासी गणित समझिए

माना जा रहा है लालू यादव जल्द बिहार आ सकते हैं। ऐसे में वो पटना आने पर तेजस्वी को सत्ता में लाना चाहेंगे। इसके लिए राजद सुप्रीमो की पूरी नजर 5 मुस्लिम विधायक पर रहेगी, जो AIMIM से चुने गए हैं। AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान कभी RJD के तेज तर्रार विधायक हुआ करते थे। लालू यादव पहले तो औवैसी से मिलकर इस मामले को सुलझाना चाहेंगे, नहीं तो अख्तरुल ईमान से पुराने रिश्तों का हवाला देकर नया दांव खेलेंगे।

उधर, मुकेश सहनी और मांझी को भी अपने पाले में लाने की कोशिश करेंगे। अगर वह कामयाब हो गए तो तेजस्वी के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी दूर नहीं होगी।

आंकड़ों का गणित

RJD 75
कांग्रेस 19
लेफ्ट 16
महागठबंधन 110
BJP 74
JDU 45
HAM 4
VIP 4
निर्दलीय 1
NDA 128

यदि लालू इफेक्ट चला तो यह समीकरण महागठबंधन+AIMIM+HAM+VIP यानी 110+5+4+4=123 यानी पूर्ण बहुमत हो जाएगा।

लालू रहते तो बन सकती थी तेजस्वी की सरकार
तेजस्वी यादव ने पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में अपने बलबूते 75 MLA को जिताया था। लेकिन, जोड़-तोड़ करने में वो सक्षम नहीं रहे और सरकार नहीं बना पाए। जबकि, लालू यादव के लिए 110 से 122 तक का आंकड़ा बहुत मुश्किल नहीं था। उनका MY समीकरण ही उनको सरकार में पहुंचा देता। लेकिन, तेजस्वी यादव इसे समझ नहीं पाए और विपक्ष में जा बैठे।

राजद बोला- मांझी का NDA में मन नहीं लग रहा
RJD के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी कहते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी का मन डोलने लगा है। वो अब जनविरोधी गठबंधन के साथ नही रहेंगे। उनकी और उनकी पार्टी की लगातार उपेक्षा की जा रही है। NDA में वे अब घुट रहे हैं। इस बरसात में मांझी जी NDA की नाव डूबो देंगे।

जदयू आश्वस्त- मांझी NDA को मजबूत करेंगे
हालांकि, JDU के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह जीतन राम मांझी को NDA का मजबूत साथी मानते हैं। उनका कहना है कि मांझी नीतीश कुमार में आस्था रखते हैं। उनके होने से NDA मजबूत है। RJD के लोग सिर्फ मंसूबा पालते हैं। वो कभी कामयाब नही होंगे।

सब एकजुट हैं, समीकरण निकालने की जरूरत नहीं
BJP प्रवक्ता निखिल आनंद कहते हैं कि जीतनराम मांझी और मुकेश सहनी NDA के मजबूत सहयोगी हैं। बिहार के विकास और प्रगति को लेकर ये NDA में आए थे। ये आगे भी इसी मजबूती के साथ रहेंगे। इसमें कोई समीकरण नहीं निकालना चाहिए।

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