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बीजेपी ने छोड़ा पूर्वांचल राज्य का शिगूफा, मान गए योगी, निषाद और अनुप्रिया!

लखनऊ. यूपी में सत्ता और संगठन में समन्वय बन गया है। योगी आदित्यनाथ ( UP CM Yogi Adityanath ) के प्रति भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का तेवर ढीला हुआ है। खबर है कि वह यूपी के मुख्यमंत्री बने रहेंगे। कहा तो यह भी जा रहा है कि पूर्वांचल राज्य के गठन का शिगूफा छोड़कर भाजपा ने एक तीर से दो निशाने साधने की कोशिश की है। पूर्वांचल में सक्रिय तीन क्षेत्रीय दलों के साथ ही सीएम योगी आदित्यनाथ को भी यह संदेश देने की कोशिश की गयी कि राज्य का विभाजन कर सभी की अहमियत कम कर दी जाएगी।

सूत्रों के अनुसार भाजपा से नाराज चल रहे सहयोगी दलों और पार्टी कार्यकर्ताओं को जल्द ही निकायों और निगमों में अध्यक्ष और सदस्य नामित कर उन्हें खुश किया जाएगा। पूर्व नौकरशाह और अरविंद शर्मा और हाल ही कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए जितिन प्रसाद को भी कैबिनेट मंत्री ( Cabinet Minister ) बनाया जाएगा। सत्ता और संगठन में पिछड़ों और दलितों का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाएगा। नई दिल्ली ( New Delhi ) में दो दिनों से उत्तर प्रदेश को लेकर चल रही उठापटक के बाद भाजपा ( BJP ) के केंद्रीय नेतृत्व ने राष्ट्रीय स्वंय संघ की सहमति से यह निर्णय लिया है।

होसबोले ने सौंपी थी यूपी की रिपोर्ट
सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने उप्र के मुद्दे पर रिपोर्ट संघ और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को सौंपी थी। इस रिपाेर्ट में कहा गया था कि भाजपा 2017 के जिस समीकरण के बल पर 15 साल बाद सत्ता में लौटी थी, वह सब कुछ पिछले चार साल में बिखर गया है। यूपी के सियासी दुर्ग को बचाने के लिए पुराने फॉर्मूले पर ही लौटना होगा। इसके बाद बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बी एल संतोष और पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी राधामोहन सिंह ने भी लखनऊ का दौरा किया था और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की तैयारियों की समीक्षा की थी।

अनुप्रिया, निषाद को तवज्जो
संघ की रिपोर्ट के बाद अनुप्रिया पटेल ( Anupriya Patel ) को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है जबकि, निषाद पार्टी के नेता संजय निषाद ( sanjay nishad ) की मांगों पर विचार होगा।

ओबीसी को जोड़ेगें
2017 में ओमप्रकाश राजभर और अनुप्रिया पटेल से भाजपा का गठबंधन था। अब फिर कहा गया है कि योगी आदित्यनाथ छोटे दलों से सामंजस्य स्थापित करें। पार्टी से दलितों और पिछड़े नेताओं को विभिन्न निगमों और निकायों में समायोजित करें।

क्यों जरूरी है पूर्वांचल का गढ़
भाजपा के लिए पूर्वांचल का गढ़ बचाना अहम है। यहां अन्य पिछड़ा वर्ग और दलितों की बहुलता है। पिछड़े और गरीब तबके के इस वर्ग से यहां तीन प्रमुख क्षेत्रीय क्षत्रप हैं। अपना दल (एस) की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल पूर्वांचल में ओबीसी की अधिसंख्य आबादी पटेल यानी कुर्मी बिरादरी की नुमाइंदगी करती हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में अपना दल भाजपा की सहयोगी थी। लेकिन, 2019 के बाद इन्हें भाजपा ने कोई तवज्जों नहीं दी। उचित प्रतिनिधित्व न मिलने से अनुप्रिया भाजपा से नाराज हैं।

गोरखपुर मंडल में संजय निषाद का प्रभाव
यूपी में तकरीबन 12 फीसदी आबादी मल्लाह, केवट और निषाद जातियों की है। 20 लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां निषाद वोटरों की संख्या अधिक है। निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद मल्लाह, केवट या निषाद जाति को अनुसूचित जाति में शामिल करने की लंबे समय से मांग कर रहे हैं। भाजपा इस जाति को अपने से छिटकने नहीं देना चाहती।

राजभर ने भाजपा को किया निराश
पूर्वांचल में राजभर की आबादी 12 से 22 फीसदी तक है। इस जाति के क्षेत्रीय क्षत्रप सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर हैं। पिछला चुनाव भाजपा ने राजभर की पार्टी के साथ मिलकर लड़ा था। लेकिन, बाद में उपेक्षा का आरोप लगाकर अलग हो गए। एक बार फिर से राजभर से मेलजोल बढ़ाने की कोशिश भाजपा ने की। लेकिन उन्होंने भाजपा से दोबारा गठबंधन करने से मना कर दिया है।

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