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मुंबई में मौत का मंजर, शवों को दफनाने की जगह नहीं, 1 कब्र में 2 जनाजे रखने के निर्देश जारी!

देश में कोरोना की दूसरी लहर ने कोहराम मचाया हुआ है. खासकर इस कोरोना के कहर से महाराष्ट्र के हालात सबसे ज्यादा खराब है. क्यों कि यहां मौते का आंकड़ा हर रोज रिकार्ड तोड़ रहा है. सोचिए यहां हालात कितने भयावय हैं. देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के हालात तो इतने ज्यादा बिगड़ गए हैं कि अब कब्रिस्तान में शव दफनाने के लिए जगह तक नहीं बची है. यहां स्थानिय लोगों को चिंता इस बात की भी है कि जिन जगह पर कोरोना संक्रमितों को दफनाया गया है, उसका इस्तेमाल कम से कम 4-5 साल तक नहीं कर सकेंगे. वहीं मृतक के रिश्तेदारों को कल्बादेवी में बने बड़े कब्रिस्तान जाने की सलाह दी जा रही है.

महाराष्ट्र में अल्पसंख्यक विकास मंत्री नवाब मलिक ने कब्रिस्तान में कम जगह देखते हुए निर्देश दिए हैं कि शवों को 20 फुट अंदर गाड़ा जाए. ताकि एक जगह पर दो शव दफन हो सकें.

बड़ा कब्रिस्तान के प्रबंधन ने जगह की कमी पर बताया कि मुंबई में ये सबसे बड़ा कब्रिस्तान है. इसे 7 भाग में बाँटा है. इनमें 3 का इस्तेमाल सामान्य शवों के लिए हो रहा है बाकी सबका सिर्फ़ कोविड संक्रमित शवों के लिए है.

मिड डे की रिपोर्ट के मुताबिक, जुमा मस्जिद और बॉम्बे ट्रस्ट के अध्यक्ष शोएब खातिब ने बताया, “अब तक लगभग एक हजार से ज्यादा COVID शवों को यहाँ दफनाया गया है. इनमें 125 पिछले महीने दफन किए गए हैं. उनका कहना है कि “सामान्य केस में कब्र को दोबारा इस्तेमाल कर लेते हैं लेकिन कोविड संक्रमित शवों के लिए ऐसा नहीं है. हम उस जगह को दोबारा कम से कम 5 सालों के लिए यूज नहीं कर सकते, ये सबसे बड़ी चिंता है.”

मुंबई के मुस्लिम बहुल गोवांडी में ये समस्या तेजी से बढ़ रही है. देवनार सुन्नी मुस्लिम कब्रिस्तान के अध्यक्ष अब्दुल रहमान करीमुल्लाह शाह का कहना है कि उनके इलाके में 10-15 लाख मुस्लिम हैं. बावजूद इसके वो वही स्थान इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसे 50 हजार की तादाद होने पर करते थे. रफीक नगर में आवंटित किए गए दूसरे कब्रिस्तान का भी यही हाल है.

शाह का कहना है कि दूसरा कब्रिस्तान उन्हें पिछले साल मिला था. उसमें 200 से ज्यादा शव दफनाने के लिए जगह थी लेकिन अब हालात हाथ से निकल रहे हैं. उन्होंने कब्रिस्तान में ओपन स्पेस की माँग की है.

उधर माहीम सुन्नी कब्रिस्तान वाले सिर्फ 3 किलोमीटर रेडियस के दायरे में आने वाले लोगों को कब्रिस्तान में जगह दे रहे हैं, वो भी सिर्फ अस्पताल और पुलिस की इजाजत से.

इसी तरह वर्सोवा मुस्लिम कब्रिस्तान का प्रबंधन संभालने वाले ट्रस्ट का कहना है कि वो सारी जगह कोविड संक्रमित शवों के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकते. अपनी ओर से वो कोविड शवों को सरकार के दिशा-निर्देश के मुताबिक दफनाने के लिए सब प्रयास कर रहे हैं. यही हालत बांद्रा के नौपाड़ा कब्रिस्तान की भी है.

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