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बिहार पंचायत चुनाव: मुखिया से लेकर वार्ड सदस्य तक को मिलता है कितना भत्ता, क्या है इनकी पॉवर

बिहार पंचायत चुनाव-2021 का बिगुल बज चुका है। नामांकन का दौर जारी है। इस बार पंचायत चुनाव में एक बड़ा बदलाव दिख रहा है। पिछले पंचायत चुनाव की तुलना में इस बार मुखिया से अधिक क्रेज वार्ड सदस्य बनने का दिख रहा है। मुखिया पद से अधिक वार्ड सदस्य पद के दावेदार मैदान में उतरे हैं।

पैसा बढ़ा तो ग्राम पंचायत सदस्य (वार्ड सदस्य) बनने का क्रेज भी बढ़ा

बिहार पंचायत चुनाव में पहले और दूसरे चरण के लिए नामांकन प्रक्रिया खत्म गई है। दोनों चरणों में सबसे अधिक ग्राम पंचायत सदस्य पद के लिए नामांकन पत्र भरा गया है। पहले चरण में 15,328 नामांकन पत्र दाखिल किया हुए हैं, जिसमें 8,611 ग्राम पंचायत सदस्य के लिए भरे गए हैं। दूसरे चरण में 76,279 नामांकन पत्र दाखिल हुए हैं। इनमें सबसे अधिक 41,405 नामांकन पत्र ग्राम पंचायत सदस्य की कुल 10,353 सीटों के लिए दाखिल किए गए हैं। पंचायत चुनाव में अभ्यर्थियों के इस बदले रूख की वजह हाल के दिनों में वार्ड सदस्यों के वित्तीय अधिकारों में हुए बदलाव हैं। पहले ग्राम पंचायत के लिए जिस राशि पर मुखिया का वित्तीय अधिकार होता था, अब उसका बंटवारा वार्ड सदस्यों में कर दिया गया है। 

आइए जानते हैं, सभी छ: पदों की जिम्मेवारी और अधिकार:

मुखिया की शक्तियां और जिम्मेवारी

मुखिया को प्रतिमाह 2500 प्रतिमाह भत्ता मिलता है। बिहार में ‘मुखियाजी’ को पंचायती राज व्यवस्था में कई शक्तियां मिली हैं।

  • ग्राम सभा और ग्राम पंचायत की बैठकें आयोजित करना और उनकी अध्यक्षता करना। बैठकों का कार्य-व्यवहार संभालना और उनमें अनुशासन कायम रखना। एक कैलेंडर वर्ष में ग्राम सभा की कम-से-कम चार बैठकें आयोजित करना। पूंजी कोष पर विशेष नजर रखना।
  • ग्राम पंचायत के कार्यकारी प्रशासन की देख-रेख। ग्राम पंचायत में कार्यरत कर्मचारियों की देख-रेख और दिशा निर्देश देना।
  • ग्राम पंचायत की कार्ययोजनाओं/ प्रस्तावों को लागू करना। नियमानुसार रखी गई विभिन्न रजिस्टरों के रख-रखाव का इंतजाम करना।
  • ग्राम पंचायत के तय किए टैक्सों, चंदों और फीसों की वसूली का इंतजाम। विभिन्न निर्माण कार्यों को कार्यान्वित करने का इंतजाम करना।
  • राज्य सरकार या एक्ट अथवा किसी अन्य कानून के अनुसार सौंपी गई अन्य जिम्मेदारियों और कार्यों को पूरा करना।

सरपंच की शक्तियां और जिम्मेवारी

सरपंच को प्रतिमाह 2500 प्रतिमाह भत्ता मिलता है। सरपंच को पंचायती राज व्यवस्था के तहत तीन बड़े अधिकार दिए गए हैं।

  • सरपंच को ग्रामसभा तथा ग्राम पंचायत की बैठक बुलाने और अध्यक्षता करने का अधिकार मिला हुआ है। इसके अलावा ग्राम पंचायत की कार्यकारी और वित्तीय शक्तियां भी सरपंच के पास होती हैं। ग्राम पंचायत के अधीन कर्मचारियों के कार्यों पर भी प्रशासकीय देखरेख और नियंत्रण रखने की शक्ति सरपंच के पास है।
  • सरपंच की जिम्मेदारी में गांव में सड़कों का रखरखाव, पशुपालन व्यवसाय को बढ़ावा देना, सिंचाई के साधन की व्यवस्था, दाह संस्कार व कब्रिस्तान का रखरखाव करना, प्राथमिक शिक्षा को बढ़ावा देना, खेल का मैदान और खेल को बढ़ावा देना, स्वच्छता अभियान को आगे बढ़ाना, गरीब बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था करना।

पंचायत समिति सदस्य की शक्तियां और जिम्मेवारी

पंचायत समिति सदस्य को 1000 प्रतिमाह भत्ता मिलता है। लगभग 5000 की आबादी पर निर्धारित प्रत्येक प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र से पंचायत समिति के लिये एक प्रतिनिधि पंचायत समिति सदस्य के रूप में मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष रूप से चुना जाता है। पंचायत समिति के ही प्रखंड प्रमुख का चुनाव करते हैं। इनका काम अपने पंचायत क्षेत्र की समस्या को उठाना है।

जिला परिषद् सदस्य की शक्तियां और जिम्मेवारी

जिला परिषद सदस्य का भत्ता 2500 रुपए प्रतिमाह है। जिला परिषद् सदस्य के लिए एक प्रतिनिधि को मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष रूप से चुना जाता है। जिला परिषद् सदस्य की जिम्मेवारी अपने क्षेत्र की समस्या को उठाना है। इनके पास जिला परिषद् अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव में वोटिंग की शक्तियां होती है। ये अपने क्षेत्र में काम करवाने की अनुशंसा करने की भी शक्ति रखते हैं। जिला परिषद् के काम हैं-

  • पशु चिकित्सा अस्पतालों और औषधालयों की स्थापना, चलंत निदान और उपचार प्रयोगशालाओं की स्थापना करना, गायों और सुअरों के प्रजनन प्रक्षेत्र, कुक्कुट फार्म, बत्तख-बकरी फार्म, दुग्धशाला, कुक्कुट पालन के अलावा महामारी तथा छूत रोगों की रोकथाम करना।

पंच की शक्तियां और जिम्मेवारी

पंच का चुनाव एक वार्ड में किया जाता है। पंच का भत्ता 500 प्रतिमाह है। पंचायत की ग्राम कचहरी में न्यायपीठ का गठन चार पंच और सरपंच सहित कुल पांच सदस्यों से किया जाता है। सरपंच और पंच की जिम्मेदारी होती है कि वाद दायर होने के बाद वह सौहाद्रपूर्ण समझौता से वाद का निष्पादन करें। समझौता नहीं होने की स्थिति में न्यायपीठ जांच कर अपना निर्णय सुना सकती है।

ग्राम पंचायत सदस्य (वार्ड सदस्य) की शक्तियां और जिम्मेवारी

सरकार ने ग्राम पंचायतों के वार्ड सदस्यों को ताकतवर बनाने वाली नियमावली को हाल ही मंजूरी प्रदान की है। गांवों के लिए योजनाओं के चयन और संचालन के लिए वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति गठित करने का इससे रास्ता भी साफ हो गया। अब मुखिया नहीं, बल्कि संबंधित वार्ड के सदस्य इस समिति के अध्यक्ष होंगे। इनका भत्ता 500 रुपए मासिक है। पंचायती राज के अंतर्गत आने वाले नल-जल योजना के अनुरक्षक (देख-रेख) का काम भी अब सरकार ने वार्ड सदस्य को दे दिया है। इसके लिए उन्हें अतिरिक्त दो हजार मानदेय मिलेंगे।

  • वार्ड सदस्य अगर अनुरक्षक नहीं बनना चाहेंगे, तो ऐसी स्थिति में वार्ड सभा द्वारा वार्ड सचिव को अनुरक्षक बनाएगा। इसके अलावा उपभोक्ताओं से प्रतिमाह 30 रुपए वसूले जाने वाले शुल्क की आधी राशि भी अनुरक्षक को दी जाएगी।
  • औसतन एक वार्ड में 200 घर हैं, जिसके हिसाब से छह हजार शुल्क की वसूली होगी। इस तरह तीन हजार अनुरक्षक को मिलेंगे।
  • पहले ग्राम पंचायत के लिए आने वाली जिस राशि पर मुखिया का वित्तीय अधिकार होता था, अब उसका बंटवारा वार्ड सदस्यों में कर दिया गया है।
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