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पहली बार मीडिया के सामने आए धर्मांतरण के आरोपी प्रो. शाहिद, बोले- मैं हूं बलि का बकरा

प्रयागराज धर्मांतरण मामले में ATS की रडार पर आए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर मोहम्मद शाहिद ने अपने ऊपर लगे आरोपों पर खुलकर जवाब दिया। प्रयागराज के बद्री आवास योजना कालोनी स्थित बद्र मस्जिद में उनसे एक हिंदी अखबार ने बातचीत की। उन पर कानपुर की ऋचा सिंह नाम की लड़की का धर्म परिवर्तन कराने का आरोप है। प्रो. शाहिद ने कहा कि उन्हें बलि का बकरा बनाया गया। पेश हैं धर्मांतरण और तब्लीगी जमात मुद्दे पर प्रो. शाहिद से पूछे गए सवाल और उनके जवाब…

सवाल : धर्मांतरण मामले में आपका नाम सामने आ रहा है। आप पर ऋचा का धर्म परिवर्तन कराने का आरोप है। क्या कहेंगे?
जवाब : पहली बात मेरा धर्मांतरण से दूर-दूर तक लेना-देना नहीं है। दूसरी बात ऋचा ने मेरा नाम नहीं लिया है। उसके पिता ने मेरा नाम लिया है। पिता ने कहा है कि मेरी बेटी प्रो. मोहम्मद शाहिद के बारे में बात करती थी। किसी के बारे में बात करने का मतलब यह नहीं है कि वह दोषी हो गया है। मैं तो उसको जानता तक नहीं। किस संस्थान से उसने एमबीए किया है यह नहीं बता रहे अखबार वाले। अखबारों में पढ़ा कि वो एमबीए कर रही है। मैं तो राजनीति विज्ञान विभाग का प्रोफेसर हूं। मुझे झूठा फंसाया गया है। मुझे बलि का बकरा बनाया जा रहा है।

सवाल : तबलीगी जमात मामले में आपकी गिरफ्तारी क्यों हुई थी?
जवाब : जो आरोप लगाया गया था उसमें लखनऊ सीजीएम ने मुझे बरी किया है। किसी को रास्ता दिखाना गलत बात नहीं है। यह भारत की परंपरा रही है। मुझसे विदेशों से आए लोगों ने फोन से संपर्क किया और मुसाफिरखाना का पता पूछा तो मैंने बस उन्हें अब्दुल्ला मस्जिद का रास्ता बताया था। किसी को रास्ता बताना जुर्म है क्या? पुलिस प्रशासन ने मेरे ऊपर साजिश करके कोरोना फैलाने का आरोप लगाया था, लेकिन उसका कोई सबूत पुलिस प्रशासन न्यायालय में पेश नहीं कर पाया और हम बाइज्जत बरी हुए।

सवाल : तबलीगी जमात पर धर्मांधता फैलाने और धर्मांतरण के आरोप लगते रहे हैं। आप उससे जुड़े हैं क्या कहना है?
जवाब : जमात का मूल काम युवाओं को सही रास्ते पर लाना है। यह कभी किसी को धर्म परिवर्तन के लिए नहीं कहता। यह जमात के प्रति दुष्प्रचार है जो राजनीतिक स्वार्थ के लिए किया जाता है। हम सभी को सारे धर्मों की अच्छाइयां बताते हैं। कोई तबलीगी धर्म परिवर्तन नहीं कराता।

सवाल : अगर सबकुछ ठीक है तो आपको इलाहाबाद यूनिवर्सिटी ने क्यों निलंबित किया गया?।
जवाब : कोई भी आरोप किसी पर और कभी भी लगाया जा सकता है। कुछ शक्तियां हैं जो मेरे पीठ पीठे साजिश करती रहती हैं। तबलीगी जमात मामले में मेरा नाम घसीटने पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने मुझे 21 अप्रैल 2020 को निलंबित कर दिया। मुझ पर कोरोना फैलाने और बिना बताए जमात के कार्यक्रम में जाने का आरोप लगाया गया।

19 जुलाई 2020 को 90 दिन पूरे हो गए फिर भी विश्वविद्यालय प्रशासन मुझे आरोप पत्र नहीं सौंप पाया। इसके बाद दूसरी जांच कमेटी का गठन 11 जनवरी 2021 को किया गया। 20 जनवरी को पहली बार कुलपति ने मीटिंग की और 18 फरवरी को जांच कमेटी की संस्तुतियों को मंजूर करते हुए मेरा निलंबन वापस ले लिया गया। 22 फरवरी 2021 को मेरी पुन: ज्वाइनिंग हो गई। अगर आरोप सही होते तो मेरा निलंबन वापस क्यों होता?। अभी शिवकुटी थाने में दर्ज मुकदमा जिला एवं सत्र न्यायालय में लंबित है। इसका फैसला आने के बाद निलंबन अवधि के देयों का भुगतान भी हो जाएगा।

सवाल : बार-बार आपका नाम विवादों में क्यों आता है?
जवाब : हम तबलीगी जमात से ताल्लुक रखते हैं। मेरा किसी से कोई झगड़ा आज तक नहीं हुआ। न ही किसी ने मेरी शिकायत की है कि ये इस्लाम धर्म की तरफ बुलाते हैं। किसी को अगर फंसाया जा रहा है तो इससे हम डरने वाले नहीं हैं, क्योंकि नफा और नुकसान ऊपर वाले के हाथ में है। इज्जत और जिल्लत का वो मालिक है। सांच को आंच नहीं। इसी लिए जबसे ये प्रकरण हुआ है हम आराम से हैं। अगर हमने कुछ गलत किया होता तो खुलेआम घूमते?

सवाल : फिर आपके घर में ताला क्यों लगा था?
जवाब : मेरे घर पर ताला नहीं लगा था। मैं अपनी पत्नी के साथ बाजार गया था। मैं अपने घर पर रहता हूं। जब हमने कुछ किया नहीं तो डर किस बात का। मैं बद्र मस्जिद में रोज नमाज पढ़ने आता हूं। जिसे आना हो मिल सकता है।

सवाल : क्या आपसे अभी तक एटीएस या स्थानीय पुलिस ने संपर्क किया है?
जवाब : अभी तक उनसे न तो एटीएस ने और न ही स्थानीय पुलिस ने संपर्क किया है। अगर मुझसे कोई संपर्क करता है तो हम जांच एजेंसियों का सहयोग करेंगे। ये अफवाह उड़ाना कि हम अंडरग्राउंड हो गए हैं गलत हैं। हम तो आपके सामने खुले में बैठे हैं। मस्जिद में नमाज पढ़ते हैं। जब कुछ किया नहीं तो डर कैसा।

सवाल : आप पर छात्रों का ब्रेनवॉश करने का भी आरोप लगता रहा है। क्या कहेंगे?
जवाब : मैंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अब तक 20 स्टूडेंट्स ने पीएचडी की है। इनमें से ज्यादातर छात्राएं रही हैं। आप मेरे बारे में पता कर लीजिए, अगर कभी किसी का धर्म परिवर्तन कराया हो। मेरा कभी न तो अपने शिक्षकों से और न ही छात्रों से झगड़ा रहा है। मेरे बारे में मेरे छात्रों से पूछिए वो बताएंगे कि मैं कैसा हूं। मुझे जबर्दस्ती फंसाया गया है।

यूनिवर्सिटी से निलंबित हो चुके हैं प्रो. शाहीद

  • प्रो. शाहिद तबलीगी जमात मामले में जा चुके हैं जेल।
  • इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से भी हो चुका है निलंबन।
  • दोष सिद्ध न होने पर हो चुके हैं बहाल।
  • अभी भी जिला एवं सत्र न्यायालय में मुकदमा है पेंडिंग।
  • कानपुर की ऋचा का धर्म परिवर्तित कराने का है आरोप।
  • अभी तक एटीएस या स्थानीय पुलिस ने नहीं की पूछताछ।
  • पत्नी के साथ बद्री आवास कालोनी में रहते हैं प्रो. शाहिद।
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