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मोदी ने अरबों डॉलर से ऊपर रखा देश का मान, इसीलिए चीन हुआ नाराज !

 

10 दिन पहले जब HDFC में चीन के सेंट्रल बैंक के स्टेक बढ़ाकर 1.01 पर्सेंट किए जाने की खबर आई तो भारत चौकन्ना हो गया। आइए जानें, चीन कैसे और किन कंपनियों में अपना स्टेक बढ़ाकर धीरे-धीरे इंडिया इंक में अपनी पैठ बनाने के बारे में सोच रहा था। पेमेंट्स मोबिलिटी और ईकॉमर्स सेक्टर में चीन की कंपनियों ने बड़े निवेश पहले ही किए हैं।

HDFC की खबर ने किया चौकन्ना

11 अप्रैल 2020 को एचडीएफसी लिमिटेड ने एक रेगुलेटरी फाइलिंग में बताया था कि चीन के सेंट्रल बैंक यानी पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने उसमें अपना स्टेक बढ़ाकर 1.01% कर लिया है। पहले यह स्टेक 0.8% था। इसके बाद सेबी ने पहले तो भारतीय कंपनियों में उन इकाइयों की शेयरहोल्डिंग की डिटेल्स मांगीं जिनके अल्टिमेट बेनेफिशरी चीन या हांगकांग में हैं और इसके बाद इस सवाल के दायरे में पाकिस्तान, नॉर्थ कोरिया, ताइवान और ईरान की इकाइयों को भी ला दिया।

वेंचर फंड्स की भारतीय कंपनियों में दिलचस्पी

हाल के महीनों में चीन के वेंचर फंड्स ने भारतीय कंपनियों में काफी दिलचस्पी दिखाई है। फोसुन, दीदी, टेनसेंट और शाओमी सरीखी जानी-पहचानी कंपनियों और फंड्स के अलावा शुनवेई, होराइजंस और साइनोवेशन जैसी चीनी कंपनियां भी भारत में खरीदारी के मौके तलाश रही हैं।

किन सेक्टर्स में बढ़ी चीन की दिलचस्पी?

सेंट्रम इंफ्रास्ट्रक्चर के एमडी संदीप उपाध्याय ने कहा कि चीन के वेंचर फंड्स की भारत की हाई-ग्रोथ कंपनियों में दिलचस्पी बढ़ी है। उपाध्याय ने कहा, ‘महामारी का सबसे खराब दौर चीन में खत्म हो चुका है, वहीं भारत की कई लिस्टेड और अनलिस्टेड कंपनियों का वैल्यूएशन आकर्षक दिख रहा है। पेमेंट्स (पेटीएम), मोबिलिटी (ओला), ईकॉमर्स सेक्टर , रिन्यूएबल एनर्जी, फार्मास्युटिकल्स, मैन्युफैक्चरिंग से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन जैसे सेक्टरों में चीन के निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है।’

किन कंपनियों में कितना निवेश?

बिगबास्केट में अलीबाबा का करीब 25 करोड़ डॉलर का निवेश है। बायजूज में चीन की टेंसेंट होल्डिंग्स ने करीब 5 करोड़ डॉलर का निवेश किया है। डेल्हिवरी में फोसुन ने करीब 2.5 करोड़ डॉलर लगाए हैं। ड्रीम 11 में स्टेडव्यू कैपिटल और टेंसेंट का 15 करोड़ डॉलर का निवेश है। हाइक में टेंसेंट और फॉक्सकॉन का 15 करोड़ डॉलर का निवेश है, वहीं ANI टेक्नॉलजीज (ओला ) में चीन की कंपनियों का 50 करोड़ डॉलर का निवेश है।

पेटीएम मॉल में अलीबाबा ग्रुप ने 15 करोड़ डॉलर लगाए हैं, जबकि पेटीएम में 40 करोड़ डॉलर। ओयो में चीन की कंपनियों के 10 अरब डॉलर का निवेश है। जोमैटो में अलीबाबा और शुनवेई के करीब 20 करोड़ डॉलर का निवेश है। ये सभी यूनिकॉर्न हैं, इनके अलावा भी कई यूनिकॉर्न्स हैं, जिनमें चीन की कंपनियों का बड़ा निवेश है। (यूनिकॉर्न उस स्टार्टअप को कहा जाता है जिसका वैल्यूएशन 1 अरब डॉलर से अधिक का है।)

बैंकों को कर्ज देने को तैयार चीनी बैंक

चीन के बैंक भारत की बड़ी कंपनियों को कर्ज देने को भी तैयार हैं। इंडस्ट्रियल ऐंड कमर्शल बैंक ऑफ चाइना का ऑफिस मुंबई में है। बैंकिंग जगत के सूत्रों के अनुसार, इस बैंक ने हाल में अपनी टीम का आकार बढ़ाया है। इसने रिलायंस कम्युनिकेशंस से लोन रिकवरी के लिए 2019 के आखिरी दिनों में अनिल अंबानी के खिलाफ लंदन की एक अदालत में मुकदमा भी किया था।

आसान है भारतीय कंपनी में स्टेक लेना?

निपॉन लाइफ इंडिया AMC के सीईओ संदीप सिक्का ने कहा कि भारत का इक्विटी और डेट मार्केट काफी रेगुलेटेड है और किसी भी एफपीआई के लिए चुपके से किसी भारतीय कंपनी में बड़ा स्टेक लेना असंभव है।

पेटीएम, जोमैटो, बिगबास्केट और ड्रीम11 पर पड़ेगा असर

ग्रोथ के शुरुआती दौर में चल रहीं कुछ स्टार्टअप्स की भी चीन के इनवेस्टर्स से फंड हासिल करने के लिए बातचीत चल रही थी और इनके लिए भी इसमें रुकावट आ सकती है। एक यूनिकॉर्न के फाउंडर ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर ईटी को बताया, ‘हमारी जैसी कंपनियां मुश्किल स्थिति में हैं जिनमें चाइनीज इनवेस्टर्स की पहले ही 33 पर्सेंट हिस्सेदारी है। इस माहौल में हमें इनवेस्टमेंट नहीं मिलेगा।’ उन्होंने कहा कि सरकार की इस घोषणा से भविष्य में फंडिंग हासिल करने में देरी हो सकती है।

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