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पटना में कोरोना की जांच में फर्जीवाड़ा, सरकारी रिकॉर्ड में 1131 लोगों का मोबाइल नंबर- 0000000000

पटना . कोरोना की जांच में बड़ा खेल उजागर हुआ है। खेल मेडिकल अफसरों की मनमानी का है। उन्होंने सारा काम डाटा ऑपरेटरों पर छोड़ दिया है, जिससे फर्जी डाटा की फीडिंग हो रही है। ताजा मामला पटना के 1131 लोगों की कोरोना जांच के बाद उनके मोबाइल नंबर के आगे 0000000000 दर्ज करने का है।

सिविल सर्जन के आदेश पर जांच में जो खुलासा हुआ है वह चौंकाने वाला है। डाटा ऑपरेटरों ने मोबाइल नंबर दर्ज करने की झंझट के कारण जांच कराने आए लोगों का मोबाइल नंबर गायब कर दिया। जांच के बाद लापरवाही का बड़ा खेल सामने आया है, जिसमें मेडिकल अफसरों को चेतावनी देते हुए 3 डाटा ऑपरेटरों को कार्यमुक्त कर दिया गया है।

1 से 31 मई के बीच हुई जांच में किया खेल

मीडिया टीम ने यह गंभीर मामला उठाया था, जिसके बाद हुई विभागीय जांच में पाया गया कि 1 मई से 30 मई 2021 तक पटना में कुल 1131 जांच की जांच कराने वालों के मोबाइल नंबर के आगे शून्य दर्ज है। इसमें सबसे अधिक मामला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पटना सदर का है। यहां 595 लोगों के नंबर की जगह 0000000000 है। इस मामले की जांच में पाया गया कि जिन लोगों के नाम के आगे 0000000000 मोबाइल नंबर दर्ज था रजिस्टर में उनका मोबाइल नंबर लिखा था।

इस गंभीर मामले में जब संबंधित डाटा कमिर्यों से पूछताछ की गई तो उन्होंने स्वीकार किया कि डाटा दर्ज करने में लगने वाली मेहनत से बचने के लिए वह संबंधित नाम के आगे मोबाइल नंबर की जगह जीरो-जीरो लिखते चले गए। डाटा ऑपरेटरों ने यह लिखित रूप से स्वीकार किया है कि उन्होंने जान बूझकर ऐसा किया है।

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को चेतावनी

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पटना सदर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने जांच की। इसमें कहा कि कोरोना जांच से संबंधित व्यक्ति का मोबाइल नंबर रजिस्टर में दर्ज है, लेकिन प्रखंड अनुश्रवण एवं मूल्यांकन सहायक मेघा कुमारी, विवेक कुमार और मनीष कुमार संजीवनी डेटा ऑपरेटर द्वारा मोबाइल नंबर नहीं दर्ज किया गया है। इसके लिए तीनों कर्मियों को दोषी बताया गया। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने तीनाें पर कार्रवाई के लिए अनुशंसा कर दी।

जांच से लोगों का भरोसा उठा

जांच में पाया गया कि मेघा कुमारी, प्रखंड अनुश्रवण व मूल्यांकन सहायक काम लापरवाही वाला था। पूर्व में भी उनका काम संतोषजनक नहीं रहा है। संजीवनी डाटा ऑपरेटर, उर्मिला इंटरनेशलन प्रालि के डाटा ऑपरेटर विवेक कुमार और मनीष कुमार द्वारा भी गंभीर लापरवाही की गई है। इनके इस कृत्य से न सिर्फ विभाग की छवि आम जनमानस में धूमिल हुई है, बल्कि कोविड संक्रमण में किए गए जांच पर भी प्रश्न चिन्ह लग गया है। ऐसे में तीनों को कार्यमुक्त करने के लिए संस्तुति कर दी गई। इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति भविष्य में नहीं हो, इसके लिए जिला स्तर पर जिला अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारी एवं प्रखंड स्तर पर प्रखंड अनुश्रवण एवं मूल्यांकन सहायक, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को जवाबदेह बनाया गया है।

आदेश को दिखा दिया ठेंगा

सिविल सर्जन ने सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को अपने देख रेख में डाटा इंट्री का निर्देश दिया था लेकिन प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, पटना सदर द्वारा अपने स्तर से काम में लापरवाही की गई। ऐसे में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पटना सदर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति नहीं होने के लिए कड़ी चेतावनी दी गई है।

मोबाइल नंबर नहीं होने पर यह है आदेश

रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, सब्जी मंडी, कम्यूनिटी किचेन, मलिन बस्तियों, आउटरिच कैम्प में जांच के दौरान लोगों के पास मोबाइल नहीं होने की स्थिति में जांच करना संभव नहीं हो पाता है क्योंकि पोर्टल पर बिना मोबाइल नंबर दर्ज किए उनकी जांच किया जाना संभव नहीं होता। इस समस्या को लेकर जिला स्वास्थ्य समिति ने निर्देश जारी किया है कि मोबाइल नम्बर नहीं होने पर प्रयोगशाला प्रावैधिकी अपने मोबाइल नंबर का उपयोग करेंगे।

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