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एंबुलेंस नहीं पहुंची तो महिला को ठेले पर लेकर पहुंचे अस्पताल, डॉक्टर ने देखा तक नहीं; मौत के बाद शव भी ठेले पर ही गया

जयपुर/भीलवाड़ा :  कोरोना संक्रमण को लेकर अब रोजाना चौंकाने और डराने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं। शुक्रवार को राजस्थान के भीलवाड़ा से झकझोर कर रख देने वाली एक ऐसी ही तस्वीर सामने आई। यहां मजबूर परिजनों को एंबुलेंस न मिलने की वजह से महिला को ठेले पर अस्पताल ले जाना पड़ा। वहां किसी डॉक्टर ने उसे देखा तक नहीं। यही नहीं, महिला की मौत के बाद भी संवेदनहीन सिस्टम को शर्म नहीं आई। परिजनों को वापस ठेले पर ही करीब एक किमी.दूर शव को वापस लाना पड़ा।

घटना भीलवाड़ा से 35 किलोमीटर दूर बनेड़ा गांव की है। यहां डेढ़ घंटे तक 108 एंबुलेंस का इंतजार करने के बाद बीमार महिला को परिजन ठेले पर ही अस्पताल में लेकर पहुंचे। हैरान कर देने वाली बात है कि कोई निजी वाहन भी उसे ले जाने के लिए तैयार नहीं हुआ। आखिरकार लापरवाह सिस्टम से जूझते हुए बिना इलाज के ही महिला की मौत हो गई। इसके बाद अस्पताल स्टाफ और प्रशासन एक-दूसरे की कमी को छिपाने में लगे रहे। परिजनों ने अस्पताल में हंगामा कर दिया।

मृतक महिला का नाम मायादेवी छीपा (50) था। वह चारभुजा मंदिर के पास रहती थी। गुरुवार शाम बुखार आया था। परिजनों ने कंपाउंडर को बुलवाया था, जिसने इंजेक्शन लगाया। उससे बुखार तो उतर गया, लेकिन शुक्रवार सुबह उसकी फिर तबीयत बिगड़ गई।

शुक्रवार सुबह करीब 10:45 बजे एएनएम नरेशकुमारी व फार्मासिस्ट नरेश मीणा पास मरीज को देखने गए। परिजनों ने मायादेवी की तबीयत के बारे में बताया। तब दोनों ने महिला को सैनेटाइज किया। पल्स देखी। ऑक्सीमीटर से भी जांच की। मेडिकल टीम ने कहा कि ऑक्सीजन लेवल काफी कम, 40 ही है। इन्हें तत्काल भीलवाड़ा ले जाएं। परिजन मुकेश छीपा ने बताया कि सुबह करीब 11.15 बजे एंबुलेंस के लिए 108 पर फोन कर दिया था। उन्हें बताया कि एंबुलेंस को पहुंचने में दो घंटे लगेंगे। परिजन ने अपने स्तर पर निजी वाहन के लिए काफी कोशिश की।

कोरोना के डर के कारण निजी वाहन वाले भी मरीज को ले जाने को तैयार नहीं हुए। तब परिजनों ने दोबारा 108 को कॉल किया। उन्हें फिर से कहा गया कि एंबुलेंस को आने में दो घंटे तक लग सकते हैं। परेशान होकर परिजन महिला को उपचार कराने के लिए हाथ ठेले में लेटाकर अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां पर डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।

डॉक्टरों ने देखा तक नहीं

डॉक्टरों की लापरवाही कहें या फिर सिस्टम की बदइंतजामी। परिजन महिला को बचाने के लिए ठेले पर लेकर पहुंचे। मुकेश का आरोप है कि वहां पर डॉक्टरों ने उसे देखा तक नहीं। स्टाफ दूर-दूर घूमता रहा। डॉक्टर फोन पर बातें करते रहे। अगर उस समय पर देख लेते तो शायद महिला की जान बच सकती थी। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। सूचना पर पुलिस पहुंची। परिजनों से बातचीत कर मामला शांत करवाया।

सफाई: ढाई घंटे तक परिजनों ने गंभीरता ही नहीं समझी

सामुदायिक अस्पताल के प्रभारी डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि सुबह करीब 11 बजे मायादेवी का ऑक्सीजन लेवल 40 के करीब आ गया था। चिकित्सा विभाग की टीम ने परिजनों को यह गंभीरता बताते हुए तत्काल भीलवाड़ा ले जाने के लिए कहा। परिजन दोपहर डेढ़ बजे उसे अस्पताल लेकर आए तब तक मौत हो चुकी थी। मरीज को लाने के बाद डॉक्टर ने नहीं देखा यह आरोप गलत है। महिला का कोरोना सैंपल नहीं लिया गया।

बीमार को लाए तब एंबुलेंस अस्पताल में थी

ढाई घंटे तक एंबुलेंस मरीज को लेने नहीं गई। बीमार को ठेले में लेकर अस्पताल गए तब एंबुलेंस परिसर में ही खड़ी थी। यही नहीं, परिजन अस्पताल से करीब 1 किलोमीटर दूर शव भी ठेले पर ही डालकर ले गए। परिसर में निजी वाहन थे लेकिन कोरोना के शक में कोई शव ले जाने को भी तैयार नहीं हुआ।

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