Friday , July 30 2021
Breaking News
Home / खबर / HRD मंत्रालय से I&B, फिर कपड़ा मंत्रालय से W&CD तक: मोदी सरकार में यूं हुआ स्मृति ईरानी का पतन

HRD मंत्रालय से I&B, फिर कपड़ा मंत्रालय से W&CD तक: मोदी सरकार में यूं हुआ स्मृति ईरानी का पतन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट विस्तार किया तो मीडिया में चर्चा केवल उन मंत्रालयों की हो रही है, जिसमें नए मंत्रियों की इंट्री हुई हैं। इसके विपरीत इस बार पीएम मोदी ने सबसे विवादित रहीं कैबिनेट मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी का कद और अधिक छोटा कर दिया है। पहले स्मृति के पास महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के साथ ही कपड़ा मंत्रालय भी था, लेकिन अब कपड़ा मंत्रालय उनसे छीनकर कैबिनेट के सबसे प्रभावशाली मंत्री पीयूष गोयल को दे दिया गया।

स्मृति मोदी कैबिनेट की एक ऐसी मंत्री हैं, जिनके कद को लगातार छोटा किया जा रहा है, इसकी कई वजहें हैं। उनकी शिक्षा से लेकर उनके द्वारा खड़े किए गए अनेकों विवाद ही अब उनके लिए मुश्किलों का सबब बन गए हैं। 2014 में स्मृति ईरानी अमेठी से लोकसभा चुनाव हार गईं थी, तब भी उनकी मेहनत के कारण उन्हें मोदी सरकार का सबसे अहम मंत्रालय मानव संसाधन विकास मंत्रालय दिया गया था। लोगों ने पीएम मोदी के इस फैसले पर अनेकों सवाल उठाए, लेकिन फैसले में कोई बदलाव नहीं हुआ।

इसके विपरीत स्मृति की शिक्षा को लेकर खूब बवाल मचा, उनकी डिग्री में आर्ट्स-कॉमर्स का विवाद मोदी सरकार की छवि खराब करता रहा। अपने चुनावी एफिडेविट में अलग-अलग जानकारी देने के चलते विपक्ष के हमले बढ़ते गए; ऐसे में न चाहते हुए भी स्मृति से शिक्षा मंत्रालय छीन लिया गया।

साल 2019 में जब स्मृति ईरानी अमेठी के सांसद राहुल गांधी को उनकी परंपरागत सीट से हराकर, जीती थी, तो एक बार फिर उन्हें अहम पद मिला था, जिनमें महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के साथ कपड़ा मंत्रालय भी शामिल था। कपड़ा मंत्रालय को पीएम मोदी के खादी ग्रामोद्योग के ड्रीम प्रोजेक्ट से जोड़कर देखा जाता था। इसके विपरीत पिछले दो सालों में स्मृति ईरानी की मंत्रालय के संबंध में उदासीनता और पुराना कार्यकाल उन पर भारी पड़ा। पीएम मोदी ने उनसे कपड़ा मंत्रालय भी छीन लिया और आज की स्थिति में उनके पास केवल महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ही बचा है।

स्मृति के कद छोटे होते रहने के पीछे एक पैटर्न है। पहले शिक्षा मंत्रालय फिर विवादों के कारण उससे हटाकर पीएम ने उन्हें सूचना प्रसारण मंत्रालय दिया। इसके विपरीत उनका विवादों से नाता नहीं टूटा। स्मृति ने सबरीमाला मंदिर के संबंध में ही बयान देते हुए कहा था कि पूजा का अधिकार है परंतु अपवित्र करने का नहीं। भले ही सबरीमाला मंदिर के निर्णय पर अनेकों लोग सुप्रीम कोर्ट से सहमत नहीं थे, लेकिन स्मृति का बयान निंदनीय ही माना गया था। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत काम करने के बावजूद स्मृति ने फेक न्यूज फैलाने वाले टीवी चैनलों पर न तो कोई खास कार्रवाई की, न ही अपनी कर्मठता दिखाई। उनके साथ रहे तो केवल विवाद!

स्मृति ईरानी के कारण राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के कार्यक्रमों तक में विवाद हुआ था। साल 2018 में नेशनल अवार्ड सेरेमनी के दौरान 70 लोगों ने स्मृति के कारण आयोजन में शामिल होने से इन्कार कर दिया। स्मृति की आक्रामकता और शैली इन लोगों की हमेशा ही अखरी। स्मृति के शासन के दौरान ही सूचना प्रसारण मंत्रालय और प्रसार भारती तक के बीच टकराव की स्थितियां आ गईं। इन सबके बाद जब लोकसभा चुनाव में अमेठी से उनकी जीत हुई, तो उन्हें कपड़ा मंत्रालय के साथ महिला एवं बाल विकास मंत्रालय दिया गया।

स्मृति को दो अहम पद देकर ये दिखाने की कोशिश की गई कि उनका प्रमोशन हुआ है, लेकिन विवादों में रहने वाली स्मृति को साइड लाइन करने की तैयारी उसी वक्त से हो चुकी थी। कपड़ा मंत्रालय को लेकर स्मृति की उदासीनता उन पर भारी पड़ी और उन छीनकर हाल में ही ये मंत्रालय पीयूष गोयल को दे दिया गया है। स्मृति को 2014 में उनकी क्षमता से ज्यादा देते हुए पीएम मोदी ने उनसे अच्छे काम की उम्मीद की थी, लेकिन बदले में स्मृति ने कोई खास काम तो नहीं किया, अपितु विवादों की झड़ी लगा दी।

वो पहली ऐसी मंत्री थीं, जिनका कद छोटा करके मोदी सरकार बैकफुट पर गई थी। स्मृति को उनकी कम क्षमता के बावजूद बड़े पद दिए गए, तेजी से सफलता की सीढ़ियां चढ़ने के बावजूद स्मृति ने उनकी इज्जत नहीं की। विवादों के कारण मोदी सरकार की फजीहत कराने के अलावा स्मृति की कोई उपलब्धि नहीं थी, नतीजा ये कि आज वो कैबिनेट और बीजेपी साइड लाइन हो चुकी हैं।

loading...

Check Also

IND vs SL 3rd T20: भारत की शर्मनाक हार में करिश्माई कैच लपके श्रीलंकाई कप्तान, देखें Video

श्रीलंका के खिलाफ तीसरा टी20 मैच भारत की लचर बल्लेबाजी के लिए हमेशा याद किया ...