Monday , October 25 2021
Breaking News
Home / खबर / बिलासपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति ने दफ्तर में लगवाया तख्त, यूज करते हैं सरकंडे की कलम

बिलासपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति ने दफ्तर में लगवाया तख्त, यूज करते हैं सरकंडे की कलम

तस्वीर देखकर चौंकिए मत। यह छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी यूनिवर्सिटी (ABVU) का कुलपति कक्ष है। यहां कुलपति प्रोफेसर अरुण दिवाकर नाथ वाजपेयी लकड़ी के तख्त पर बैठकर सरकंडे की कलम से लिखा-पढ़ी करते हैं। वह कहते हैं कि यह गुरुकुल की परंपरा है, जिसे निभा रहे हैं।

ज्वाइनिंग के दिन कहा था- कुर्सी हटाएं, तख्त पर बैठूंगा
दरअसल, राज्यपाल अनुसुइया उइके ने 22 फरवरी को प्रो. आचार्य अरुण दिवाकर नाथ वाजपेयी को कुलपति बनाया था। उस दौरान कुलसचिव डॉ. सुधीर शर्मा छुट्‌टी पर थे। कुलपति जब ज्वॉइनिंग करने पहुंचे तो व्यवस्था नहीं हो सकी। ऐसे में आचार्य अरुण दिवाकर ने यूनिवर्सिटी गेट पर ही अपनी शॉल बिछाई और हवन शुरू कर दिया। इसके बाद कक्ष में पहुंचते ही पहला आदेश कुर्सी हटवाने और लकड़ी का तख्त लगवाने का दिया था।

ज्वॉइनिंग के 110 दिन बाद मिला तख्त
कुलपति के आदेश के बाद नोटशीट तो चली गई, लेकिन तख्त नहीं बन सका। इस बीच स्टोर प्रभारी सहायक कुलसचिव शैलेंद्र दुबे का तबादला शहीद नंद कुमार पटेल यूनिवर्सिटी हो गया। इसके बाद UTD के सहायक प्राध्यापक सौमित्र तिवारी को स्टोर का प्रभार मिला। उन्होंने जिम्मेदारी मिलते ही सबसे पहले कुलपति प्रो. वाजपेयी के लिए तख्त बनवाया, जो उनको ज्वॉइनिंग के 110 दिन बाद सोमवार को मिल सका है।

तख्त पर बैठते ही पहले दिन लिए कई निर्णय

  • छात्रों के उत्तर पुस्तिका व डाक शुल्क का पैसा वापस करने का निर्णय लिया।
  • UTD में NCC शुरू करने NCC के कर्नल से चर्चा की।
  • सहायक प्राध्यापकों को सीनियर सहायक प्राध्यापक का वेतन की घोषणा।
  • 5 साल रुकी Ph D शुरू की गई, तीन DRC हुई।
  • सह प्राध्यापक को प्राध्यापक बनाने कमेटी गठित करने की प्रक्रिया शुरू।
  • UTD के विभागों के रिजल्ट जारी किए।
  • 10 साल से अटकी 12बी की मान्यता के लिए UGC टीम को निरीक्षण की तारीख दी गई।

संक्रमण काल में आने वालों को खिलाते थे नीम की पत्तियां
इससे पहले भी अप्रैल में जब कोरोना संक्रमण बहुत फैला हुआ था तो कुलपति प्रो. वाजपेयी मिलने आने वाले लोगों को नीम की पत्तियां चबाने के लिए देते थे। इसके बाद ही वह उनके कक्ष में जाता था। उन्होंने इसे आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति बताई और कहा कि अगर मुंह का स्वाद नहीं बिगड़ा तो आप पॉजिटिव हैं। साथ ही संक्रमण से बचाव के लिए नीम का पाउडर, तेल, पेस्ट व काढ़ा का दुनियाभर में उपयोग किया जा रहा है। हालांकि जो नीम नहीं चबाना चाहता था, उसके लिए सैनिटाइजर की भी व्यवस्था थी।

26 साल से ऐसे ही काम करते हैं
आचार्य वाजपेयी ने बताया कि वे 26 सालों से तख्त पर ही बैठकर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि गुरुकुल परंपरा में इस तरह के नियम ही पालन किए जाते थे, जिसे वे निभा रहे हैं। कुलपति अभी भी कलम-दवात का उपयोग लिखने में करते हैं। हालांकि सरकारी कामकाज में साइन करने के लिए पेन का ही उपयोग करते हैं। उन्होंने बताया कि तख्त पर बैठने से रीढ़ की हड्‌डी में समस्या नहीं होती है।

loading...

Check Also

खूबसूरत जेलीफिश को देखने नजदीक जाना पड़ेगा महंगा, 160 फीट लंबी मूछों में भरा है जहर

लंदन (ईएमएस)। पुर्तगाली मैन ओवर नाम की जेलीफिश आजकल ब्रिटेन के समुद्र किनारे आतंक मचा ...