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Jean Claude Van Damme, Dolph Lundgren and Tommy 'Tiny' Lister line up in a scene from the film 'Universal Soldier', 1992. (Photo by TriStar/Getty Images)

लैब में तैयार हो रहे चीन के सैनिक, एकदम हॉलीवुड फिल्म ‘यूनिवर्सल सोल्जर’ की तरह!

पेइचिंग
चीन अपने सैनिकों को महाशक्तिशाली बनाने के लिए उनके ऊपर बायोलॉजिकल एक्सपेरिमेंट कर रहा है। जिन सैनिकों के ऊपर यह प्रयोग किए गए हैं, उनमें से अधिकतर भारत से लगी सीमा पर तैनात हैं। चीनी कंपनी बीजीआई ग्रुप और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के इस जीन रिसर्च प्रोग्राम से भारत के लिए खतरा कई गुना बढ़ गया है। इतना ही नहीं, चीन दुनियाभर के कई देशों के गर्भवती महिलाओं के जेनेटिक डेटा का चोरी छिपे अध्ययन भी कर रहा है।

सैनिकों को महाशक्तिशाली बना रहा चीन
यूके स्थित समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने 7 जुलाई को बताया कि बीजीआई ग्रुप ने ब्रेन सर्जरी से उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात हान सैनिकों की रक्षा के लिए जीन और दवाओं के बीच बातचीत पर अध्ययन प्रकाशित किया है। बाइडन प्रशासन के सलाहकारों ने मार्च में चेतावनी देते हुए कहा था कि चीनी कंपनी बीजीआई ग्रुप महिलाओं के जीनोमिक डेटा का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ अध्ययन कर रहा है। चीन इससे आर्थिक और सैन्य लाभ हासिल कर सकता है।

अमेरिकी सलाहकारों का मानना है कि यह प्रौद्योगिकी चीन को वैश्विक फार्मास्यूटिकल्स पर हावी होने के लिए प्रेरित कर सकती है। उन्होंने यह संभावना भी जताई कि आनुवंशिक रूप से उन्नत और महाशक्तिशाली सैनिक और दूसरी गंभीर बीमारियां अमेरिकी लोगों या खाद्य आपूर्ति को बाधित कर सकती हैं। चीन की इस रिसर्च के बारे में जानकारी के बाद से ही अमेरिकी सरकार के होश उड़े हुए हैं।

भारत के लिए कैसे खतरनाक है यह प्रयोग?
इस रिपोर्ट के अनुसार, चीनी कंपनी और पीएलए साथ मिलकर सैनिकों के जीन में बदलाव कर रहे हैं। इससे सैनिकों के ऊंचाई पर तैनाती के दौरान हाई एल्टीट्यूड सिकनेस और सुनने की क्षमता को खोने जैसी बीमारियों से राहत मिलेगी। पिछले एक साल से लद्दाख में जारी तनाव के बीच भारत और चीन ने अपने सैनिकों को लद्दाख के ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात कर रखा है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि चीनी सैनिक ऊंचाई पर तैनाती के दौरान ज्यादा बीमार पड़ रहे थे। अगर चीन इस प्रयोग में सफल हो जाता है तो उसके सैनिक ज्यादा समय तक ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात रह सकेंगे।

बीजीआई ग्रुप ने सफाई में क्या कहा?
चीन की बीजीआई ग्रुप का कहना है कि वह भ्रूण में डाउन सिंड्रोम जैसी असामान्यताओं का पता लगाने के लिए रिसर्च कर रहा है। इसके लिए वह कम से कम 52 देशों में बेचे जाने वाले प्रसवपूर्व परीक्षणों से बचे हुए खून के नमूनों और आनुवंशिक डेटा को इकट्ठा कर रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस चीनी कंपनी ने कम से कम 80 लाख महिलाओं के प्रसवपूर्ण परीक्षण किए हैं। हालांकि, कंपनी का दावा है कि वह केवल चीन की ही महिलाओं के डेटा को इकट्ठा करती है, बाहरी देशों के नहीं।

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