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यूपीः बिजली व्यवस्था देखने जा रहे थे बीजेपी विधायक, मझधार में फंस गई उनकी नाव

कुशीनगर के रेता क्षेत्र में बिजली की व्यवस्था देखने गए खड्डा विधायक जटाशंकर त्रिपाठी की नाव नारायणी नदी में फंस गई। नदी के बीच बालू के टीले में फंसी नाव में मौजूद लोगों को बचाने के लिए पुलिस बुलानी पड़ी। दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने विधायक को सुरक्षित नदी उस पार पहुंचाया। गनीमत ये रही कि, इस बीच विधायक के साथ एसडीआरएफ के लोग मौजूद थे।

विधायक अपने लाव लश्कर के साथ रेता क्षेत्र के गांवों में बिजली व्यवस्था को लेकर होने वाली महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लेने गए थे। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से वापस आते समय खड्डा के विधायक जटाशंकर त्रिपाठी की नाव नदी में फंस गई थी। वह लकड़ी की नाव को छोड़कर अपने गनर के साथ एसडीआरएफ की नाव से गंडक नदी के रास्ते पनियहवा पहुंचने वाले थे कि, नाव बीच नदी में बालू में फंस गई। उनके साथ खड्डा एसडीएम अरविंद कुमार सहित कई लोग मौजूद थे। नाव नदी की बीच धारा में बालू के टीले में फंस गई। इसके चलते नाव में सवार विधायक और उनका गनर घबरा गए। विधायक की नाव नदी में फंसने की सूचना हनुमानगंज थाने की पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस दूसरी नांव लेकर वहां पहुंची, दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद विधायक सहित अन्य फंसे लोगों को नदी पार लाया जा सका।

टावर और सोलर प्लांट लगाने पर विचार
विधायक जटाशंकर त्रिपाठी ने बताया कि, नदी और जंगल होने से बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो पा रही है। अब बीटीआर प्रशासन से अनुमति के लिए बिहार के मुख्यमंत्री से वार्ता की जाएगी। इसके साथ ही नदी में टावर लगाकर भैसहां से सीधे विद्युत पहुंचाने व सोलर प्लांट जैसे विकल्पों पर विचार किया जाएगा। बिहार से बिजली सप्लाई के लिए भी प्रयास किया जाएगा। आपूर्ति बहाल होने तक हमारा प्रयास जारी रहेगा। नारायणी नदी के क्षेत्र की आबादी को बिजली पहुंचाने में मुश्किलें हो रही हैं। दरअसल, यहां नदी के तेज बहाव के चलते जमीन कटने और वाल्मीकि टाइगर रिजर्व का जंगल होने से पोल लगाने सहित केबिल डालने का काम नहीं हो पा रहा है। इसलिए दूसरे विकल्पों को तलाशने विधायक सहित अधिकारियों की टीम की वहां अहम बैठक होनी थी।

दो घंटे की मशक्कत के बाद विधायक को नदी पार पहुंचाया गया।

नदी में बह गए 70 पोल
करीब 8 साल पहले खड्डा से पनियहवा, सालिकपुर होते हुए रोहुआ नाला के रास्ते दियारा होकर गांवों में बिजली पहुंचाई जा रही थी। लेकिन, नदी में कटान की वजह से 70 बिजली के पोल पानी में बह गए। इस समय भी नदी तेजी से कटान करते हुए बिहार सीमा में घुसकर जंगल काट रही है। इससे मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर, शाहपुर, विंध्याचलपुर सहित निचलौल तहसील के सोहगीबरवा की आबादी बिजली संकट झेल रही है। दरअसल, ये गांव खड्डा विद्युत उपकेंद्र से करीब 30 किलोमीटर दूरी पर हैं।

अंडरग्राउंड केबिल डालने की प्लानिंग फेल
विद्युत निगम ने सर्वे कर के रेता क्षेत्र में बिजली पहुंचाने के लिए लगभग 25 पोल लगाने के साथ अंडरग्राउंड केबिल डालने की कार्ययोजना तैयार की गई थी। लेकिन, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने वाइल्ड लाइफ कानून का हवाला देते हुए तार या पोल लगाने की अनुमति देने से इंकार कर दिया है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की एसीएफ अमिता राज के साथ 19 जुलाई को बैठक कर खड्डा विधायक जटाशंकर त्रिपाठी सहित विभागीय अधिकारी ने तार ले जाने की अनुमति मांगी थी। इस बैठक में तय हुआ था कि, दोनों तरफ के संबंधित अधिकारी बैठक कर मौके की जांच करेंगे। इसी बैठक में शामिल होने विधायक जा रहे थे।

 

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